गई थी चुदाई की कहानी सुनने, लंड लेकर आ गई

(Gai Thi Chudai Ki Kahani Sunne, Lund Lekar Aa Gai)

आदरणीय अन्तर्वासना पाठको, मैं सपना – मैंने अपनी पहली कहानी

में बताया था कि कैसे हमने देहरादून मसूरी में पति के दोस्तों और उसकी करके मज़े लिए।
मुझे बहुत पाठकों-पाठिकाओं के मेल आये। यकीन मानिये 95 % मेल सिर्फ मनचलों के थे। खैर लिखने को बहुत कुछ है लेकिन मैं मतलब की बात लिख रही हूँ।

मुझे चंडीगढ़ से एक पाठिका का मेल आया जिसमें उसने कहानी की बहुत तारीफ की थी।
मैंने उसको धन्यवाद की ईमेल भेज दी उसका फिर वापिस मेल आया और इस तरह हमारी ईमेल का आदान प्रदान शुरू हो गया।

धीरे-धीरे हमारी आपसी बातें बढ़ती गई और वो हल्की-फुलकी में बदल गई। फिर उसने मुझे बताया कि उसकी भी एक जीवन की एक सच्ची सेक्स घटना है जिसने उसकी जिन्दगी में चार चाँद लगा दिए पर वो उस चुदाई की कहानी को खुद प्रकाशित नहीं करवाना चाहती। उसने मुझे अनुरोध किया कि मेरी भाषा और शैली बहुत अच्छी है इसलिए मैं उसकी चुदाई की कहानी प्रकाशित करूं।
मुझे अपनी तारीफ़ तो अच्छी लगी ही, साथ में उत्सुकता भी हुई कि वो घटना क्या हो सकती है। मैंने उस पाठिका को कहानी भेजने को कहा तो उसने बोला कि वो खुद मिल कर ही कहानी बताएगी।

मैंने उसे बता दिया था कि मैं यमुनानगर से चंडीगढ़ शिफ्ट हो गई हूँ। कई दिन तक तो मैं टालती रही लेकिन उसका कई बार अनुरोध आया तो मैंने अपने पति से बात की तो उन्होंने बोला कि मिलने में कोई हर्ज़ नहीं।
मिलने का समय और स्थान तय हुआ।
मिलने से पहले हमने मेल पर फ़ोन नंबर भी लिए और तय हुआ कि जब तक हम मिलते नहीं, सिर्फ व्हाट्स एप्प पर ही सन्देश भेजेंगे।

जैसे ही मैंने उसका नंबर अपने मोबाइल में सेव किया तो ट्रू कालर में गुरमीत सिंह (नाम बदला हुआ है) आया।
पहले तो मैं डर गई फिर मैंने सोचा कि हो सकता है उसके पति के नाम पे मोबाइल नंबर लिया गया हो। फिर मैंने सोचा कि जो होगा देखा जायेगा।

मैं अच्छी तरह तैयार हो कर 40 सेक्टर के पार्क में पहुँच गई जहाँ मिलने का तय हुआ था। पार्क में पहुँच कर मैंने व्हाट्स एप्प पर सन्देश दिया और बताया कि मैंने किस रंग की साड़ी पहनी हुई है और मैं कहाँ हूँ।
थोड़ी देर मे मेरे पास एक बहुत ही खूबसूरत और लम्बा चौड़ा व्यक्ति आया और मुझे नमस्ते कर के पूछा कि क्या मेरा नाम सपना है तो मैंने हाँ कहा।
तो उसने बताया कि उसका नाम गुरमीत सिंह है और वो पंजाब पुलिस में काफी सीनियर लेवल पर है।

मुझे गुस्सा भी आया और मैं डर भी गई। उसने मुझे भांप लिया और बोला कि डरने की ज़रूरत नहीं और वो ही इतने दिनों से मेरे साथ चैटिंग कर रहा था।
वह भी अन्तर्वासना पढ़ने का शौकीन है। उसने अपनी पहचान इसलिए छुपाई कि इससे पहले भी उसने कई लोगों से संपर्क किया तो लोग उसके बारे में जान कर डर जाते थे और संपर्क तोड़ देते थे।

अब मेरा गुस्सा और डर कम होने लगा था और मैं सामान्य होने लगी। मैंने उन्हें अपनी कहानी देने को कहा तो उसने बताया कि उसके पास कोई लिखित कहानी नहीं थी। वो मुझे अपनी कहानी सुना देंगे और मुझसे अनुरोध किया कि मैं खुद उस कहानी को शब्दों में पिरो कर प्रकाशित करवा दूं।

लेकिन कहानी सुनाने के लिए किसी सही जगह पर शांति से एक-आध घंटा बैठना होगा और हम पार्क में इतनी देर नहीं बैठ सकते। उन्होंने मुझसे अनुरोध किया कि मैं उनके साथ चलूँ और कहीं पर कॉफ़ी वगैरह पीते हैं और बातें करते हैं।
मैं डर तो रही थी पर इतने खूबसूरत बन्दे को देख कर मेरे मुंह में पानी आ रहा था और मैं उसका साथ नहीं छोड़ना चाहती थी।

हम पार्क से बाहर आये और मैं उसकी स्विफ्ट डिजायर गाड़ी में बैठ गई। वो मुझे मोहाली में एक होटल में ले गया, रिसेप्शन पर कोई बात की, रिसेप्शनिस्ट उन्हें जानता था।
उसने एक कमरा हमारे खुलवा दिया।
मैंने भी मन बना लिया था कि जो होगा देखा जायेगा।

कमरे में पहुँच कर उन्होंने मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक और अपने लिए बियर और नमकीन आदि का आर्डर दे दिया।
5 मिनट में ही वेटर सारी चीज़े दे गया।

मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक डाली और अपने लिए बियर… मुझसे पूछा कि मेरी कोल्ड ड्रिंक में बियर मिला दें तो मैंने कोई ऐतराज़ नहीं किया।
तब उन्होंने 3 बियर और मंगा ली।

फिर कहानी सुनने-सुनाने का दौर शुरू हुआ। चुदाई की कहानी ख़त्म होते-होते लगभग एक घंटा लग गया लेकिन इस दौरान लगभग एक बियर मेरे अंदर भी जा चुकी होगी और अब मुझे हल्का हल्का नशा होने लग गया।

अब मेरा मन बेईमान होने लगा लेकिन शर्म के परदे का दस्तूर भी था। मुझे बियर और कोल्ड ड्रिंक की वजह से पेशाब का बहुत प्रेशर पड़ रहा था, मैं उठ कर बाथरूम की और भागी और जल्दबाज़ी में दरवाज़ा भी लॉक नहीं किया और फटाफट साड़ी उठा कर ज़मीन पर बैठ कर ही पेशाब करने कगी और पेशाब करने की श-श की जोर-जोर से आवाज़ आने लगी। उधर से उनको भी बहुत जोर का प्रेशर पड़ा और वो भी भागते भागते बाथरूम में आये पेशाब करने लग पड़े।

मैं घबराकर एकदम खड़ी हो गई और मुझे ध्यान नहीं रहा कि मेरी साड़ी मेरे हाथ में है और मैंने नीचे नहीं गिराई है।

इतने में वो घूम गए और मेरी तरफ देखा तो मैं आधी नंगी उनके सामने खड़ी थी। जैसे ही मैंने महसूस किया कि वो मेरी टांगों को देख रहे हैं तो मेरा ध्यान अपनी हालत पर गया और मैंने साड़ी छोड़ दी और नज़रें झुका कर बाहर आ गई लेकिन अब तक मेरी नजर भी उनके लंड पर पड़ चुकी थी और पहले से थोड़ा सा बेईमान दिल ओर बेईमान हो गया और कोई गुस्ताखी करने की सोचने लगा।
जैसे ही वो बाहर आ कर बेड पर बैठे तो मैंने अपना मोबाइल नीचे गिरा दिया। नीचे गिरते ही मोबाइल खुल कर बिखर गया और मैंने घबराहट में मोबाइल उठाने के बहाने अपने पल्लू की परवाह नहीं की ताकि उन्हें मेरी भरी-पूरी छातियों के दर्शन हो जाएँ।
मैंने देख लिया था कि जब वो बाथरूम से बाहर आये तो उनकी पैंट में उभार बन गया था।

जैसे ही मैं मोबाइल उठा कर ऊपर उठी तो उन्होंने उठ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा दिए। मैंने थोड़ा सा छुड़ाने का नाटक किया लेकिन फिर साथ देने लग पड़ी।
होंठ चूसते-चूसते मेरा ब्लाउज और ब्रा कब उतर गए मुझे पता ही नहीं लगा। मुझे तब पता लगा जब उन्होंने मुझे बेड पर गिरा कर मेरे एक निप्पल को काट दिया।

थोड़ी देर मेरे मम्मों की ज़बरदस्त रगड़ाई और चुसाई करने के बाद उन्होंने मेरा सब कुछ उतार कर पूरी नंगी कर दिया और खुद भी नंगे हो गए।

वो मेरी चूत चूसना चाहते थे लेकिन उससे पहले उठ कर मैंने लौड़े को मुंह में ले कर चूसना शुरू कर दिया। एक तो मुझे लौड़ा चूसना बहुत अच्छा लगता है और अगर मुझे घंटा-दो घन्टा भी 2-4 लौड़े चूसने पड़े तो मैं चूस लूंगी।
दूसरे अगर औरत ने पूरे चुदवाई के मज़े लेने हो तो एक बार कैसे भी लंड छुटवा देना चाहिए क्योंकि उसके बाद जब वो खड़ा होता है तो बहुत देर तक चुदाई का मज़ा देता है।
60 से 70 प्रतिशत औरतों को यह कला नहीं आती और वो आदमी को तो जल्दी-जल्दी अपने अंदर छुड़वा देती हैं लेकिन खुद अतृप्त रह कर तड़पती रह जाती हैं।

लौड़ा चूसते-चूसते मैंने देखा कि वो कांपने लगे और उनकी आँखें बंद हो गई तो मैं समझ गई कि वो छूटने वाले हैं, मैंने मुंह से लौड़ा निकाल दिया क्योंकि मुझे मुंह में छुटवाना अच्छा नहीं लगता है।
जैसे ही लौड़ा आज़ाद हुआ तो वो ज़ोरदार पिचकारियों के साथ छूट गया, मैंने सारा वीर्य अपनी छाती पर गिरवा लिया।

वो जैसे बिल्कुल ढीले हो कर बेड पर बैठ गए पर मैं उन्हें चैन से बैठने नहीं देना चाहती थी क्योंकि अभी मेरी चूत में आग लगी हुई थी।
मैं उनके सामने बेड पर बैठ गई और उनका हाथ पकड़ कर अपने मम्मों पर रगड़ने लगी ताकि मेरी छाती पर फैले वीर्य से मम्मों की मालिश हो जाए।
अगर कोई लड़की यह कहानी पढ़ रही है तो यह राज़ की बात बता रही हूँ कि ऐसा कर के देखें, एक तो मज़ा बहुत आएगा दूसरा मम्मे पूरी तरह बढ़े हुए और कसे-कसे रहते हैं।

2-3 मिनट में ही उनके लौड़े में तनाव आना शुरू हो गया और वो झटके खाता हुआ खड़ा हो गया। मैंने उसे हाथ में लिया तो महसूस हुआ कि वो खड़ा तो हो गया था लेकिन अभी पूरा ठोस नहीं हुआ था और मेरे मतलब का नहीं था।
अब मेरे ऊपर था कि उसे अपने मतलब का बनाऊं।

मैं पीठ के बल लेट गई और उन्हें अपने पेट पर आने को कहा। फिर मैंने अपने मम्मों को एक हाथ से जोड़ा और दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर मम्मों के बीच में लगा दिया। उन्होंने मम्मों की चुदाई शुरू कर दी।
मम्मों पर फैले वीर्य ने अपना कमाल दिखाया और चिकनाई का काम किया जिसका नतीजा ये हुआ कि 10-15 रगड़ के बाद ही लंड न सिर्फ सख्त हो गया अपितु एक लोहे की गर्म रॉड की तरह हो गया।

अब मैंने उन्हें अपने ऊपर से उठाया और इशारे से अपनी नंगी चूत चूसने को कहा।
2-3 मिनट की चुसाई के बाद ही चूत की हालत ऐसी हो गई कि अगर अब लंड न मिला तो बच्चेदानी जैसे चूत फाड़ कर बाहर आ जाएगी और खुद ही लंड को पकड़ लेगी।

तब मैंने उन्हें इशारा किया और उन्होंने लंड चूत में डाल कर अपना काम शुरू कर दिया और काफी देर तक मैंने जम कर अपनी तसल्ली करवाई और उनको अपने अंदर ही छूट जाने दिया।
अब तो उनकी हालत बुरी हो चुकी थी जैसे किसी ने शरीर से सारी ताकत चूस ली हो।

मैंने थोड़ी देर बाद बाथरूम में जा कर हल्का स्नान लिया और कपड़े पहन कर वापिस आने के लिए तैयार हो गई लेकिन वो अभी थके-थके नंगे ही लेटे थे।
मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने बोला कि मैं खुद ही ऑटोरिक्शा पकड़ कर चली जाऊं, वो अभी और आराम करना चाहते थे।

इस पूरी एक घंटे की चुदाई में अब पहला शब्द उनके मुंह से निकला। पूरी चुदाई में उंह, आह आदि आवाजें ही आई पर हम में से बोला कोई कुछ नहीं।

मैं मुस्कुरा कर जैसे ही बाहर जाने के लिए मुड़ी तो उन्होंने मुझे आवाज़ दी, मैं उनके पास गई तो उन्होंने उठ कर मुझे आलिंगन में ले लिया और 10-15 चुम्बन मेरे गालों और माथे पर जड़ दिए।
उनकी इस हरकत से मेरे अंदर जो ख़ुशी की लहर दौड़ गई वो मैं यहाँ पर शब्दों में नहीं बयाँ कर सकती।

उन्होंने अपनी कमीज़ उठाई और जेब में से कुछ नोट निकाल कर मेरी ब्रा में ठूंस दिए।
मैंने बहुत मना किया और रूपये निकाल कर बेड पर फैंक दिए लेकिन उन्होंने ज़बरदस्ती रूपये मेरे पर्स में डाल दिए और मैं एक पप्पी उनके माथे पर लेकर चली आई।

घर आकर देखा तो वो 5 हजार रूपये थे।

दोस्तो, इस कहानी की अगली कड़ी में आप उनकी सुनाई हुई कहानी पढ़ेंगे तथा और भी बहुत कुछ!
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