बस में मिले लड़के का लंड चूस कर दोस्ती हुई

(Indian Gay Sex Stories: Bus Me Ladke Ka Lund Chusa- Part 10)

2017-10-05

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अभी तक आपने मेरी इंडियन गे सेक्स स्टोरीज में पढ़ा कि मैं मां के साथ सोनीपत वाली बस में अपने घर बहादुरगढ़ जा रहा था और उसी में साथ वाली सीट पर एक लड़का-लड़की जिनको देखकर लग रहा था कि नई-नई शादी हुई है, रंगरेलियाँ मनाते हुए आ रहे थे, लड़का चलती बस में अपना लंड लड़की को चुसा चुका था और बस खरखौदा बस स्टैंड पर कुछ देर के लिए रूकी थी. वो लड़का पेशाब करने बाहर निकल गया और उसके साथ मैंने भी जाकर पेशाब करने के बहाने उसके 9 इंच के लंड को खूब चूसा, उसने अपना वीर्य मेरे मुंह पर झाड़ दिया और झाड़ियों के पीछे से बाहर आ गया. उसने बताया कि वो उसकी बीवी नहीं है, उसके दोस्त की बीवी है.
अब आगे:

मैं वहीं हक्का बक्का उस लड़के के मुंह की तरफ देखता रहा तो उसने मेरे चेहरे के भाव देखते हुए पूछा- ऐसे क्या देख रहा है? वो मेरे दोस्त की वाइफ है, वो किसी काम से बाहर गया हुआ था इसलिए मैं उसकी वाइफ को उसके ससुराल छोड़ने जा रहा हूँ.
मैंने हैरानी से पूछा- तो आप अपने को अपना लंड चुसा रहे थे?
उसने कहा- क्यूं इसमें इतने हैरान होने वाली कौन सी बात है… मैं तो उसकी चूत भी मार चुका हूँ.

मेरी जिज्ञासा और बढ़ गई… मैंने कहा- पत्नी तो वो आपके दोस्त की है, तो आपने उसकी चूत कैसे मारी?
तो उसने बोला- बहुत लंबी कहानी है… जैसे तुझे मेरा लौड़ा पसंद आ गया, वैसे ही इसको भी मेरा लौड़ा पसंद आ गया था. बस वहीं से हम दोनों में शुरु हो गया. लेकिन तू ये सब क्यों पूछ रहा है. तुझे मेरा लंड लेना है तो बता, नहीं तो निकल ले!

मैंने कहा- यार, आपका लंड तो बहुत अच्छा है, चूसने में बड़ा मज़ा आता है लेकिन मैं गांड में नहीं लेता, मुझे बहुत दर्द होता है, और वैसे भी मैं किसी और को चाहता हूँ.
अब उसने इंटरेस्ट लेते हुए पूछा- तेरी कोई गर्लफ्रेंड भी है क्या?
मैंने कहा- मुझे लड़कों में इंटरेस्ट है और यहाँ सोनीपत में मौसी के लड़के की शादी में मुझे एक लड़के से प्यार हो गया और उसने मेरी गांड भी मार ली.

तो वो हंसने लगा- साले लड़के लड़के में प्यार होता है कभी?
मैंने कहा- हाँ, होता है, सब कुछ होता है और प्यार में मैंने उसे गांड भी दे दी.
तो वो बोला- फिर मुझे भी दे दे अपनी गांड… फिर देख कैसा मज़ा आता है तुझे!
मैंने कहा- नहीं भैया, मैं उसके सिवा किसी और के बारे में सोचता भी नहीं.
तो वो बोला- अभी तो तू मेरे लंड को बड़े मज़े से चूस रहा था… और अभी कह रहा है कि किसी और के बारे में सोचता भी नहीं?

मैंने कहा- लंड चूसना अलग बात है, वो तो मैंने आपके लंड को अपनी आंखों के सामने खड़ा होते हुए देखा तो मुझसे रहा नहीं गया इसलिए चूस लिया लेकिन गांड तो मैं उसी को दे सकता हूँ जिसने परसों रात मुझे इतना प्यार दिया कि मैं कभी उसको नहीं भूल पाऊँगा.
उसने कहा- अच्छा… मुझे भी तो बता ज़रा कैसे प्यार किया उसने तुझे… कौन है वो और कहाँ का रहने वाला है, क्या नाम है?

इतने में ही बस के चलने के आवाज़ सुनाई दी और हम दौड़कर बस में चढ़ गए.

उसने कहा- बता यार, मैं भी सुनूं कि गांडू को कौन प्यार दे रहा है और कैसे दे रहा है. वो भी तेरे जैसा गांडू है क्या?
मैंने कहा- नहीं, वो तो असली मर्द है.
उसने कहा- अच्छा, कहाँ का रहने वाला है?
मैंने कहा- हिसार.
उसने तपाक से कहा- फिर तो जाट होगा.
मैंने कहा- हाँ, रवि नाम है.
वो बोला- पूरा नाम बता?
मैंने कहा- रवि जाखड़!

इतनी बातें करते हुए हम अपनी सीट तक पहुंच गए और अपनी अपनी सीट पर जाकर बैठ गए लेकिन वो लड़का मेरी तरफ इशारा करते हुए उस लड़की को कुछ समझा रहा था और अगले 2 मिनट बाद ही उस लड़की ने कहा- भैया, आप कुछ देर के लिए मेरी सीट पर आ जाओ, मैं आपकी सीट पर आकर बैठ जाती हूँ, ये भैया आपसे कुछ बात करना चाहते हैं.

यह कह कर वो लड़की अपनी सीट से उठ गई और मैं अपनी सीट से उठ कर उसकी जगह जा बैठा और वो मेरी मां के पास आकर बैठ गई.
बस की लाइटें दोबारा बंद हो चुकी थीं और सब लोग सफर के आखिरी पड़ाव में झपकी लेने की मुद्रा में चले गए थे.

उसने फिर से बात शुरु की, वो बोला- हाँ तो कहाँ थे हम?
मैंने कहा- रवि की बात बता रहा था मैं!
वो बोला- हाँ, अब बता कैसे-कैसे क्या-क्या हुआ तुम्हारे बीच में और कैसे उसने गांड मारी तेरी?
मैंन कहानी बताना शुरु किया कि कैसे मैंने रवि को पहली बार देखा और उस पर फिदा हो गया… पहली रात कैसे उसके लंड को चूसा और अगले दिन बारात में लेकर जाते हुए कार में फिर उसके लंड को चूसा. फिर हम बारात लेकर लड़की वालों के घर गए और वहाँ पर रवि ने कैसे एक लड़की की चूत मारी.

मैं ये सब बातें उसको बता ही रहा था कि उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया जो अब तक उसकी पैंट में तनकर झटके मार रहा था.
इस सफर में उसका लंड तीसरी बार तन चुका था. उसने मेरे राइट हैंड को पकड़ा और मेरे कोमल हाथ को अपने लंड पर रगड़ने लगा. पैंट के ऊपर से छूते हुए उसका लंड और मोटा महसूस हो रहा था. जैसे-जैसे मेरा हाथ उसके हाथ के नीचे दबा हुआ उसके लंड पर रगड़ खा रहा था. वैसे-वैसे उसकी जांघें चौड़ी होकर फैलती जा रही थीं.

उसका लंड पूरे उफान पर आ गया… और वो बोला- रूक क्यूं गया, बता ना मेरी जान… आगे क्या हुआ?
मैंने आखिरी रात की बात बतानी शुरु की कि कैसे रवि नशे की हालत में मेरे कमरे में आया और मेरे ऊपर गिर पड़ा और…
आगे कुछ बताता… इससे पहले उसने कहा- मेरे लंड को पकड़ ले!

मैं भी कामुक हो चुका था, मैंने उसका लंड उसकी पैंट के ऊपर से ही अपने राइट हैंड में उंगलियों से पकड़ लिया.
उसके मुंह से आह निकल गई और बोला- अब आगे बता क्या हुआ?
मैंने कहा- रवि मेरे ऊपर गिरा हुआ था और मेरी टांगें उठाकर अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ रहा था.

यह सुनकर उसकी हवस और बढ़ गई और उसने अचानक से मेरी गर्दन पकड़़कर मेरे होंठ अपने खड़े लंड पर रगड़वा दिए और पूछा- फिर?
मैंने उठते हुए कहा- फिर रवि ने अपनी फ्रेंची निकली और मेरे सामने लेटकर अपनी गांड मेरे मुंह में दे दी, मैं उसकी गांड को चाटने लगा.
वो बोला- तू तो पूरी रंडी है यार! फिर क्या हुआ?
मैंने कहा- फिर रवि मेरे ऊपर आ गया और उसने अपना 8 इंच का लंड मेरी गांड में अंदर धकेलना शुरू कर दिया और मेरे मुंह पर हाथ रखकर मेरी गांड मारने लगा.

यह सुनकर वो लड़का कामुक सिसकारियाँ लेता हुआ मेरे निप्पल को मसलने लगा, कभी मेरे होठों को अपनी पैंट में खड़े लंड पर फिरा देता और कभी लंड मेरे हाथ से रगड़वाने लगता. हवस में उसकी गांड आगे पीछे होने लगी थी. जैसे वो मेरे मुंह को चोदना चाह रहा हो.

मैंने आगे की बात बताना शुरु की ही थी कि कंडक्टर ऩे आवाज़ लगाई- बहादुरगढ़ की सवारियाँ उतरने के लिए तैयार हो जाओ!

बस बहादुरगढ़ के स्टैंड पर पहुंच वाली थी और बस की लाइटें जला दी गई, उसने एकदम से अपनी पैंट की चेन खोलकर अपना लंड पैंट के हुक के नीचे दबाकर शर्ट के तले छिपा दिया और चेन बंद कर ली ताकि किसी को उसका खड़ा लंड दिखाई न दे।
उसने मुझसे मेरा नंबर मांगा, तो मैंने अपना नंबर बता दिया.

मैंने पूछा- आप कहाँ जा रहे हो?
तो उसने कहा- मैं यहाँ से आगे हिसार जाऊँगा.
कह कर वो बस स्टैंड में हिसार के प्लेटफॉर्म की तरफ बढ़ गया और हम अपने रास्ते की तरफ…

हमारा घर बस स्टैंड से ज्यादा दूरी पर नहीं था तो 10 मिनट के अंदर हम घर पहुंच गए और नहा धोकर डिनर किया और सोने की तैयारी करने लगे. रात के 11 बज चुके थे और घर के सब सदस्यों ने अपने-अपने बिस्तर संभाल लिये थे.

लेकिन मेरा मन अभी भी उचटा हुआ था, न जाने कयूं मुझे बस में मिले लड़के की बातें बार-बार कचोट रही थीं. उसके वो शब्द कि ‘अभी तो तू मेरा लंड बड़े मजे से चूस रहा था और अब कह रहा है कि तू रवि के अलावा किसी के बारे में सोचता भी नहीं…’
मैं सोचने पर मजबूर था कि क्या मैं रवि से सच में प्यार करता हूँ या यह सिर्फ उसके मजबूत सेक्सी जिस्म और उसके लंड की तरफ मेरा आकर्षण ही है. लेकिन अगर यह सिर्फ आकर्षण होता तो मेरा दिल उसके लिए क्यों रोता.

इन्हीं सब ख्यालों में मैं रात के 12 बजे तक छत पर टहलता रहा. और जब टहलते हुए थक गया तो बिस्तर पर जाकर गिर गया. पता नहीं कल का दिन कौन सा नया मोड़ लेकर आने वाला है. ये बातें दिमाग में चलते-चलते मुझे नींद आ गई और सुबह 8 बजे मां ने मुझे फिर उठा दिया.

वैसे तो मैं सुबह 5-6 बजे उठ जाता हूँ लेकिन शादी में थकान होने के कारण मां ने सोचा होगा कि आज इसको आराम करने दिया जाए… क्योंकि मां तो आखिर मां ही होती है ना… वो अच्छी तरह जानती है कि उसके बच्चे को कब किस चीज़ की कहाँ पर क्या ज़रूरत है.

खैर उठने के बाद मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और अपने एक दोस्त के पास किसी काम से चला गया. सारा दिन वहाँ वक्त बिताने के बाद शाम को डिनर के टाइम पर ही वापस आया.
लेकिन ना तो मेरा मन किसी काम में ही लग रहा था, न ही खाने-पीने में… मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मेरे साथ चल क्या रहा है, मुझे क्या चाहिए… और मैं किसके पास जाऊँ ताकि मेरा मन थोड़ा शांत हो जाए.

एक तरफ रवि के साथ जो हुआ और दूसरी तरफ उस लड़के की बातों का असर, उसके लंड की तरफ बार-बार मेरा झुकाव… आखिर एक समलैंगिक को चाहिए क्या… लड़कों के साथ सेक्स, उनका प्यार… या अपनी हवस को शांत का करने का ज़रिया… मेरे ही सवाल मुझे ही अंदर-अंदर नोच रहे थे.

मैंने सोच लिया कि मुझे रवि के पास जाना ही पड़ेगा, उससे मिलकर ही मुझे पता लग पाएगा कि मेरे साथ आखिर ये सब हो क्या रहा है.
मैंने हिसार जाने का मन बना लिया.

अगले दिन मैंने सुबह ही मां को बोल दिया कि मैं अपने दोस्त के साथ हिसार जा रहा हूँ. हमारे एक कॉमन फ्रेंड की बर्थ डे पार्टी है और मैं एक-दो दिन बाद ही लौटूंगा.

तैयार होकर मैं बस स्टैंड की तरफ निकल पड़ा और बस अड़्डे पर जाकर हिसार जाने वाली बस का वेट करने लगा… आधा घंटा वेट करने के बाद सीधा हिसार जाने वाली बस आ गई और मैं बस में चढ़ गया.

बस में एक ही सीट खाली थी जहाँ पर पुलिस की वर्दी में एक 28-30 साल का नौजवान बैठा हुआ था. मैं उसी के पास जाकर बैठ गया, मैंने उसके बैज की तरफ देखा तो उस पर नवीन जाखड़ लिखा हुआ था और वो हरियाणा पुलिस में सिपाही था. उसका शरीर काफी भरा हुआ था और उसने हाफ बाजू की शर्ट पहन रखी थी, नीचे खाकी पैंट और पैरों में काले चमड़े के जूते… उसकी जांघें काफी मोटी और मांसल थी… और टांगें फैला कर लगभग पूरी सीट पर उसी का कब्जा बना हुआ था लेकिन फिर भी मैं एडजस्ट होकर उसके साथ बची हुई जगह में बैठ गया.
मुझे लगा कि शायद ये भी हिसार ही जा रहा है.

बस वहाँ से निकल पड़ी और रोहतक रोड पर चढ़ते ही बस ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बहादुरगढ शहर से बाहर निकलते ही बस हवा से बातें करने लगी क्योंकि हरियाणा की सड़कें काफी चौड़ी और ट्रेफिक फ्री होती हैं, यहाँ की बसें बहुत स्पीड से चलती हैं.

कुछ देर बाद मैंने देखा कि वो पुलिस वाला नींद में हो गया था और बस की सीट के साथ गर्दन कमर लगाकर खर्रांटे भर रहा है. अब मैंने ध्यान से उसकी बॉडी की तरफ देखा, उसके हाथ काफी मजबूत थे और उसने अपने दोनों हाथों को अपनी जिप के पास नीचे ले जाकर एक दूसरे हाथ में उंगलियाँ फंसाकर रखा हुआ था जिससे उसकी जिप वाला भाग उसके हाथों के नीचे दबा हुआ था.
मैंने उसकी छाती की तरफ देखा जो काफी मजबूत थी और उसकी खाकी शर्ट का ऊपर का बटन खुला हुआ था। उसकी जांघें फैली होने की वजह से उसके घुटने मेर पैरों पर आकर टकरा रहे थे। मैं उसकी जिप की तरफ देख ही रहा था कि स्पीड ब्रेकर आ गया और अचानक उसकी आंख खुलीं और उसकी नज़र सीधी मेरी नज़रों पर गई.
मैंने उसको देख लिया कि वो मुझे देख रहा है लेकिन उसने आंखें दोबारा बंद कर लीं और अपने दोनों हाथ अपनी थाई से हटाकर अपने सिर के पीछे बांध लिये आराम से सोने लगा.

अब उसकी जांघों के बीच में उसके लंड वाला भाग मेरी आंखों के सामने था। एक तो पुलिस वालों की वर्दी ही इतनी मोटी होती है और दूसरी ओर उसकी जांघें मोटी होने की वजह से जिप वाले भाग पर तंबू सा बना हुआ था जिससे ना तो उसके लंड की पॉजिशन का पता लग पा रहा था और ना ही उसके साइज़ का… क्योंकि मर्दों के दीवाने उनकी चैन के पैकेज को देखकर ही अंदाज़ा लगा लेते हैं कि सामने वाले का औजार कितना बड़ा है.

मैं उसके लंड वाले भाग की तरफ देख ही रहा था कि एक और स्पीड ब्रेकर आया और वो दोबारा जग गया… और सीधी उसकी नज़र मेरी नज़रों पर ही पड़ी जो उसके लंड को उसकी पैंट में टटोलने की कोशिशों में लगी हुई थीं.
अब शायद वो भी समझ गया कि मैं कहाँ और क्यों देख रहा हूँ लेकिन उसने फिर से आँखें बंद कर लीं और ऐसा करते हुए एक बार अपनी जिप वाला भाग हल्के से खुजला दिया और ऐसा करने से उसका सोया हुआ लंड उसके लेफ्ट हैंड की तरफ साइड में दिखने लगा.

आगे की इंडियन गे सेक्स स्टोरीज जल्दी ही लेकर लौटूंगा.
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