उसे एक पुरूष की जरूरत थी

2006-01-22

प्रेषक : इन्द्र पाल

हेल्लो दोस्तो,

मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपनी यौन-क्रीड़ा के बारे में आपको बताना चाहिए, जिसे पढ़ते हुए लड़के मुठ मारने लगेंगे और लड़कियों, भाभियों और आन्टियों को लण्ड की प्यास लग जाएगी।

दोस्तो, मैंने कई कहानियाँ पढ़ी हैं। एक औरत की मैंने काफी कहानियाँ पढ़ी है उसना नाम नहीं लूंगा, वो औरत और वो सारी कहानियाँ बनावटी हैं। कोई भी औरत इतनी भी सेक्स की भूखी नहीं होती जितना वो अपने आपको बताती है। अगर है तो देहली के कोठे हैं और वो जगह उसके लिए ठीक हैं।

ये सब छोड़ो ! हम आते हैं अपनी बात पर ! हम कहानी पर आते हैं।

सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मैं २५ साल का हूँ, कद ६’ है और दिखने मैं एक सामान्य सा दिखने वाला लड़का हूँ। मैं मोगा (पंजाब) से हूँ।

नम्रता अपने बिस्तर पर बैचेनी से करवटें ले रही थी। उसे पिछले दो घण्टे से नींद नहीं आ रही थी। इस समय रात के दो बज रहे थे। उसका पति हमेशा की तरह खर्राटे ले रहा था लेकिन उसे नींद न आने की कोई और ही वजह थी। अपने पति के खर्राटों के साथ सोने की तो उसे आदत पड़ चुकी थी। आखिरकार वो इन्हें पिछले 18 सालों से सुन रही थी।

उसे तो थोड़ी देर पहले दूरदर्शन पर देखी एक फिल्म ने बैचेन कर रखा था। यह शुक्रवार रात को दिखाई जाने वाली व्यस्क फिल्म थी। फिल्म की तस्वीरें बार-बार उसके दिमाग में आ रहीं थी। उसकी जिन्दगी भी फिल्म की नायिका से बहुत मिलती थी।

उसे फिल्म में सबकुछ तो नहीं समझ में आया क्योंकि फिल्म अंग्रेजी में थी और उसे अंग्रेजी के कुछ शब्द ही आते थे। फिर भी वो फिल्म का मतलब तो समझ ही गई थी। फिल्म की नायिका का पति भी उसके पति की तरह अपना पुरूषत्व खो चुका था। पहले वो औरत 5 सालों तक बिना सम्भोग के रहती है फिर टूट जाती है और विवाहेत्तर सम्बन्ध बना लेती है।

पिछले दो घंटे से वो अपनी जिन्दगी के बारे में सोच रही थी। उसका पति अशोक 6 साल पहले अपना पुरूषत्व खो चुका था। बिना सम्भोग के रहते हुये उसे अब 6 साल हो गये थे, इन 6 सालों से जैसे-तैसे वो सहन कर रही थी पर आज की रात यह सब असहनीय हो रहा था…

उसे लगा कि क्या वो जिन्दगी में फिर से कभी सम्भोग नही कर पायेगी।

कभी-कभी वो विवाहेत्तर सम्बन्धों के बारे में सोचती थी। पर उसे डर लगता था कि अगर किसी को पता चल गया तो? वो ये सब खतरे मोल नही लेना चाहती थी पर सच यही था कि आज उसे एक पुरूष की जरूरत थी क्योंकि उसका अपना पति नामर्द था।

वो दिखने में बुरी नहीं थी। वास्तव में इस समय बिस्तर पर वो काफी आकर्षक लग रही थी। वो साड़ी में थी। प्रायः बिस्तर पर जाने से पहले वो गाउन बदल लेती थी पर आज उसका मन ही नही किया। उसका एक सुन्दर चेहरा था लेकिन उदासी की वजह से थोड़ा दयनीय लग रहा था। उसकी त्वचा का रंग एक आम सांवली भारतीय औरत जैसा था, बाल लम्बे थे, थोड़ा मोटापा पूरे शरीर पर चढ़ गया था… इससे उसका आकर्षण और भी बढ़ गया था।

उसके स्तन बड़े और अभी भी सुडौल थे, वो बहुत ही सेक्सी थी। उसे मैं जब भी देखता था तो बस ऐसा लगता था कि बस ये मिल जाए …तो जिंदगी सँवर जाए…

एक दिन लंच के बाद मैं नम्रता के घर गया क्योंकि मुझे उनसे कुछ पूछना था।

मैंने दरवाजा खटखटाया लेकिन अन्दर से कोई जवाब नहीं मिला और दरवाजा खुला था तो मैं अन्दर चला गया। उस समय वो नहा रही थी।

मैंने कहा- नम्रता मुझे कुछ पूछना है।

तो उसने कहा- बैठो, मैं अभी आती हूँ।

फ़िर मैं बैठ गया, वो अन्दर आई और कहा- हाँ अब बोलो !

मैंने कहा- मुझे कुछ समझ आ नहीं रहा है क्या आप मेरी मदद करेगी?

वो उस समय तौलिये में ही थी ..बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

फ़िर उन्होंने कहा- चाय पियोगे?

मैंने कहा- ठीक है !

वो कपड़े पहन चाय बना लाई।

हम लोग बात करने लगे, मैंने कहा- आपकी शादी को कितने साल हो गये?

उन्होंने कहा- शादी हुए 8 साल हो गए हैं।

मैंने कहा- नहीं, आप तो इतनी सुंदर है बिल्कुल परी जैसी ! आप तो शादीशुदा लगती ही नहीं।

और वो रोने लगी। मैंने उन्हें बाहों में ले लिया और पीठ सहलाने लगा ….

फ़िर धीरे वो भी गर्म होने लगी, उनको छूते ही मेरा सामान एक्शन में आ गया। बस फ़िर क्या था मैंने उनके गले में किस करना शुरू कर दिया।

इस पर उन्होंने कहा- क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- कुछ मत कहो, बस करने दो, बहुत दिनों से तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ …..

वो शरमा गई …. और अपने चेहरे को दोनों हाथों से छिपा लिया। मैंने मौका देखा और …. और …. उसकी नंगी जांघ पर हाथ रख दिया। उसके पेटीकोट के भीतर मेरा हाथ चूत की तरफ़ सरकने लगा। उसके बदन की झुरझुरी मुझे महसूस होने लगी। मेरा हाथ उसकी झांटो तक पहुंच गया था। उसने झट से अपने हाथ से मेरा हाथ थाम लिया।

“सन्नीऽऽ …. ना …. ना …. कर …. मैं मर जाऊंगी …. ” उसकी वासना भरी आंखे मुझे बुला रही थी …. पर शरम उसका रास्ता रोक रही थी।

“नम्रता …. प्लीज़ …. मत रोको …. तुम्हारा जिस्म आग है …. मुझे जल जाने दो …. ।”

“हाय सन्नी …. नहीं …. यह पाप है …. “

“नहीं …. यह तो मर्द और औरत की जरुरत है …. इसे देखो तो …. यह क्या मांग रहा है …. “

मैंने जान करके अपने पेंट की ज़िप खोल कर अपना बेकरार तन्नाया हुआ लण्ड बाहर निकाल कर उसे दिखाया।

“हाय रे …. ऐसे नहीं करो …. ना …. इसे सम्हालो …. ” उसने हाथ बढ़ा कर उसे प्यार से पकड़ लिया ….

“इसे इसका साथी चाहिये …. नम्रता …. प्लीज़ …. मिला दो ना …. “

“सन्नीऽऽऽऽ हाय …. मत करो न …. ” उसने मुझे अपने हाथों खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया ….

“होंठों पर ना है …. पर दिल में हां है …. आपका जिस्म आग हो रहा है …. कपड़े जल जायेंगे …. हटा दो इनको …. “

मैंने फिर से उठ कर उसका पेटीकोट नीचे खींच लिया। उसकी गदराई जवानी निखर आई। उसकी चूत के आसपास की झांटे उसकी चूत को सजा रही थी …. चूत की दोनों पन्खुड़ियाँ फ़ड़फ़ड़ा रही थी। पानी से पूरी गीली थी। मैंने भी अपनी पैन्ट और अन्डरवीयर उतार दी। अब मैंने उसके ब्लाऊज को उतारा। उसके दोनों बोबे छलक उठे …. एकदम गोरे और भारी से …. भूरे रंग के कड़े चूचक ….

मैंने बिना किसी संकोच के उसके दोनों बोबे अपने हाथो में भर लिये।

“सन्नी …. हाय रे …. कितने साल हो गये इसे मसले हुए …. ” वो तड़प उठी।

उसने मेरा लण्ड खींच के अपने मुख में भर लिया। मैं उत्तेजित हो उठा और नम्रता के मुख को ही धक्के मार मार कर चोदने लगा। मेरा सुपाड़ा वो कस कस कर चूस रही थी। सुपाड़ा भी और फूल कर चिकना हो कर चमक उठा था।

इतने में नम्रता ने मेरा लण्ड छोड़ा और मुझे कहा,” सन्नी …. देख आज मेरी पिछाड़ी कितना तड़प रही है …. मेरी पिछाड़ी चोद दे …. “

मैंने तुरन्त पीछे हट कर उसे घोड़ी बना दिया। उसके चिकने चूतड़ उभर कर मेरे सामने चमक उठे। दोनों गोलाईयाँ गोरी गोरी सी मुझे बुलाने लगी। मैंने उसकी फ़ांके चीर दी। उसके गांड का फूल खिल उठा। अन्दर बाहर कि सिकुड़न करता हुआ गान्ड का छेद बड़ा प्यारा लग रहा था।

मैंने ढेर सारा थूक उसके छेद पर लगा दिया और अपनी दो अंगुली डाल कर उसमें घुमाने लगा। वह चिहुंक उठी। उसकी गान्ड में छेद लण्ड जाने को तैयार था। मैंने अपना सुपाड़ा छेद पर रख कर दबाया तो वह फ़क से अंदर उतर आया और छेद में फ़ंस गया। नम्रता ने मुझे धन्यवाद की नजरों से देखा।

“प्यारे सन्नी ….! मुझे बहुत अच्छा लग रहा है …. अपना प्यारा सा लण्ड पूरा उतार दे …. चोद दे मेरी गाण्ड को …. “

मैंने जोर लगाया और लण्ड गाण्ड की दिवारों पर रगड़ खाता हुआ अन्दर जाने लगा। मुझे मीठा मीठा सा तेज वासनायुक्त मजा आने लगा। उसकी गाण्ड चिकनी और गीली थी मेरा लण्ड जिस आसानी से आ जा रहा था, लगता था कि गाण्ड चुदाने की अभ्यस्त है। उसे गाण्ड चुदवाने में मजा आ रहा था …. वो सिसकरियाँ भर रही थी ….

मैंने बीच बीच में लण्ड गाण्ड से बाहर निकाला तो उसका छेद वैसा ही खुला रहा …. मै दुबारा पूरे जोश से अन्दर फिर पेल देता था। नम्रता मुझे बार बार मुड़ कर प्यार से देखती थी। अब उसने कहा,”सन्नी …. अब बस …. अपना लण्ड निकाल लो और …. …. ” उसने पूरा कहा भी नहीं था कि मेरा लण्ड उसकी चूत में पीछे से घुस चुका था।

“हाय …. रे …. …. सन्नीऽऽऽऽ घुस गया रे …. ” वो आनंद से सीत्कार भरने लगी …. यानी अब उसकी खुजली मिटी …. उसकी भारी और मोटी गाण्ड पर थपकियाँ मार मार कर चोदने लगा। उसकी चूत चिकना पानी छोड़ रही थी …. मेरा लण्ड सटासट चल रहा था। कभी कभी फ़च फ़च की आवाजें भी आ जाती थी ….

नम्रता की चूत की प्यास बुझने के बजाय बढ़ रही थी। मैं उसे चोदते चोदते अपनी चरमसीमा पर आ चुका था। मेरा लण्ड बार बार रस छोड़ने को बेताब हो रहा था।

“नम्रता …. मुझे सम्भाल …. मेरा निकला …. जल्दी …. करो …. “

नम्रता तुरन्त उठी और मेरा लण्ड पकड़ लिया और उसे बिस्तर से नीचे की तरफ़ कर दिया और लण्ड को तेज दबा कर मुठ मारने लगी। मैंने उसके गले में हाथ डाल दिया और अपनी तरफ़ उसे खींचने लगा। पर लण्ड आखिर छूट ही पड़ा ….

मेरा वीर्य एक तेज पिचकारी के रूप में हवा में लहरा उठा और फ़र्श गीला करने लगा। वो दांत भींच कर मुठ मारे जा रही थी। अब पिचकारी का जोर कम हो गया था। अब वो बूंदो को निचोड़ रही थी और झटके दे दे कर और जोर से हिला हिला कर उन्हें भी नीचे गिरा रही थी।

मुझे पता था कि नम्रता अभी नहीं झड़ी है …. मैंने तुरन्त ही नम्रता को फिर से दबा लिया और उसकी चूत में तीनों अंगुली डाल दी …. तीनों अंगुलियों से उसकी चूत चोदने लगा। वो आह भरती हुई तड़पने लगी और अपने शरीर को ऊपर नीचे हिलाने लगी …. मैंने उसे और दबा लिया। अचानक उसने अपनी चूत ऊपर उभार ली और …. और ….

“हाय सन्नीऽऽऽ मर गई …. आहऽऽऽ निकला रेऽऽऽऽऽ …. …. ” अब वो चरमसीमा पर पहुँच चुकी थी …. उसकी सारी उत्तेजना चूत के रास्ते झड़ने लगी थी …. रह रह कर वो जोर लगा कर जैसे कुछ निकाल रही हो …. धीरे धीरे वो उसका झड़ना पूरा हो गया और अब वो तेज सांसे ले रही थी।

“नम्रता …. थेंक्स …. तुमने आज बहुत सुख दिया है …. ” मैंने उसे प्यार से किस कर लिया।

उसने धीरे से मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींच लिया और अपने बदन से चिपका लिया।

“तुम्हें समय मिले तो आ जाया करो …. देखो मैंने कितने महीनों बाद चुदाया है …. “

“आपका ये होट इन्विटेशन मुझे स्वीकार है …. डार्लिन्ग नम्रता …. “

अब वो भी खड़ी हो गई।

चलो ना किचन में …. कॉफ़ी बनाते है …. फिर एक दौर और करेंगे …. मैं खुश हो गया और उसके मोटे मोटे चूतड़ पकड़ लिये ….

“ऊईऽऽऽऽ मांऽऽऽ …. ” वो उछल पड़ी …. और किचन की तरफ़ लहरा कर चल दी ..

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