चुदाई यात्रा-1

(Chudai Yatra-1)

2010-08-03

प्यासी दुल्हन का अगला भाग चुदाई यात्रा पाठकों के लिए

हम लोग कार से लखनऊ के लिए रात में चल दिए। अगले दिन मेरी परीक्षा थी। मैंने सलवार कुरता और भाभी ने साड़ी ब्लाउज पहना था।

अमित बोला- तुम दोनों मुझे गाड़ी नहीं चलाने दोगी इसलिए चुपचाप पीछे बैठो।

अमित नेकर और टी शर्ट में था। हम दोनों मुँह बनाते हुए पीछे बैठ गए। भाभी ने बताया कि उन्होंने अपना फ्लैट सेट करवा दिया है और हम लोग रात को बारह बजे लखनऊ पहुँच जाएँगे।

भाभी रास्ते में अमित से बोली- अमित, तुम एक बार बता रहे थे कि तुम्हारे एक दोस्त का लंड 10 इंच लम्बा और ४ इंच मोटा है?

अमित बोला- सच बोल रहा था। उसका घर रास्ते में पड़ता है, अगर विश्वास नहीं होता तो दर्शन करा देता हूँ।

भाभी बोलीं- अगर छोटा निकला तो?

अमित बोला- पाँच हज़ार की शर्त रख लो।

दोनों मैं शर्त लग गई मेरी चूत उनकी बातें सुनकर मचलने लगी थी, मैंने भी आज तक 10 इंच लम्बा लंड नहीं देखा था। अमित ने अपने दोस्त को फ़ोन कर दिया। थोड़ी देर बाद रास्ते में वो मिल गया। गाडी मैं बैठकर हम उसके इंटों के भट्टे पर पहुँच गए।

भट्टे में एक कमरा बड़ी अच्छी तरह सजा हुआ था। अमित के दोस्त का नाम बबलू था। हम लोग अंदर बैठ गए।

थोड़ी देर बाद अमित बोला- बबलू, रजनी भाभी को अपना लंड दिखा दे। मेरी शर्त लगी है कि अगर 10 इंच से कम निकला तो 5000 रुपए भाभी को दूँगा।

बबलू बोला- मैंने आज तक कभी मुठ नहीं मारी ! जब से मेरा खड़ा होना शुरू हुआ है तब से सिर्फ चूत में ही डाला है। पहले दो साल तक तो अपनी चाची की चोदता था, उसके बाद तो गाँव की लड़कियों, रंडियों, भाभियों और भट्टे पर काम करने वाली औरतों की चोदता आ रहा हूँ। एक बार खड़ा हो जाता है तो फिर बिना चूत में डाले लंड को नहीं बैठाता। अब यह बता दो कि तुम दोनों डलवाओगी या किसी एक को चोदूँगा। गांड मैं मारता नहीं, और आधे घंटे से कम चोदता नहीं हूँ।

अमित बोला- भाभी डलवा लो, मज़ा आएगा।

रजनी बोली- मैं तो डलवा लूँगी लेकिन अर्चना को भी घुसवाना पड़ेगा। कुतुबमीनार देखने का मन तो इसका भी कर रहा है।

मैं झेंप गई, मैं बोल गई- नहीं नहीं मुझे तो बस देखना है मैं नहीं घुसवाऊँगी। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

बबलू इतना सुनकर मेरे पीछे आ गया और मेरी कुरती में हाथ डालकर मेरे दोनों संतरे मसलते हुए बोला- दिखा देंगे, तुझे भी दिखा देंगे, तेरा माल तो देख लें पहले !

और उसने कुरता ऊपर उठा कर मेरे संतरे मसलने शुरू कर दिए। सामने भाभी मुस्कराते हुए मेरी चूचियों की मसलाई देख रही थीं।

बबलू ने हाथ हटा कर मेरी पजामी का नाड़ा खोला और पीछे से कुरते की चैन खोल दी। पज़ामी नीचे सरक गई, बबलू बहुत ताकतवर था, मेरी कुरती भी उसने उतार दी और मुझे गोद में उठाकर अमित की गोदी में बैठा दिया। मेरे बदन पर अब सिर्फ पेंटी थी। मेरे नंगे संतरे कमरे की शोभा बढ़ा रहे थे।

अमित मेरी पेंटी में हाथ डालते हुए बोला- मज़े कर लो भाभी ! ऐसा मज़ा दुबारा नहीं मिलेगा।

बबलू भाभी की तरफ बढ़ा और बोला- अब तेरी चूचियों को देखता हूँ ! बहुत बड़ी बड़ी लग रही हैं।

ब्लाउज उसने आगे से खींच कर फाड़ दिया, भाभी के मोटे मोटे गोल गोल स्तन आजाद हो गए।

बबलू चिहुंका- वाह, क्या सुंदर पहाड़ हैं रानी !

बबलू ने उन्हें मुँह में ले लिया और चूसने लगा और बाद में पीछे जाकर बबलू भाभी के स्तनों को भोपूं की तरह बजाने लगा।अब मुस्कराने की बारी मेरी थी। उसने इस बीच भाभी का पेटीकोट और साड़ी भी उतार दी। भाभी पूरी नंगी हो चुकी थीं, उनकी चूत के दाने को बबलू रगड़ रहा था। भाभी को नंगी देखकर मेरी शर्म कम हो गई थी।

भाभी अमित से बोलीं- अर्चना की पेंटी उतार दो न ! मुझे नंगी देखकर यह रंडी खुश हो रही है।

अमित ने मेरी पेंटी उतार दी। उसके बाद बबलू ने गोदी में उठाकर भाभी को मेरी बगल में बैठा दिया और बारी बारी से मेरी और भाभी की पप्पी लेता हुआ बोला- बदतमीज़ी के लिए माफ़ करना ! नंगी बहुत सुंदर लग रही हो।

इसके बाद अमित और बबलू ने अपने कपड़े उतार दिए। मेरी और भाभी की नज़र बबलू की चड्डी पर थी, उसका लंड चड्डी में से मोटा और बड़ा होने का अहसास करा रहा था।

अमित और बबलू ने अपनी अपनी चड्डियाँ उतार दी। दोनों के तने लंड बाहर निकल आए।

बाप रे बाप ! बबलू का क्या मोटा और लम्बा लंड था बबलू के सामने अमित का 8 इंची लंड छोटा और पतला लग रहा था।

बबलू ने भाभी को उठाकर अपनी जांघों पर बैठा लिया और लंड हाथ में देता हुआ बोला- रानी देख लो ! थोड़ी देर में यह तुम्हारी सुरंग में दौड़ेगा।

भाभी बोली- अर्चना, वाह ! क्या लम्बा है ! बाप रे बाप ! यह तो आज चूत फाड़ कर चूत की भोंसड़ी बना देगा ! जरा स्केल तो निकाल अपने बैग से, आज तो लग रहा है कि शर्त हार गई।

मैंने अपने बैग से 12 इंची स्केल निकाल लिया। भाभी ने लंड नापा तो १० से थोड़ा कम था।

भाभी बोलीं- यह तो दस से कम है।

बबलू बोला- कुतिया, अभी तो यह खड़ा हो रहा है, मुँह में डालूँगा तब और लम्बा होगा लेकिन सोच लेना जो पहले मुँह में लेगी उसकी चूत में बाद में घुसेगा।

भाभी बोलीं- अर्चना, तुम चूस लो, इसका अगर तुम्हारी चूत में इसने पहले डाल दिया तो कल पेपर नहीं दे पाओगी, मैं तो पुरानी रांड हूँ, चुदवा कर कल आराम से सोऊँगी।

बबलू खाट पर बैठ गया, उसने मुझे खींच कर जमीन पर अपनी टांगों के बीच बैठा लिया और अपना लौड़ा मेरे हाथों में पकड़ा दिया। मैंने उसका लंड हाथ में पकड़ा तो ऐसा लगा जैसे कोई लोहे की बड़ी रॉड पकड़ ली हो।

बबलू ने बाल सहलाते हुए मेरे मुँह पर लंड रख दिया और बोला- अब जल्दी से चूस ले। तू मुझे बहुत प्यारी लग रही है, तेरी चूत में भी घुसेगा और प्यार से तेरी चोदूँगा। प्यार से पूरा अंदर तक डाल कर चूसियो ! अच्छी तरह नहीं चूसा तो तेरी भाभी से ज्यादा फाड़ दूँगा।

मैंने बबलू का लंड चूसना शुरू कर दिया पूरा मुँह फाड़ के चूसना पड़ रहा था बबलू भी पूरी हलक तक घुसा देता था । दस-बारह बार चूसने के बाद उसने लंड बाहर निकाल लिया और भाभी से बोला- ले रांड, अब नाप ! फिर तुझे बताता हूँ चुदाई क्या होती है।

भाभी भी आश्चर्य से बबलू का लंड देख रहीं थी, अबकी उन्होंने नापा तो लंड दस इंच से थोडा बड़ा ही था।

भाभी हार गईं थी, अमित उन्हें देखकर मुस्करा रहा था।

बबलू ने भाभी के गले में हाथ डाल कर उनकी गेंदें हिलाईं और बोला- रजनी डार्लिंग ! आराम से खोलकर मरवाओगी या मैं अपने अंदर के राक्षस को जगाकर तुम्हारी मारूँ?

भाभी लौड़ा सहलाते हुए बोलीं- प्यार से मरवाने में ही भलाई है कुत्ते ! लेकिन थोड़ा प्यार से मारना, इस जैसा लम्बा-मोटा लंड तो देखने को भी नहीं मिलता है।

“हैं? ऐसी बात है? तो चुपचाप नीचे गद्दे पर लेट जा !”

भाभी बबलू के इशारे पर उठकर नीचे पड़े गद्दे पर लेट गईं। बबलू ने मेरी तरफ देखा और बोला- तू अमित से अपनी फुद्दी थोड़ी चौड़ी करवा ले ! जब तेरी फुद्दी में घुसेगा तो दर्द कम होगा। नई नवेली दुल्हन का माल तो बड़ा नमकीन होता है। तेरी चूत चोदने मैं तो मज़ा आ जाएगा।

मुझे उठाकर उसने अमित की जाँघों पर बैठा दिया और मेरी दोनों चूचियाँ कस कर दबा दीं। इसके बाद उसने नीचे झुककर भाभी की टांगें उठाईं और उनकी चूत में अपना दस इंची लंड घुसा दिया।

भाभी चीख उठीं- ऊ ऊई मर गई ! मर गई !

लेकिन अब वो बबलू के लंड की गुलाम थीं !

बबलू ने भाभी को चोदना शुरू कर दिया, उनकी अच्छी चुदाई हो रही थी, भाभी की आँखों से पानी आ रहा था, बबलू बीच बीच में तेज़ धक्कों से उन्हें चोद देता था।

ऊह्ह ऊई आः आहा आह मर गई मर गई जैसी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

अमित ने भी मुझे अपने खड़े हुए लंड पर बैठा लिया अमित का लंड मेरी चूत में अंदर तक घुसा हुआ था। मैं भी धीरे धीरे चुदते हुए भाभी की चूत फाड़ चुदाई का मज़ा लेने लगी।

15 मिनट तक भाभी की लगातार चुदाई बबलू ने करी इसके बाद बबलू ने लंड निकाल लिया और भाभी को बाँहों में भरकर अपने से चिपका लिया।

भाभी बोलीं- चूत में दर्द तो हो रहा है लेकिन बबलू, मज़ा आ गया ! तीन बार मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।

बबलू सीधा लेट गया और भाभी को अपना लौड़ा पकड़ा दिया जो पूरा दस इंची हवा में खड़ा हुआ था। अमित भी मेरी चोद चुका था, अमित ने वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया था। अमित बोला- मैं बाहर होकर आता हूँ !

अमित बाहर निकल गया, मैं खाट पर बैठी चोर नज़रों से बबलू का लंड देख रही थी।

बबलू बोला- शर्म छोड़ दे ! मज़े से खेल ! ऐसे चोरी चोरी से क्या देख रही है?

उसने मुझे अपने पास खींच लिया और लंड मेरे हाथ में पकड़ा दिया। बबलू अब दो नंगी औरतों को अपने से चिपका कर उनका शवाब पी रहा था।

मैं धीरे धीरे उसका लंड सहलाने लगी, भाभी बोलीं- अर्चना, एक बार इस सांड का लंड अंदर घुसवा ले, बड़ा मज़ा आएगा। साला क्या चोदता है।

बबलू मेरे चूतड़ दबाते हुए बोला- अर्चना जी, डाल दूँ? तुम्हारी जवानी तो मुझे पागल कर रही है।

उसने मेरी चूत में अपनी दो उंगलिया डाल दीं थीं, चूत अमित से चुदी हुई थी, पूरी वीर्य से नहा रही थी, उँगलियाँ आराम से घुस गईं।

चूत मसलते हुए बबलू बोला- गाड़ी तो तुम्हारी पूरी तैयार है, बस इंजन लगाने की देर है। चलो घोड़ी बन जाओ पीछे से धीरे धीरे प्यार से अपनी बीवी की तरह चोदूँगा और चुदते हुए नखरे करे तो रंडी की तरह बजा कर चूत की भोंसड़ी बना दूँगा। चुदने के बाद अगर मज़ा नहीं आए तो जो चाहे सजा दे लेना।भाभी उठीं और बोलीं- चल अब घोड़ी बन जा ! इतने प्यार से कह रहा है तो पूरे मज़े भी देगा।

मैं जमीन पर कोहनी के बल घोड़ी बन गई, बबलू ने अपना लंड पीछे से आकर मेरी चूत पर कई बार फिराया। मेरी सांसें तेज़ हो गईं, मैं लंड अंदर घुसने का इंतजार करने लगी। बड़े प्यार से चूत पर सुपाड़े को अपने हाथ से दबाते हुए बबलू ने अपना लंड मेरी चूत में प्रवेश कराया और मेरी चूचियों और चुचूकों को मसला।

बबलू अपने लंड को मेरी चूत में चलाना शुरू कर दिया, मेरी चुदाई शुरू हो गई थी। बबलू धीरे धीरे प्यार से चोद रहा था, लंड उसने पूरा नहीं घुसा रखा था लेकिन उसकी मोटाई ने मेरी चूत पूरी फाड़ के रख दी थी, मैं एक बकरी की तरह ऊह आह आह आह कर रही थी लेकिन इंजन अच्छा हो तो सफ़र भी मस्त होता है।

थोड़ी देर में मेरी चुदाई मुझे बड़ा आनन्द देने लगी, अब मैं चुदते हुए आह ऊह आहा आहा आहा और चोद ! और चोद ! चिल्लाने लगी।

बबलू ने मेरी गेंदें पकड़ी और उन्हें मसलते हुए अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी। लंड अब पूरा अंदर घुस कर मेरी गर्भाशय की दीवारों से टकरा रहा था और आगे पीछे हो रहा था।

5 मिनट में बबलू ने मेरी फाड़ कर रख दी थी, मैंने 2 बार पानी छोड़ दिया था। इसके बाद वो हट गया। मेरी चूत फट गई थी और दर्द कर रही थी, मैं सीधी टांगें फ़ैला कर लेट गई। भाभी अपनी चूत चौड़ी करके जमीन पर पड़ी हुई थीं, बबलू ने कुछ धक्के उनकी चूत में मारे और उसके बाद दोबारा मेरी चूत में लंड पेल दिया, बोला- अपना वीर्य तो तुम्हारी चूत में ही डालूँगा।

मेरी चूत में 2-3 धक्कों बाद बबलू का पूरा वीर्य मेरी चूत में भर गया। मेरे पूरे गर्भ में वीर्य की बाढ़ आ गई। अगर मैंने गोली नहीं खाई होती तो पक्का गर्भ से हो गई होती।

इसके बाद हम दोनों उससे चिपक गए और 15 मिनट तक चिपके रहे। लंड बबलू का बड़ा और मोटा था लेकिन उसने मुझे आनन्द बहुत दिया। उसने मुझे वास्तव मैं प्यार से चोदा था।

कहानी जारी रहेगी।

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