रेखा की चुदास

2014-06-05

रवि
मेरा नाम रवि है, मैं दिल्ली के एक गांव का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 24 साल है और मेरा रंग गोरा, कद काफ़ी लम्बा है।
मैं एक सरकारी कर्मचारी हूँ और यह मेरी जिंदगी का पहला सम्भोग था।
मैं अकसर एक पड़ोस के घर जाता हूँ, उस घर में 4 सदस्य हैं, 2 बूढ़े और 2 जवान।
मैं जब भी उस घर पर जाता, उसकी बीवी भी बात करने के लिए आती थी। कभी-कभी मैं रुक कर उस से बात भी करता था, मुझे पता चला कि उनका कोई बच्चा नहीं था।
उसकी बीवी का नाम रेखा है, उसकी उम्र 29 के आस-पास है, रंग गोरा है, उसका पेट एकदम सपाट है। घर पर उसकी बीवी बोर होती है।
वो हमेशा साड़ी को नाभि के नीचे बांधती है जिससे मेरी नज़र हमेशा उस पर जाती थी और मैं चोरी-चोरी देख लेता था। उसका फिगर 36-30-34 का है, उसने अपने बदन को काफी संवार कर रखा है।
वो हमेशा मेकअप करके रहती है, अक्सर गहरे रंग की लिपस्टिक लगाती है और आँखों में काजल अक्सर लगाती है।
मैं जब वहाँ पर जाता हूँ तो मैंने यह बात नोट की है कि जब भी मेरा उधर को जाना होता है, वो अपने आपको लगे शीशे में देखती है और जल्दी से कमरे से बाहर आकर खड़ी हो जाती।
जब-जब मैं उसके पति से बात करता होता, तो वो मुझे कुछ अजीब सी नज़र से देखती थी और कुछ ना कुछ करके मेरा ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश करती थी।
ऐसा सिलसिला कुछ महीने चलता रहा और तब तक मैं भी उसके बदन को भोगने की ताक में रहने लगा था।
मेरी माँ कुछ दिनों के लिए मामा के घर जाने वाली थी, तो उस दिन मैं ऑफिस से जल्दी घर के लिए निकल गया। मुझे पता था कि रेखा घर पर अकेली होती है दिन भर !
उस समय दिन के दो बज रहे थे, मैं सोच रहा था कि आज तो कुछ जुगाड़ करना ही है। रास्ते से मैंने कण्डोम का पैकेट भी खरीद लिया कि क्या पता इनकी जरूरत पड़ ही जए !
माअं के जाने के बाद मैं रेखा के ब्घर चला गया और मैंने उसके पति के लिए पूछा तो उसने कहा कि वो कहीं काम से गए हैं।
अब मैं थोड़ी उलझन में आ गया।
तभी उसने मुझसे पूछा- आपको क्या चाहिए?
मैं बोला- आपके पति कब तक आयेंगे?
रेखा- उन्हें तो आने में एक-दो घंटे लग सकते हैं।
मैं थोड़ी देर चुप रहा और सोचने लगा कि कैसे कहूँ।
रेखा- आप इतना घबरा क्यों रहे हो..? आपको चूत ही चाहिए ना..! कोई बम्ब तो नहीं?
और वो मुस्कराने लग गई।
मैं थोड़ा सोचने लगा कि यह क्या बोल रही है, फिर मैंने सोचा कि जब यह नहीं शरमा रही है तो मैं क्यों शरमाऊँ।
रेखा- कल मेरे पति एक काम में पूरे दिन भर बाहर रहेंगे और कल सन्डे भी है, इसलिए आप मेरे घर 11 बजे आ जाना।
मैंने कहा- ठीक है।
अगले दिन ठीक 11 बजे मैंने रेखा के घर की घंटी बजाई, रेखा ने दरवाजा खोला तो उसे देख कर मैं देखता ही रहा। उसने सफ़ेद रंग का गाउन पहन रखा था, उसके वक्ष बाहर की तरफ झांक रहे थे। उसने बालों का ज़ूड़ा बना कर बांध रखा था, लिपस्टिक और काजल लगा रखी थी…
कुल मिला वो गजब क़यामत ढा रही थी..!
उसको देख कर मेरे लंड में हलचल मच गई।
रेखा बोली- यहीं खड़े देखते रहोगे या अन्दर भी आओगे?
मैं अन्दर चला गया और उसने दरवाजा बंद कर मुझे बैठने को कहा।
मैं पर बैठ गया, वो अन्दर चली गई और कुछ देर बाद मिल्कशेक का गिलास लेकर बाहर आई और मुझे गिलास पकड़ा कर मेरे पास बैठ गई।
रेखा- मैं तुम्हें आज कैसी लग रही हूँ?
मैं- बहुत ही सुंदर..! एकदम परी जैसी..! पर तुम साड़ी में बहुत ज्यादा सेक्सी लगती हो..!
रेखा- तुम्हारी माँ ने पूछा नहीं कि किधर जा रहे हो..?
मैं- वो कल ही मामा के घर 15-20 दिन के लिए गई है।
यह बोल कर वो अन्दर चली गई करीब दस मिनट बाद उसकी आवाज मेरे कानो में पड़ी- अब बताओ कैसी लग रही हूँ?
मैंने देखा कि उसने ग्रीन रंग की साड़ी पहन रखी है और ब्लाउज़ पहन रखा है, जिसमें से उसके वक्ष कहर ढा रहे थे। उसको देखते ही मेरा लंड एकदम उसके हुस्न को सलामी देने लग गया और मेरे पजामे से बाहर आने को मचलने लगा।
मैं उसके करीब गया और उसे बाँहों में लेकर उसका एक चुम्बन ले लिया।
रेखा ने मुझे चूमते हुए ही अपने हाथ से मेरे लंड को सहलाया और यह बोला कि मेरी जैसी कोई नहीं..!
यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
मैं- बिल्कुल सही..!
हम कुछ देर तक एक-दूसरे को चूमते रहे और वो मेरे लंड को पजामे के ऊपर से ही सहलाती रही। फिर मैं घुटनों के बल बैठ कर उसकी चूत को चूसने लगा, रेखा के मुँह से सिसकारी निकल गई और मेरे बालों में हाथ घुमाने लग गई। उसके मुँह से मस्ती की आवाज़ निकलने लग गई।
कुछ देर बाद मैं उसे चूमता हुआ ऊपर की ओर बढ़ने लगा और उसको चूचों को दबाने लग गया। मैंने उसकी साड़ी खोल दी और अपने पूरे कपड़े खोल कर नंगा हो गया।
उसने भी उसके बाकी कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी हो गई। मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया।
उसने मुझे अन्दर मे चलने का इशारा किया, मैंने उसको उठाया और अन्दर बेडरूम में चूमते हुए बिस्तर पर लेटा दिया।
अब मैं उसके निप्पल को चूसने लगा और अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी। उसकी चूत पूरी तरह गीली हो गई थी और गर्म थी।
रेखा ने मुझे ऊपर आने को कहा मैंने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया, वो मेरे लंड को चूसने लगी।
हम दोनों ही पूरी तरह गर्म हो गए थे, मैंने उसके मुँह से लंड निकाला और उसकी टांगों को खोला तो उसने मुझे रुकने का इशारा किया।
“कंडोम भूल रहे हो..!”
मैंने एक कंडोम निकाल कर अपने लंड पर चढ़ाया मैंने रेखा को दिखाते हुए आँख मारी।
मैं- क्यों नहीं..! इतना तो मैं कर ही सकता हूँ।
और फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसके को चूसते हुए उसको चोदने लग गया।
वो भी अपनी चूत को कड़क और ढीला करके मुझे मजा दे रही थी। उसको चोदते समय मुझे लगा नहीं कि वो एक शादीशुदा औरत है।
मस्त चुदाई के बाद उसने हम दोनों के लिए खाना बनाया।
मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हारे और भी मर्दों से सम्बन्ध हैं?
उसने कहा- नहीं, तुम पहले गैर मर्द हो…!
मैं 2 बजे तक उसके घर रुका और इस दरम्यान हमने 5 बार और सेक्स किया।
इस बात को आज 10 माह से ऊपर हो गए हैं और हम 1-2 दिन में सेक्स कर लेते हैं। आपको कहानी कैसी लगी, मुझे बताएँ..!
[email protected] gmail.com

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