बोरिंग दोपहर को रंगीन बनाया दो अंकल ने-3

(Boring Dopahar Ko Rangeen Banaya Do uncle ne- Part 3)

2017-09-15

This story is part of a series:

  • keyboard_arrow_left

  • keyboard_arrow_right

सुनील अंकल से चूत चुदाई के बाद बाथरूम में जाकर मैंने अपनी चुत को ठीक से साफ़ किया, फिर हाथ मुँह धोकर बाहर आ गई। बाहर आकर देखा तो आसिफ अंकल अभी भी सोफे पर बैठे थे।

मुझे प्यास लगी थी तो मैं बाथरूम से सीधे किचन में चली गई, मैंने फ्रिज से पानी की बोतल निकाल कर किचन प्लॅटफॉर्म की तरफ गई, वहाँ से ग्लास उठाकर पानी लेकर के पीने लगी।

जैसे मैंने ग्लास नीचे रखा तभी किसी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया। वह आसिफ अंकल थे। उन्होंने पीछे से अपना हाथ डालकर मेरी चूचियों को पकड़ कर मसलने लगे और अपने होंठ मेरी गर्दन पर
रखकर चूमने लगे।
मैंने अपने हाथ उनके हाथों पर रख दिए। वो बहुत ही सुंदरता से मेरी गर्दन को छेड़ रहे थे, मैं फिर से गर्म होने लगी थी, उनका मूसल सा लंड मेरी पीठ में चुभ रहा था।

आसिफ अंकल मेरे कंधे से कानों तक किस कर रहे थे, बीच में वो मेरे कान को काट भी रहे थे। उनके हाथ मेरी चूचियों को बेरहमी से मसल रहे थे, वो कभी चूची को जोर से दबाते और कभी
निप्पल को उंगलियों में पकड़ कर जोर से मसलते। उनकी हर जंगली हरकतों से मेरे मुँह से आह… निकल जाती थी।

आसिफ अंकल ने अब मेरे कंधे पे हाथ रखते हुए मुझे उनकी तरफ घुमाया और नीचे झुक कर मुझे किस करने लगे। मुझे अब सहन नहीं हो रहा था, मैंने अब पहल करने की सोच कर उनके चेहरे पर आक्रमण कर दिया। मैंने आसिफ अंकल को बांहों में लेते हुए उनके चेहरे पर माथे पर, गालों पर, होंठों पर नाक पर जहां जगह मिलती, वहाँ पर किस करने लगी थी। मैं अब धीरे धीरे नीचे की और जाने लगी थी.

उनके गले पर किस करते हुए मैं अब उनकी चौड़ी छाती तक पहुँच गई थी, उनकी छाती पर बहुत बाल थे, यह बात मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी। मैं अपना दायाँ हाथ उनके सीने के बालों में घुमाने लगी।
उनके दोनों हाथ लगातार मेरी पीठ पर चल रहे थे। वो अपने हाथ मेरी पीठ पर ऊपर से नीचे तक घुमाते, फिर नीचे ले जाकर मेरी गांड को जोर से भींच देते।

मैंने अब अपनी उंगलियों से उनके निप्पल पर से बाल हटा दिए और उनका बायें निप्पल को मुँह में लिया। आसिफ अंकल ने उत्तेजना में मेरी गांड को जोर से भींच दिया। मैं उनके छोटे निप्पल को मुँह में लेकर कर चूसने लगी।
मैं कभी उनके निप्पल को जोर से चूसती, कभी उनके निप्पल को मेरी जीभ से छेड़ती तो कभी हल्के से काटती। मैंने उनके दूसरे निप्पल को अपने उंगलियों में लेकर के खींचने लगी थी।

आसिफ अंकल को यह सब बहुत पसंद आ रहा था। वो मजे से सिसकारियाँ ले रहे थे और अपने हाथों से मेरी गांड को पकड़ कर दबा रहे थे।
थोड़ी देर बाद मैंने उनका निप्पल मुँह से निकाला, फिर मेरी नाक को उनके सीने के बालोंसे रगड़ते हुए उनके दूसरे निप्पल तक पहुंची और उस को चूसने और काटने लगी।

अंकल यह सब सहन नहीं कर सके, उन्होंने मेरी गांड के नीचे हाथ डालते हुए खड़े खड़े ही मुझे ऊपर उठाया। मैंने भी अपने पैरों को उनके पीठ के इर्द गिर्द लपेट लिया। आसिफ अंकल बहुत ताकतवर थे, उन्होंने मुझ जैसी नाजुक लड़की को बच्ची की तरह आसानी से उठा लिया था।

मेरे मम्मे अब बिल्कुल उनके मुँह के सामने थे, उन्होंने मेरी एक चुची को चूसना चालू कर दिया। मैंने अपनी बाँहें उनके गले में कस कर लपेट ली थी और उनके माथे को चूम रही थी। आसिफ अंकल बड़ी सफाई से मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी चूस रहे थे तो कभी कभी मम्मों के बीच की घाटी को चूमते और चाटते।
उनका मुसल जैसा लंड नीचे से मेरी गांड की दरार को धक्के दे रहा था और मेरी चूत उनके पेट के बालों से रगड़ खा रही थी। मैं तो मानो जैसे आसमान में उड़ रही थी।

वो दस मिनट ऐसे ही मेरे मम्मों से दूध पीते रहे। मेरी चूत का रस अब उनके पेट से होते हुए उनके लंड को भिगो रहा था।

थोड़े देर बाद वो मुझे वैसे ही उठाते हुए किचन प्लेटफार्म के नजदीक पहुंचे और मुझे नीचे किचन प्लेटफार्म पर बिठा दिया, उनका लंड अब बिल्कुल मेरी चूत के सामने था। मैं उनके मोटे काले लंड को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर उनकी आँखों में देख कर हिलाने लगी।
अब आसिफ अंकल अपनी आँखों से ही मुझे उनका लंड अपने चूत में लेने के लिए रिक्वेस्ट करने लगे।

मैंने नीचे झुकते हुए उनके लंड पर थूक दिया और हाथों से थूक उनके पूरे लंड पर फैला दिया। तीन चार बार ऐसा करने के बाद उनका लंड अब काफी चिकना हो गया था। मैंने उनके काले
सुपारे को मेरी गुलाबी चूत के दरार पे रगड़ा और चूत के छेद पर सेट किया। अब मैंने उनकी आँखों में देख कर उनको धीरे धीरे डालने का इशारा किया।

उन्होंने मेरी जाँघों को पकड़ते हुए धीरे से धक्का दिया तो उनका आधा लंड अंदर चला गया। मुझे मेरी चूत में तनाव महसूस होने लगा था, उनका मोटा लंड मेरी चूत में कसता जा रहा था। मेरे मुँह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल गई। मैंने अपने पैर से उनकी कमर को भींच लिया और अपने हाथ उनके सीने पर रख दिए।
आसिफ अंकल ने नीचे झुकते हुए अपने होंठों को मेरे होंठों पे रख दिया और धीरे धीरे धक्के देने शुरु कर दिए।

चार पांच धक्कों में उनका पूरा लंड मेरी चूत में समा गया और मेरी बच्चेदानी को रगड़ खाने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद आसिफ अंकल ने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर से हटा दिए और मुझे जोर से कस कर जोर से धक्के देने शुरु कर दिए।
मैंने भी उनको अपनी बांहों में कस कर पकड़ लिया और उनके धक्कों का मजा लेने लगी आहऽऽऽ .. माँ… ओहहह ..आआ.. औररर ..जोरररर से… औरररर… अंदर… मर… गईईई… धीरे रेरे… अंकल…

‘आहऽऽऽ ..ओहहहह.. कितनी टाइट है तेरी चूत जानेमन… देख मेरा लंड कैसे मचल रहा है तेरी … आहहह मेरा लंड पूरा छिल गया है तुझे चोदते समय… ओहहहह… आआ.. औररर तेरी चूत इतनी टाइट है कि लंड अंदर डालते समय तेरी चूत के होंठ मेरे लंड की चमड़ी को बाहर ही पकड़ कर रख रहे है… मेरे लंड का सुपारा भी पूरा छिल गया है रानी…’

आसिफ अंकल जोर जोर से धक्के देने लगे थे। मैं अब झड़ने के बहुत करीब आ गई थी और उन्हें जोर से धक्के देने को बोल रही थी। पंद्रह बीस धक्के के बाद मेरी चूत में हलचल होने लगी, मैंने
जोर से उनको भींच लिया और उनके निप्पल को अपने मुँह में ले लिया।
थोड़ी ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया। मेरा पूरा बदन काँप उठा, मैंने उत्तेजना में उनके निप्पल को जोर से काटा। मेरी चूत का झरना आसिफ अंकल के लंड को भिगोने लगा।
आसिफ अंकल ने धीरे धीरे धक्के लगाना चालू रखा और जब मैं पूरा झड़ गई तब उन्होंने अपने कमर को हिलना बंद किया।
मैं हाँफ रही थी… उनकी भी सांसें तेजी से चल रही थी।

जैसे ही झड़ने की उत्तेजना कम हुई, मैंने सर उठाकर आसिफ अंकल की ओर देखा, उन्होंने नीचे झुकते हुए अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। मैं भी उनका निचला होंठ मुँह में लेकर के चूसने लगी। थोड़े देर चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी और उनकी जीभ से खेलने लगी। हम दोनों के हाथ एक दूजे पीठ को रगड़ रहे थे।

आसिफ अंकल ने मुझे मेरी गांड के नीचे हाथ डालकर उठाया, उनका लंड अभी भी मेरी चूत में ही था। अंकल मुझे उठा कर वॉश बेसिन के पास ले कर के गए और मुझे बेसिन के प्लेटफार्म पर रखा, फिर मुझे नीचे उतारकर बेसिन के सामने लगे शीशे की ओर घुमाया।
अब हम शीशे मैं एक दूसरे को देखने लगे। एक तगड़े बलवान सावले पुरुष के सामने के नन्ही सी गोरी लड़की खड़ी थी। अब आसिफ अंकल ने पीछे से हाथ मेरे मम्मों पर रख दिए और उन्हें दबाने लगे और मेरी गर्दन पर किस करने लगे।

मैं अपनी गांड उनके खड़े लंड पर रगड़ रही थी।

अंकल किस करते हुए धीरे धीरे नीचे की ओर जाने लगे, मेरी पीठ पर किस करते हुए मेरे पीछे घुटनों पर बैठ गए और मुझे अपने हाथ प्लेटफॉर्म पर रख कर आगे को झुकने को बोला। अब मेरी गांड बिल्कुल आसिफ अंकल के सामने थी।
उन्होंने अपने हाथ मेरी गांड पर रख दिए और मेरी गांड को फैला दिया और पीछे से अपनी जीभ मेरी चुत में डाल कर चाटने लगे।
मैं उत्तेजना मैं सिसकारियाँ ले रही थी, शीशे मैं अपनी ही नंगी काया देख कर शर्मा रही थी।

चुत चाटते वक्त उनका नाक मेरी गांड के छेद को छू जाता तो मुझे अजीब सी गुदगुदी होती। वो कभी मेरी पूरी चुत को मुँह में लेकर चूसते तो कभी मेरे दाने को अपनी जीभ से छेड़ते, तो कभी
दाने को मुँह में लेकर चूसते तो कभी चुत पूरी खोल कर अपनी जीभ से चोदते।
उनकी इन हरकतों से मैं जल्द ही अपने मुकाम पर पहुँच गई और उनके मुँह में ही झड़ गई। अंकल भी लपक लपक कर के मेरा सारा रस पी गए।

अब अंकल उठ का खड़े हुए, उन्होंने मेरा मुँह उनकी तरफ घुमाया और मुझे किस करने लगे। उनकी जीभ से मुझे मेरी चुत का स्वाद मिल रहा था।
फिर उन्होंने मेरा एक पैर उठाकर प्लेटफार्म पर रखा और अपना लंड मेरी चुत पर रखा। उन्होंने मुझे एक बार आईने में देखा, फिर मेरी आँखों में आँखें डालकर एक झटके में ही पूरा लंड मेरी चुत में घुसा दिया।
मैं आअह्ह्ह हहह… कर कर जोर से चिल्लाई।

अब अंकल अपने हाथ मेरी कमर पर रख कर जोर से धक्के देने लगे, आईने में हर धक्के के साथ ऊपर नीचे हिलते हुए मेरे मम्मे देख वो पागल हो गए- ओह्हहह… मेरी जानेमन… क्या मम्मे है तेरे… ऐसा लगता है कि ऐसे ही इनको हाथों से या होंठों से मसलता रहूं… तेरी ये कमसिन जवानी को ऐसे ही नोचूँ…
‘हाँ… मेरे राजा… आआआहह हहह… आआआहहह हह… मुझे भी बहुत अच्छा लगता है जब आप उनसे खेलते हो… आपके बड़े होंठ जैसे मेरे गुलाबी निप्पल को चूसते है वैसा सुख दुनिया में कहीं भी नहीं है। और जब आपका ये बड़ा मुसल सा लंड मेरी नाजुक चुत में घुसता है… ये अहसास मैं बिल्कुल बयाँ नहीं कर सकती… अह्हह्ह्ह्ह… आईईए…ऐसा लगता है कि पेट में घुस गया हो…

आसिफ अंकल अब पागल हो गए थे। उन्होंने अब राजधानी एक्सप्रेस की स्पीड पकड़ ली थी, मेरी कमर को कस का पकड़ कर वो गचागच अपनी कमर हिला रहे थे। मेरी चुत की दोनों पंखुड़ियां मानो चुदाई की वजह से सूज गई थी, हर धक्के के साथ आसिफ अंकल का लंड सुपारे तक बाहर निकल कर आता, फिर मेरे दाने को घिसते हुए फिर से मेरे बच्चेदानी को टकरा जाता।
मैं भी उनका हर एक धक्के को अपनी कमर आगे पीछे कर के उनका साथ दे रही थी।

‘अहह… आहहहहह… नीतू… मेरी जानेमन… ओह्ह्ह… तुम्हारे जितना सुख पहले किसी ने भी नहीं दिया… तेरा ये गोरा बदन… मैं तो तेरा दीवाना हो गया हूँ… मैं आ रहा हूँ… मेरी जान… तेरी कमसिन बुर को मेरे रस से भर दूंगा…’ आसिफ अंकल अब झड़ने के करीब आ गए थे।
‘आह्ह्ह्ह… मेरे राजा… मैं भी पूरी पागल हो गई हूँ… जो सुख आप दोनों ने दिया है उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी… अब तुम मेरी चुत के मालिक बन गए हो… मैं भी आने वाली हूँ… मेरी चुत भी प्यासी है… मेरी चुत पानी पिलाओ मेरे राजा!’ मैं वासना में बड़बड़ाने लगी।

आसिफ अंकल ने भी मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया और एक जोरदार धक्का दे कर उनका लोहे जैसा रॉड मेरी नाजुक चुत के जड़ तक घुसेड़ दिया। उस धक्के से मेरा रोम रोम हिल गया। उनका लंड मेरी चुत में रस उगलने लगा ‘एक दो तीन… चार… पांच… मैं उनके लंड से मेरी बच्चेदानी में गिरने वाली पिचकारियाँ महसूस कर रही थी। उसी वक्त मेरी चुत ने भी अपना झरना उनके लंड पर छोड़ दिया और उनका लंड भिगोने लगी। मैं भी अपनी कमर पीछे करने मेरा और्गास्म एन्जॉय कर रही थी।

थोड़ी देर बाद आसिफ अंकल ने अपना पूरा लंड बाहर निकालकर फिर से एक जोर का धक्का दे दिया।
मैं इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, उनके धक्के से मैं दर्द से चिल्लाई। उस धक्के से उनके अंदर बचा सारा पानी मेरी चुत में डाल दिया।

थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना लंड ‘प्लाक’ की आवाज करते हुए बाहर निकाला और मेरी चुत में जमा हुआ हम दोनों का पानी मेरी जाँघों से बहते हुए जमीन पर गिरने लगा।
फिर हम दोनों बाथरूम गए और एक दूसरे को साफ़ किया और फिर बैडरूम में जाकर एक दूसरे की बांहों में कब सो गए, पता भी नहीं चला।
इस तरह दूसरे मुझे… मेरी सेक्स स्टोरी हिंदी में जारी रहेगी.
[email protected]

What did you think of this story??

Click the links to read more stories from the category or similar stories about , , ,

You may also like these sex stories

Download a PDF Copy of this Story

Comments

Scroll To Top