सुहागरात: एक आस एक प्यास-1

(Suhagraat Ek Aas Ek Pyas-1)

सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं के चूत में उंगली करते हुए नमस्कार।
मित्रो, मैं साहिल आज फिर एक बार अपनी एक और सच्ची घटना के साथ आपके सामने प्रस्तुत हूँ।
आप सभी ने मेरी कहानी

पढ़ी और सराहा भी, इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

आपने पढ़ा कि कैसे मेरा पहला प्यार मुझसे अलग हो गया और उसके बाद मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पाया और फिर मैंने मन ही मन सोच लिया कि अब केवल चूत और लंड का रिश्ता होगा, मन का या दिल का नहीं।

यह घटना आज से दो साल पहले की है जब मैं उसकी यादों से पूरी तरह निकल नहीं पाया था और हर जगह मुझे उसकी ही याद आती थी, कहीं भी कुछ भी अच्छा नहीं लगता था मैं हर जगह उसे ही ढूँढता रहता था।

उन्ही दिनों मेरी ही बिल्डिंग में और बिल्कुल मेरे सामने एक विवाहित महिला रहने आई पर मुझे कुछ भी पता नहीं चला, मैं बस अपने में ही मग्न घर से निकल कर ऑफिस और ऑफिस से सीधे घर।

और जब घर पर रहता तो बालकनी में खड़ा सिगरेट पीता रहता था।

उसको वहाँ आए हुए एक महीना हो गया था लेकिन अब तक मेरी नज़र उस पर नहीं पड़ी थी।

मैं तो बस अपनी महबूबा के ख़यालों में ही रहता था तो उस पर नज़र कहाँ पड़ती, रोज़ की तरह मैं ऑफिस से आकर और फ्रेश होकर अपनी महबूबा को याद करते हुए अपनी बालकनी में सिगरेट पी रहा था कि तभी मेरे घर की डोरबेल बजी।

मैंने सिगरेट वहीं बालकनी में छोड़ दी, आकर दरवाज़ा खोला और पहली बार उसे देखा।
दोहरे बदन की एक हल्की सी साँवली रंग की औरत और उसका शरीर कुछ 36-30-38, बड़ी बड़ी आँखें, गोल चेहरा, सुर्ख होंठ, चूतड़ों तक आते उसके घने बाल, मध्यम आकार की चूचियाँ, उठे हुए चूतड़।

पूरा मिला कर एक आकर्षक व्यक्तित्व!

मैं बोला- जी कहिए?
उसने पूछा- आप अकेले रहते हैं?
मैंने पूछा- क्यों?
उसने कहा- कुछ नहीं, ऐसे ही पूछा।

फिर वो अपने बारे में बताने लगी कि वो मेरे सामने वाले रूम में रहने आई है, उसको यहाँ आए एक महीना हो गया है और वो मुझे एक महीने से देखती है।

फिर उसने पूछा- आप सिगरेट कितनी पीते हैं, जब देखो तब बालकनी में खड़े होकर सिगरेट पीते रहते हैं, मुझे जब सिगरेट की महक मिलती है तो पता चल जाता है कि आप आ गए हैं।

अभी हम दरवाजे पर ही खड़े बात कर रहे थे कि उसने मुझे टोका कि मुझे अंदर नहीं बुलाएँगे क्या?
मैंने कहा- क्यों नहीं!

फिर हम अंदर आ गए और अंदर घुसते ही उसने कहा- आप अकेले रहते हैं फिर घर इतना साफ कैसे? आप खुद साफ करते है या काम वाली आती है?
मैंने कहा- मैं खुद साफ करता हूँ।
उसने कहा- क्या बात है… घर काफी अच्छा सजा कर रखा है।

और मैंने उसको धन्यवाद कहा।

बातें करते करते मैं किचन में गया और दोनों के लिए चाय बना कर लाया और हम बैठ कर बातें करने लगे।

उसने बताया कि उसका नाम लतिका है (बदला हुआ नाम), वो बरेली की रहने वाली है, साल भर पहले उसकी शादी हुई थी पर शादी के तुरंत बाद ही उसका पति उसे छोड़ कर बाहर चला गया, फिर ना ही उसका फोन कभी आया और ना ही कोई मैसेज।

आगे बोली- मैंने कभी ट्राई भी किया तो या तो लगा नहीं या उसने उठाया नहीं। ऐसा करते करते 8 महीने बीत गए और फिर घर वालों को मनाया कि ऐसे तो ज़िंदगी नहीं कटने वाली है तो मैं दिल्ली जाना चाहती हूँ, वहाँ जाकर कोई काम करना चाहती हूँ, जिससे टाइम भी पास हो जाएगा और सब ठीक भी हो जाएगा, लेकिन घर वाले मुझे यहाँ आने नहीं दे रहे थे, मेरी लाख कोशिशों के बाद वो माने फिर एक महीने पहले मैं यहा दिल्ली आई और एक ब्रोकर से यहाँ रूम लिया। फिर उसके बाद सोचा पहले कुछ दिन आराम कर लूँ फिर जॉब के लिए जाऊँगी।

बातें करते करते उसकी आँखें नम सी हो गई थी, मैंने उसको साहस बँधाया और फिर हम बात करने लगे और मैंने उसको अपने बारे में बताया और अपनी लव स्टोरी के बारे में भी।

बातों बातों में उसने कहा- आप बहुत हैंडसम हो लेकिन सिगरेट आप पर अच्छी नहीं लगती और नुकसान भी करती है तो आप इसे छोड़ दो।
मैंने कहा- देखूँगा!

फिर उसने पूछा- आप खाना बनाते हो या बाहर खाते हो?
मैंने कहा- ज़्यादातर मैं बाहर ही खाता हूँ।

फिर कुछ और देर हमने बात की और वो अपने रूम में चली गई।
और मैं फिर से बालकनी में जा कर सिगरेट पीने लगा।

रात के करीब 9 बज रहे थे कि फिर से मेरे घर की डोरबेल बजी, मैंने दरवाजा खोला तो वही भाभी थीं।
मेरे दरवाजा खोलते ही वो बोली- खाना खा लिया?
मैंने कहा- अभी नहीं।

भाभी तुरंत ही बोली- मैंने आपका खाना बना दिया है अगर आपको कोई प्रोब्लम न हो तो आप आज से मेरे ही साथ खाना खा लेना।
मैंने कहा- कोई नहीं, मैं बाहर से मंगा लूँगा।
‘इसकी क्या जरूरत है, मैं हूँ ना और मैं तो अभी खाली ही हूँ तो मैं आपका खाना भी बना दूँगी।’ उसने बोला।
और फिर कहा- खाना तैयार है, चल कर खा लो।

हमने साथ में खाना खाया और फिर उसका रूम लॉक करके मेरे रूम की बालकनी में आकर खड़े हो गए, फिर मैंने सिगरेट जलाई और हम बातें करने लगे, बातों बातों में उसने मेरे से पूछा- उसके बाद कोई लड़की नहीं पटाई क्या।
मैंने कहा- नहीं… उसकी याद अभी तक दिल से गई ही नहीं और कोई ऐसी मिली ही नहीं कि उसको भूलने में मेरी मदद कर सके।

वो कुछ देर चुप रही, फ़िर बोली- ट्राई करो, कहीं कोई आस पास ही मिल जाये।

पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगा जैसे वो अपने बारे में ही बात कर रही हो, क्योंकि उसकी शादी को भी एक साल हो गया है और अभी तक उसके पति ने उसे छुआ भी नहीं, तो चोदा क्या होगा। हो सकता है वो भी अपनी आग को ठंडा करना चाहती हो।
खैर अगर घर पे ही सब कुछ मिल जाए तो बुरा क्या है।

अभी मैं इन्ही बातों में खोया हुआ था, उसने पूछा- कहाँ खो गए?
मैंने मज़ाक में कहा- आस पास की लड़कियों के बारे में सोच रहा हूँ लेकिन आपको छोड़ कर और कोई तो नहीं लगती पटने वाली!
और हँसने लगा।

उसने कहा- हाँ तो ट्राई कर लो…
और वो भी हँसने लगी।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

उसका जवाब सुनकर मन किया कि पटक कर चोद दूँ उसे क्योंकि मेरे लंड को भी लंबा समय हो गया किसी चूत में गए।

फिर हम अंदर आ गए और वो बेड पर बैठ गई और मैं बीन बैग पर…
बैठ कर हम दोनों टीवी देखने लगे, मैं एकदम चुप बैठा था।

फिर उसने पूछा- चाय पियोगे?
मैंने हाँ कह दिया फिर वो गई और बना के लाई। हम दोनों शांत बैठे रहे और चाय पीते रहे।

कुछ देर बाद उसने चुप्पी तोड़ी- क्या हुआ चुप क्यों हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं!
और फिर टीवी देखने लगा।

फिर वो बेड से उठी और मेरे बगल में आ कर दूसरे बीन बैग पर बैठ गई।
‘क्या हुआ?’ मैंने उससे पूछा।
‘कुछ नहीं… बस यहाँ बैठने का मन कर रहा था इसलिए यहाँ आ गई।’ वो बोली।

मेरे बगल में बैठने के बाद उसने पूछा- क्या हुआ, मेरी बात पसंद नहीं आई?
मैंने कहा- कौन सी बात?
उसने कहा- वही ट्राई वाली बात?

अभी उसका इतना ही कहना था कि मैंने उसे देखा और उसे अपने ऊपर खींच कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये।

ये सब इतना जल्दी हुआ कि उसको सोचने का बिल्कुल भी वक्त नहीं मिला।
उसने तुरंत ही मुझे धक्का दिया और गुस्से से बोली- यह क्या हरकत है? मैं तुमसे मज़ाक कर रही थी और तुमने इसे कुछ और ही समझ लिया।

फिर वो उठी और अपने रूम में चली गई।

मुझे लगा जल्दबाज़ी के चक्कर में सब गया!
मैं उठा और बालकनी में जाकर सिगरेट पीने लगा। मैंने सोचा ऐसा नहीं करना चाहिए था, अगर थोड़ा ध्यान से चलता तो आज नहीं तो कल उसकी चूत मुझे मिल ही जाती… खैर कोई नहीं अब क्या सोचना!

कहानी जारी रहेगी।
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