मामा जी के लंड से अधूरी चुदाई हुई पूरी-1

(Chodan Kahani: Mama Ji Ke Lund Se Adhuri Chudai Huyi Puri Part-1)

2017-10-26

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अन्तर्वासना के पाठकों को रिशू का कामुकता से भरा नमस्कार, मैं सभी पाठकों को धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने मेरी पहली कहानी
सेक्सी कहानी मेरी चुत की पहली अधूरी चुदाई की
को पढ़ा और बहुत ही चुदास से भरी ईमेल भी कीं.

दोस्तो, मैं पहली बार चोदन की कहानी लिखते-लिखते इतनी चुदास सी महसूस करने लगी कि मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं पड़ोस के अपने से 4 साल छोटे लड़के से चुदवा बैठी, जिसकी कहानी मैं बाद में कभी लिखूँगी.
अभी मैं पूर्व की कहानी से आगे की चोदन कहानी बता रही हूँ.

चूंकि उस रात मेरी चुदाई अधूरी रह गई थी, मैं नंगी ही मामा की बांहों में सो गई थी. सुबह जब मेरी नींद खुली तो देखा कि मामा भी नंगे थे और मैं भी नंगी ही मामा से लिपटी हुई थी.

नींद खुलते ही मैं ये सब नजारा देख कर शर्मा गई, जल्दी उठ कर मैंने कपड़े पहन लिया, फिर मैं मामा के नंगे बदन को देखने लगी, क्योंकि मैं रात में मामा के लंड को ठीक से देख नहीं पाई थी, अभी तो मामा नींद में थे. मैंने देखा कि मामा का लंड एकदम से सिकुड़ कर छोटा सा हो गया था.. मानो किसी छोटे से बच्चे की लुल्ली हो.

मैं जानती हूँ कि मर्दों में मॉर्निंग में चुदाई की सबसे ज्यादा इच्छा होती है, इसलिए मुझे लगा कि शायद मामा नींद खुलते ही मेरी चुदाई करना चाहेंगे, इसलिए मैंने उठने के साथ ही नहाकर पूरे कपड़े पहन लिए.

थोड़ी ही देर में मामा की नींद भी खुल गई और वो भी उठकर कपड़े पहन कर फ्रेश होने चले गए. मैं मामा के लिए चाय बनाने लगी. मामा जैसे ही फ्रेश हो कर निकले, मैं चाय लेकर मामा के रूम में आ गई, पर मैं ना तो मामा से नज़र मिला पाई और ना ही कुछ बोल पाई.

मैं चाय रख कर वापस किचन में आ गई और नाश्ता बनाने लगी.

अचानक से मामाजी ने किचन में आकर मुझे पीछे से बांहों में भर लिया और बोलने लगे- सॉरी.. कल रात के लिए.. नाराज़ हो मुझसे, सच में मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ. तुम जब तक चाहो मेरे साथ रिलेशन में रह सकती हो एक प्रेमिका के जैसे.. मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा. मैं कभी भी तुम्हारे इच्छा के विरूद्ध नहीं जाऊंगा और जब कभी तुम्हें लगे इस रिलेशन को तोड़ देना चाहिए, मैं कभी मना नहीं करूँगा.

ये सब सुनने के बाद मैं टूट सी गई और उल्टा मुड़ कर मामा की बांहों में समा गई, मैं बोल उठी- आई लव यू मामा जी..
मामा खुश होते हुए बोले- तुम अकेले में मुझे मामा नहीं बोलोगी.

मामा मेरे होंठों हो चूसने लगे और मेरे टॉप में हाथ डाल कर मेरी चुची मसलने लगे. इससे मेरी चूत गीली होने लगी. मैं मामा से बोली- अभी नहीं.. अब जो भी करना है आपको.. रात में कीजिएगा.

फिर मैं नाश्ता बनाने लगी.
मामा जी नाश्ता करके बोले- मैं कोचिंग को जा रहा हूँ.. शाम को जब मैं आऊंगा तब मिलता हूँ. मैंने मोबाइल में तुम्हें कुछ वीडियो भेज दिए हैं.. देख लेना.
मामा जी ये कह कर मुस्कुराते हुए चले गए.

मामाजी की किचन वाली बात सोच कर मैं मुस्कराने सी लगी, खुश सी रहने लगी. पर मुझे थोड़ा बुरा भी लग रहा था कि रात को मैं मामा की चुदाई की इच्छा पूरी नहीं कर पाई. मैंने सोच लिया कि आज मामा से कैसे भी करके पूरी चुदाई कराऊंगी.

फिर मैं सोचने लगी कि आज मामा को कैसे खुश करूँ. ये सोच कर मेरी चूत गीली सी हो रही थी, जैसे ही मैंने चूत पर हाथ रखा, मेरी चूत के बाल चिपचिपा से रहे थे. फिर मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना आज मामा को अपनी चूत की झांटें साफ़ करके सरप्राइज़ दूँ.

मैं सोचने लगी कि झांटें कैसे साफ़ करूँ. फिर मैंने इंटरनेट पर सर्च किया तो बहुत सारे हेयर रिमूवर दिखे पर उसके लिए मुझे मार्केट जाना पड़ता.

मैंने फिर पापा की शेविंग किट निकाली और अपनी चुत पर पापा वाली शेविंग क्रीम लगाई.. थोड़ी देरी के बाद पापा के रेज़र से चूत की झांटों की सफाई की. उसके बाद तो मानो चूत में एक अजीब से गुदगुदी सी होने लगी थी. अब मेरी चिकनी सांवली सी चुत एकदम साफ़ चिकनी और चमकदार दिख रही थी. मुझसे अपनी चुत की गुदगुदी बर्दाश्त नहीं हो रही थी.

मैंने मामा को मैसेज किया और पूछा- कहाँ हो आप?
तो मामा ने रिप्लाइ मैसेज किया- क्लास मैं हूँ.
मैंने फिर पूछा- आप अभी घर आ सकते हो?
तो मामा का रिप्लाइ आया- क्यों?
मैंने मैसेज किया- नीचे बहुत गुदगुदी हो रही है.
मामा ने रिप्लाइ किया- वीडियो देख लो और रात का इंतज़ार करो.

फिर मुझे वीडियो की याद आई जो कि मामा ने मॉर्निंग में दिए थे. मैं मोबाइल खोल कर वीडियो देखने लगी.

मैंने देखा कि कैसे एक छोटी लड़की, कैसे अपनी चूत को खुद से पहली बार चुदाई के लिए तैयार करती है. मैंने वीडियो में देखा कि एक कमसिन सी लड़की अपनी चुत में पहले धीरे-धीरे बैंगन डाल रही थी और अचानक से जोर-जोर से बैगन चुत में अन्दर-बाहर करने लगी. मैंने देखा कि आधा बैंगन उसकी चूत में घुस गया और चुत से खून निकलने लगा. फिर बाद में उसने अपनी चूत में खीरा भी डाल लिया. मेरे घर के पीछे बैंगन की बाड़ी लगी थी.. मैं भी उनमें से चुन कर एक लम्बा पतला और सख़्त सा बैंगन तोड़ लाई और चूत में डालने की कोशिश करने लगी. पर बैगन मेरी चुत के अन्दर जा नहीं पा रहा था.

फिर मैं बेडरूम में गई और देखा कि मामा की वैसलीन की डिब्बी वहीं पड़ी थी. मैंने वैसलीन बैंगन पर और अपनी चुत पर लगा ली और फिर से बैंगन डालने की कोशिश करने लगी. इसी के साथ मैं चुदाई का वीडियो भी देखने लगी. वीडियो देखते समय अचानक उत्तेजना से मैंने भी बैंगन को जोर से धक्का लगा दिया, तो लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर बैंगन मेरी चुत में घुस गया. मैं दर्द से कराहने लगी और मेरी चूत से खून भी निकलने लगा. थोड़ी देर तक बैंगन को मैंने चूत के अन्दर ही घुसे रहने दिया और फिर से वीडियो देखने लगी. कुछ ही पलों में मैं बैंगन को धीरे-धीरे अन्दर बाहर करने लगी.

अब मुझे चुत में अच्छा लगने लगा था. मैंने देखा कि लगभग आधे से ज्यादा बैंगन मेरी चूत में अन्दर जाने लगा था. फिर मैंने सोचा कि क्यों ना अब थोड़ा और मोटा बैंगन चूत में डालूँ.
तो मैं थोड़ा मोटा बैंगन ले आई और उसे चुत में डालने की कोशिश करने लगी. बैंगन चुत में घुसाया तो काफ़ी दर्द होने लगा, तो मैंने बैगन छोड़ दिया और सोचा कि अब जो होना है रात में मामा से ही होगा.

मैं अब खुश थी.. शायद आज मामा को खुश कर पाऊंगी.

फिर दोपहर का खाना खाकर मामा के लंड के बारे में सोचते-सोचते सो गई. जब नींद खुली तो शाम के 5 बज चुके थे. मैं जल्दी से फ्रेश होने चली गई.

बाथरूम में मैंने चुत को अच्छे से धोया ताकि रात मैं अच्छे से अपनी चुत चटवा सकूँ.

फिर मैंने जल्दी से डिनर बना लिया और 8 बजे तक फ्री हो कर मामा का इंतज़ार करने लगी.

थोड़ी ही देर में डोरबेल बजी, मैं समझ गई कि ये ज़रूर मामा होंगे. मैंने डोर खोले तो सामने मामा आधी जाँघ तक की पेंट और टी-शर्ट पहने खड़े थे. मैंने भी नीचे छोटा सा शॉर्ट्स और ऊपर ढीला सा टॉप पहन रखा था.

मामा ने अन्दर आने के साथ ही दरवाजा बंद कर दिया और मुझे किस करने लगे. मेरे होंठ मामा के मुँह के अन्दर थे. मामा पीछे से मेरे शॉर्ट्स में हाथ डाल कर मेरी गांड सहलाने लगे.
मैं बोली- अभी नहीं.. खाना खाने के बाद जो करना है, कीजिएगा और आपके लिए एक सरप्राइज़ भी है.
मुझे समझ में आ गई थी कि आज रात मामा मेरी गांड और चूत दोनों फाड़ देंगे.

फिर हम लोगों ने दस बजे तक खाना आदि खत्म किया और बिस्तर पे आ गए. हम दोनों टीवी देखने लगे. मैं आगे लेट गई और मामा मेरे पीछे थे. मामा का लंड मेरी गांड में सटा हुआ था. टीवी देखते देखते अचानक से मामा ने मेरे टॉप में हाथ डाल कर मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे चूचों को दबाने लगे. मैं धीरे-धीरे गर्म होने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी.

मामा ने मुझसे पूछा- क्या सरप्राइज़ है?
तो मैं बोली- आपको अपने आप पता चल जाएगा.

अब मामा का लंड खड़ा हो गया था और मेरी गांड में चुभने लगा था. मैं चाह रही थी कि मामा जल्दी से मेरी चुदाई करें.

मामा ने मेरा टॉप उतार दिया और मैं केवल स्पोर्ट ब्रा में आ गई थी. मामा मेरे ऊपर चढ़ कर ब्रा के ऊपर से ही मेरी चुचियों को दाँत से काटने लगे. फिर मेरी ब्रा को नीचे खींच कर मेरी दोनों चुचियों को ब्रा के ऊपर से बाहर निकाल दिया. मेरे निप्पल एकदम बेर के गुठली जैसे खुरदरे, नुकीले और काले से थे. मामा मेरे निप्पलों को अपने दाँत में दबा कर खींचने लगे, मुझे बहुत गुदगुदी सी हो रही थी.

फिर मामा ने मेरी ब्रा और शॉर्ट्स निकाल दी. अब मैं केवल पेंटी में थी.
मामा मेरे ऊपर चढ़ गए और बारी-बारी से मेरी चुचियों को चूसने लगे. मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी. अब धीरे-धीरे मामा अपना हाथ मेरी पेंटी के अन्दर की ओर बढ़ा रहे थे. मैं मन ही मन में खुश हो रही थी कि अब मामा को सर्प्राइज़ पता चलेगी.

जैसे ही मामा का हाथ मेरी चूत पर गया, मेरी चिकनी चूत पाकर मामा की आँखों में एक चमक सी आ गई और मुझसे पूछे- चुत के बाल कहाँ गए?
यही सरप्राइज था.

अब बाकी चुत चुदवाने की मुराद कैसे पूरी हुई और संग में गांड का क्या हुआ वो सब आपको अगले भाग में चुत खोल कर पूरी चोदन कहानी लिखूंगी.
आप मेल जरूर कीजिएगा.
[email protected]
कहानी जारी है.

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