अर्चना भाभी की चुदास और चूत चुदाई -4

(Archna Bhabhi Ki Chudas Aur Chudai-4)

2015-10-08

कहानी का पहला भाग :
कहानी का तीसरा भाग :

भाभी कसमसाई तो अंदर आधी ऊँगली डाल कर ऊँगली से ही चोदने लगा और हल्का हल्का कर के पूरा ऊँगली डाल दी। अब मैं अच्छे से घुमा रहा था ऊँगली को अंदर ताकि लंड के लिए जगह बन जाये।
‘आह्ह्ह्ह्ह् आह्ह्ह आह्ह्ह…’ भाभी किये जा रही थी।
मैंने पूछा- कैसी फीलिंग है?

बोली- पूछो मत जान, बहुत अच्छा लग रहा है, सच में तुम बहुत अच्छे हो। तुम्हारे जैसा कोई मज़ा नहीं देता होगा किसी को। आजह्ह आह्ह्ह पेल दो अजय मेरी जान, आज अपनी भाभी की गांड फाड़ दो… मार दो देरी प्यासी गांड को… आआह्हह आह्हह्ह लव यू अजय… आह आअह्ह आह्ह्ह्ह!

भाभी को मैंने बेड पर झुक दिया, वो बेड पर अपना कोहनी रख कर झुक गई जिससे उनकी गांड ऊपर की ओर हो गई।
‘आह आह आह आह…’ क्या मस्त गांड है इनकी, लग रहा दो बड़े पहाड़ पीछे की और उठे हुए हैं।
अब मैं झुक के उनकी गांड को फैला के गुलाबी छेद को चाटने लगा, साथ में दोनों मांसल कूल्हों को मसलने लगा।

भाभी अब पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी थी।
तभी मैं एक हाथ आगे करके चूत को भी सहलाने लगा, जैसे ही बुर को अपने हाथ में लिया, बुरी तरह से मेरी प्यारी भाभी कांप गई, कहने लगी- अब न तड़पाओ जान, डाल दो प्लीज।
अब मैं खड़ा होकर अपना मोटा लंड भाभी के गांड पर रख के रगड़ने लगा जिससे उनकी बेचैनी और बढ़ गई।

तभी मैंने कहा- यह तो सूखा है, पहले इसे गीला करो।
भाभी ने अचानक से मुड़ के मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप जैसे चूसने लगी, मैं भी उनका सर पकड़ के मुँह में ही पेलने लगा।
‘अहह आह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हह्ह…’ भाभी जन्नत की सैर करवा रही थी, मस्त होकर मेरा लौड़ा चूस रही थी पूरी जीभ लगा कर, जब अपने थूक से मेरे लंड को पूरा लाकर दिया तो निकाली और मेरे मोटे लंड के सुपाड़े को फिर से अपने थूक से और गीला किया।

अब भाभी आगे झुक के अपने चूतड़ उठा कर बिल्कुल तैयार थी गांड चुदवाने को।
मैंने भी अपना लंड गांड के छेद पर रखा और एक हाथ से गांड को पकड़ा और एक हाथ से लंड को, थोड़ा दबाया तो भाभी हल्का सा कसमसाई।
फिर एक ज़ोर का झटका दिया अपनी कमर को मैंने तो सुपाड़ा अंदर था अब उस मस्त हसीना के गांड में।
‘आह आः आः आः आहह…’ क्या टाइट गांड है, जैसे ही सुपाड़ा अंदर गया तो हल्का दर्द हुआ उनको, बोली- आराम से अजय… कहीं भागी नहीं जा रही हूँ।

मैंने भी अब ज़ोर नहीं लगाया, उतना ही में गांड को पेलने लगा आहिस्ता आहिस्ता।
जब भाभी को आराम हुआ तो हल्का हल्का चोदने लगा और थोड़ा ज़ोर लगा के थोड़ा सा अंदर कर देता अपने मूसल लंड को।

थोड़ी ही देर के बाद मेरा आधा लंड उनकी गांड में था, अब मैं लंड को आगे पीछे कर रहा था ‘आःह्ह्ह आअह आअह आःह्ह्ह…’ मस्त मज़ा आ रहा था, वो भी मस्त होकर चुदवा रही थी, बोल रही थी- बहुत मस्त करते हो, ज्यादा दर्द भी नहीं हुआ, आःह्ह्ह आःह्ह्ह पेलो अजय जान अपनी भाभी की गांड को। आह्ह आअह्ह अह्ह्ह और अच्छे से पेलो। बहुत मज़ा आ रहा है… पेलते रहो। आज बरसों की इच्छा पूरी हुई है गांड मरवाने की… और ज़ोर लगाओ।

तभी मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा तो और लंड अंदर हो गया। भाभी हल्की सी चीखी पर खुद को रोक लिया।
मैं भी रुक कर उनको आराम देने लगा, अब हल्का हल्का फिर से चुदाई करने लगा।
अब आधा लंड बहार निकालता फिर पेलता, जिससे हम दोनों को बहुत मज़ा आने लगा था। मैं भी पूरे जोश में था तो ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा, भाभी भी मस्त होकर अपने चूतड़ हिला हिला के चुदवाने लगी, ऐसा लग रहा था कि मेरे से ज्यादा मज़ा उन्हें ही आ रहा है।

तभी मैंने आगे हाथ करके उनके बुर में भी उंगली दाल दी।
आआह आह्ह्ह आह्हह्ह…
भाभी की फ़ुद्दी बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी। अपनी बीच वाली ऊँगली पूरी पेल दी बुर में मैंने… गांड में लंड बुर में ऊँगली, भाभी तो जैसे पागल हो गई, लगभग चिल्लाने जैसे कहने लगी- फाड़ दो मेरी गांड को… आःह्ह्ह आःह्ह्ह अजय और तेज़ करो।

तभी मैंने 2 उंगलियाँ डाल दी बुर में।
क्या बताऊँ दोस्तो, आगे बुर में उंगली थी और पीछे गांड में लंड… लंड का हर धक्का बुर में मेरी उंगली पर पूरी तरह से महसूस हो रहा था।
आआह्ह आःह्ह आअह…

भाभी की बुर अब अपनी पूरी रंग में आ चुकी थी, तभी भाभी कहने लगी- मैं अब झड़ने वाली हूँ… आआह्हह आअह्ह आःह्ह्ह अजय और तेज़ करो दोनों जगह पे… फाड़ दो मेरी बुर को अपने हाथों से।
तभी मैंने 3 उंगलियाँ डाल दी बुर में, आः आःह्ह्ह इससे बहुत टाइट हो गई बुर। अब मैं हाथ से बुर को और लंड से गांड को पेल रहा था।
इतनी चुदाई के बाद भाभी झड़ने लगी, मेरा पूरा पंजा भीग गया भाभी के कामरस से, मैंने अपना हाथ निकल के भाभी के मुँह पर लगया तो वो अपना ही बुर का पानी चाटने लगी, पूरी तरह से वो पागल हो गई थी- आअह्ह आआह्ह!

अब मैंने अपना लंड उनकी गांड से निकाला और खुद बेड पर आ गया, भाभी मेरे ऊपर आ गई मेरे लंड के ऊपर, अपने दोनों पैर मेरे कमर के अगल बगल रख के अपने गांड के छेद को मेरे लंड पर टिका दिया, खुद ही धीरे धीरे अंदर करने लगी।
आअह्ह आःह्ह क्या हसीं नज़ारा था, मैं अपने लंड को एक हसीना के मदहोश कर देने वाली गांड में जाते देख रहा था।
काश समय यही रुक जाता।

अब भाभी मेरे लंड को अपनी गांड में डाल चुकी थी, चेहरा उनका बिल्कुल लाल हो गया था, क्या लग रही थी!
मैं भाभी की कमर पकड़ के नीचे से हल्का धक्का देने लगा, ऊपर से भाभी अपने चूतड़ ऊपर नीचे कर के मुझे चोदने लगी।
उनके ऊपर नीचे होने से उनकी बड़ी बड़ी चूचियाँ उछलने लगी, क्या सुन्दर लग रही थी।

मैंने चूची को पकड़ के मसलना चालू किया और नीचे से गांड उठा उठा कर भाभी के गांड को चोदे जा रहा था।
आअह्ह्ह आःह्ह्ह आह्ह्ह… मस्त मज़ा आ रहा था।
अब मैंने भाभी की बुर को भी सहलाना चालू कर दिया था, एक हाथ से चूची मसल रहा रहा था, एक हाथ से बुर सहला रहा था।

भाभी पूरे जोश में मुझे चोदे जा रही थी और बोले जा रही थी- अजय आज से मैं तुम्हारी हूँ, जब चाहे मुझे चोदना आह… आआह्हह ह्हह्ह आआह्ह्हह… बस मुझे अपने से दूर मत करना।
कहते कहते भाभी ने अपने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी।

अब लग रहा था कि मेरा निकलने वाला है तो भाभी को रोक दिया और उतरने का इशारा किया।
उन्होंने पूछा- क्यूँ?
तो मैंने कहा- नहीं रूकती तो मेरा पानी तुम्हारी गांड भर देता और मैं अभी निकालना नहीं चाहता पानी अपना।
थोड़ी देर रुकने के बाद। भाबी को नीचे पेट के बाल लेटा दिया। और मैं उनके ऊपर आ गया।
और गांड को फैला के लंड रख दिया। अब एक ही झटके में पूरा लंड पेल दिया उनकी गांड में।
‘आअह्ह्ह…’ भाभी चिल्लाई।
पर मैं अब कहाँ रुकने वाला था, पूरा बॉडी उनके पीठ पर रख के उनके गांड चोदने लगा।

भाभी भी कहने लगी- अजय आज गांड मरवाने की सारी तम्मना पूरी हो गई। आअह्ह्ह आःह्ह्ह चोदो और ज़ोर से… आआह्ह आःह्ह्ह
मैं भी पूरा ज़ोर लगा के चोदने लगा- आःह्ह्ह्ह्ह आःह्ह!

थोड़ी देर ऐसे चोदने के बाद भाभी को घोड़ी बनाया, अब मेरा मन भाभी का बुर पेलने का होने लगा था, आअह्ह ह्हह क्या लग रही थी भाभी की गांड, गांड का छेद खुल चुका था। अब मैंने थोड़ा थूक लगा के उनकी गांड पर अपना लंड पेल दिया जड़ तक।

‘आअह्हह्ह आह्हह्ह…’ बहुत मज़ा आने लगा था अब मुझे भी। लग रहा था हर शॉट पर कि अब झड़ जाऊँगा, फिर भी काबू में किये हुए था, हर धक्के पर भाभी के चूचे मस्त झूल रहे थे। मैं उनकी कमर पकड़ के चोदे जा रहा था और बुर को सहला रहा था जो फिर से अब बहुत पानी छोड़ रही थी।
तभी मैंने अपना लंड गांड से निकाल कर बुर पर रखा, बुर ने बहुत पानी छोड़ा था तो लंड का सुपारा गीला हो गया, लंड से चूत को रगड़ने लगा तो भाभी चिल्लाने लगी- मत तड़पाओ जान, पेल दो, गांड मरवा के बुर में आग लग गई है। चोद दो मुझे रात जैसे, दे दो मुझे पूरा मज़ा… आआह्ह्हह…

मैंने भी देर न करते हुए भाभी का कमर पकड़ा और एक बार में ही पूरा लंड अंदर पेल दिया।
भाभी के मुख से एक सिसकारी निकली मज़े वाली ‘आः आःह्ह्ह आःह्ह्ह…’
भाभी ज़ोर ज़ोर से बके जा रही थी- फाड़ो चूत को… पूरी तरह से करो… पूरा चोदो… मस्त लंड है अजय तम्हारा। तुम्हारे जैसा कोई नहीं चोदता है। तुम मेरे हीरो हो। आज मुझे जन्नत दे रहे हो जान तुम। और तेज़ अज्जु बेटा और तेज़ बेटा। मेरी जान हो तुम अज्जु आआहह्हह्ह आअह्हह्हह…

ऐसा लग रहा था कि अब भाभी कभी भी झड़ सकती है और मैं भी तेज़ से किये जा रहा था, लगातार चोदने से मेरी भी हालत ख़राब थी, अब लग रहा था कि मेरा भी लंड कभी भी पानी छोड़ देगा।
तभी भाभी चिल्लाई ज़ोर से- मैं आ रही हूँ आःह्ह्ह आअह्ह्ह अज्जु कस के चोदो।

तभी मैं भी झड़ने लगा।
हम दोनों साथ में ही झड़े थे ‘आआह्हह आआह आअह्ह आअह्हह…’
मेरा लंड ने अंदर ही झटके मार मार कर अंतिम बून्द तक अपना पानी गिरा दिया, चूत से हम दोनों का मिला हुआ पानी बाहर आने लगा।
हम दोनों ने बहुत रिलैक्स महसूस किया, बाथरूम में जाकर अपना लंड धोया और साथ में भाभी की बुर और गांड भी मैंने ही धोई।
हम लोग थोड़ी देर ऐसे ही चिपक के बैठे रहे, फिर भाभी मेरे गोद में सर रख के लेट गई।

दोस्तो, सेक्स के बाद हमेशा थोड़ी देर पार्टनर के साथ चुपचाप लेटना चाहिए, इससे उसको बहुत अपनापन लगता है।
तो ऐसे ही लेट के हम लोग बाते करने लगे, मैं भाभी के सर को सहला रहा था, वो मेरे सीने पर हाथ फेर रही थी।
मैंने पूछा- कैसा लगा?
तो बोली- बता नहीं सकती कि कितना अच्छा लगा। तुमसे 2 ही बार चुदवा के ऐसा लगा कि जैसे 20 साल पहले की बात हो। आज फिर उसी जोश से चुदवाया।

मैंने कहा- क्यूँ ऐसा, भैया ऐसा नहीं करते क्या?
तो बोली- तुम सबसे अच्छा सेक्स करते हो। कैसे करना है, तुम्हें पता है कैसे औरतों को उतेजित करते हैं, फिर कैसे शांत करते हैं बड़े अच्छे से जानते हो।
मैंने कहा- बस मैं आपका ख्याल रखता हूँ और कुछ नहीं।
तो बोली- बस ऐसे ही ख्याल रखना मेरा!
मैंने कहा- हाँ रखूँगा।

अब तक 3.30 बज गए थे।
थोड़ी देर बाद ने हम दोनों एक दूसरे को कपड़े पहनाये, चूमा, एक फिर भाभी रात में आने का वादा करके चली गई।

तो दोस्तो, कैसी लगी अर्चना भाभी के गांड मारने की कहानी? आगे की कहानी अगली बार।
प्लीज मेल करके हौंसला- अफजाई करियेगा ताकि आगे भी लिखने के लिए प्रेरित हो सकूँ।
[email protected]

What did you think of this story??

Click the links to read more stories from the category or similar stories about , , ,

You may also like these sex stories

Download a PDF Copy of this Story

Comments

Scroll To Top