मेरी बबली लंड की पगली-1

(Meri Babli Lund Ki Pagli- Part 1)

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दोस्तो, मैं आज फिर आपसे अपनी और अपनी एक प्यारी सी फ्रेंड की सेक्स स्टोरी साझा करने जा रहा हूँ.

ये उन दिनों की बात है, जब बबली मेरे ही कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहने आई थी. बबली से मेरा रिश्ता बहुत गहरा था. वो सब कैसे बना, ये सब मैं बताना नहीं चाहता. पर मेरा उसके घर में अक्सर आना जाना होता रहता था. वो मुझे अपना एक बहुत ही अच्छा दोस्त मानती थी. हम दोनों और उसके पति अक्सर साथ बैठ कर ड्रिंक एन्जॉय भी कर लेते थे. मतलब हम आपस में एकदम खुले हुए थे.

उसके पति को कुछ दिनों के लिए ऑफिस के काम से बाहर जाना था और वो इस कॉलोनी में मेरे अलावा किसी को जानती भी नहीं थी. तो उन्हीं दिनों मेरी बीवी के मायके में किसी के मौत हो जाने की वजह से उसे भी अपने मायके जाना था. मेरी बीवी बबली से मेरे खाने का कह कर गई थी. वो न भी कह जाती तो भी मैं उसके घर ही खाना खाने जाता.

बबली ने मुझसे कहा- शाम को अब तू खाना खाने मेरे यहां आ जाना.
मैं ओके कह दिया और इसी कारण मैं शाम को करीब आठ बजे उसके घर जाने के निकलने लगा.

तभी उसने मुझसे फोन करके कहा- घर में वोड्का खत्म हो गई है, लेते हुए आना.
मैंने उससे कहा- क्या बात है, आज तो तेरा पति भी घर में नहीं है और तू तब भी मुझे बुला कर पीने की बात कर रही है, कहीं कोई लफड़ा हो गया तो?
इस पर वो हंस कर बोली- मुझे पता है कि मेरा दोस्त ऐसा नहीं है, वो कितने भी नशे में रहे, मुझसे ज़बरदस्ती कभी नहीं करेगा.

मैं उसकी बात पर बस हंस दिया. फिर मैं रात को वोड्का की दो बॉटल लेकर उसके घर पहुंच गया.

वो उस समय रसोई में काम कर रही थी और उसने एक गहरे नीले रंग का लोअर और बिना बाजू वाली पीली टी-शर्ट डाली हुई थी.

मैं उसके ड्रॉइंग रूम में बैठ गया और उससे पूछ कर सामने बने शोकेस में से दो गिलास निकाल कर पैग बनाने लगा.

वो रसोई में काम कर रही थी, तो उसने कहा- पैग लेकर यहीं रसोई में ही आ जा, खाना भी बन जाएगा और साथ साथ में पैग भी होता जाएगा.

मैं दोनों गिलास लेकर रसोई में चला गया. वो प्लेटफार्म से सहारा लेकर रोटियां बना रही थी. उसके हाथ आटे में सने हुए थे. मैं उसके पीछे फ्रिज के पास खड़ा हुआ था.

मैंने उसे पैग दिया, तो बोली कि यहीं रख दे … मेरा हाथ खराब है, मैं कैसे पकडूँगी या तू अपने ही हाथों से मुझे पिलाता जा.
मैंने कहा- ठीक है.
मैंने पीछे खड़े होके उसकी गर्दन के पास से अपना हाथ आगे ले जा कर उसे एक सिप पिलाया.

तभी पता नहीं मुझे क्या हुआ, अचानक से मेरे मन में शैतान जाग उठा. उसके पास खड़े होने से उसके शरीर से पसीने की बहुत नशीली महक आ रही थी. मैं उसी में खो गया. उसने मेरे हाथ से सिप पी लिया. मैं भी उसकी मादक खुशबू में मस्त होकर वहीं उसके करीब खड़ा रहा.

उसने कहा- मैं पी तो लिया है. अब तू पीछे होकर खड़ा हो जा … या यहीं मुझसे चिपक कर ही खड़ा रहेगा?
मैंने कुछ नहीं कहा और एक सेकंड बाद उसे फिर से एक सिप दिया. उसने अपने होंठों को गिलास से लगा कर जब सिप गटका, तो मुझे वासना में शराब का घूंट उसकी गर्दन में उतरते हुए दिख रहा था.

तभी उसकी गटकने की आवाज़ गट गट करके आई. मैंने पहले भी उसे कई बार काम या हंसी मजाक के चलते छुआ था, कई बार टच भी किया था, मगर ऐसी फीलिंग मुझे इससे पहले कभी भी नहीं आई थी … जो आज आ रही थी.

मैंने उससे कहा कि तू जल्दी जल्दी ये पैग खत्म कर … तो फिर फ्री होकर बैठते हैं.
मेरी इस बात पर उसने एक ही बार में मेरे हाथ से अपना पैग ख़त्म कर लिया. एकदम से पूरा गिलास पीने से उसकी एक ज़ोर से आह निकली.

बबली- आअहह … एम्म मज़ा आ गया … इतने दिनों बाद पी रही हूँ … और वो भी आज तेरे साथ अकेले में.

उसने ये कहा, तो न जाने क्यों मेरे लोवर में मेरे लंड ने सलामी देनी शुरू कर दी, जो उसके लोवर के पीछे से उसकी गांड में लग रहा था.

फिर मैंने भी दूसरे हाथ से अपना पैग भी एक बार में ही निपटा दिया और दोनों गिलास वहीं प्लेटफार्म पर रख दिए.

अब मैं वापस उसके पीछे खड़ा होकर उसकी गांड को हिलते हुए और मटकते हुए देख रहा था. मैंने जेब से एक सिगरेट निकाल कर सुलगा ली और उसके हुस्न का दीदार करने लगा. दारु पीने के सुरूर में मेरे लोवर में मेरा लंड खड़ा हो रहा था. मैं अपने लोवर में अन्दर हाथ डाल कर लंड सहलाने लगा.

तभी उसने पीछे पलट कर देखा, तो मेरा हाथ लोवर के अन्दर था और लोवर में मेरा लंड तना हुआ अलग ही दिख रहा था. उसे देखते हुए मैंने झट से अपना हाथ बाहर निकाल लिया.

वो शर्मा कर हँस दी. फिर उसने फ्रिज में से कुछ सामान लिया और वापस पलट गई. उसने जल्दी से अपना काम निपटाया और फिर हम दोनों ड्रॉइंग रूम में आकर बैठ गए. हम दोनों इधर अपने अपने पैग बना कर घूँट भरने लगे.

वो मेरे सोफे के सामने नीचे बैठ गई और मैं सोफे के ऊपर दोनों पैर फैला कर बैठ गया. वो मेरी तरफ पीठ करके मेरे दोनों पैरों के बीच में बैठ गई और हम दोनों सामने लगे टीवी को देखने लगे.

तभी उसने एक अंगड़ाई ली, जिससे मुझे फिर से उसके बगलों से वो पसीने की महक आई. मैं फिर से उस मादक नशीली महक में खोने लगा.

मैंने देखा उसकी बगलें एकदम साफ़ थीं, उधर एक बाल भी नहीं था, बिल्कुल चिकनी बगलें थीं.

फिर वो घूँट गटकते हुए बोली- आअहह … मैं तो आज बहुत थक गई हूँ यार … आज मैंने बहुत काम किया है.
यह सुनकर मैंने उसके सिर को अपने गोदी में ले लिया और उसके सर की मालिश करने लगा.
वो बोली- अरे वाह मेरा दोस्त मालिश भी अच्छी कर लेता है.
मैंने कहा कि हां … तेरे इस दोस्त के पास और भी कई हुनर हैं. तूने अपने दोस्त को कभी ध्यान से देखा ही नहीं है.

ये कहते हुए मैं अपनी उंगलियां उसके बालों में चलाने लगा और माथे पर मालिश जैसी करने लगा.

मुझे ऊपर से उसकी टी-शर्ट के अन्दर उसकी ब्लैक ब्रा और दोनों मम्मों की गोलाइयां साफ़ दिख रही थीं. मेरा मूड बनने लगा.

तभी मेरा लंड नीचे से उसके सर पर धक्के मारने लगा. इससे वो थोड़ी असहज हुई और वापस उसने अपने सर को मेरी जांघों पर रख दिया … और अपने दोनों पैर फैला कर मस्ती से अपना पैग पीने लगी.

वो मस्ती में बोली- हाय देखो आज कैसी अय्याशी चल रही है, मेरे एक हाथ में जाम है … एक दोस्त मेरे बदन की मालिश कर रहा है … मेरा पति बाहर गया हुआ है.
मैंने कहा- हां आज तो तेरी ऐश है.
यह कहते हुए मैंने उसके माथे पे एक किस कर दिया.

इस पर वो चौंक उठी और बोली- ये क्या कर रहा है … मुझे तो लगता था कि तू नहीं बहकेगा. मगर आज तो तू भी बहक रहा है.
मैंने कहा- तो अब तू ही सोच ले कि मैं अगर आज तेरे पर बहक रहा हूँ, तो आज कुछ तो स्पेशल बात होगी.

ये कहते हुए मैंने उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए. मैं अपने दोनों होंठों से उसने निचले होंठ को चूसने चूमने लगा. वो भी अब नशे में थोड़ा थोड़ा बहकने लगी थी. वो मुझसे छुड़वाने की कोशिश कर रही थी, मगर छुड़वा नहीं रही थी. बस यूं ही झूठमूट की कसमसा रही थी.

ये देख कर मैं अपने दोनों हाथ उसकी पीठ पे चलाने लगा और मेरे हाथ रेंगते हुए उसके लोवर के ऊपर से उसकी गांड पर चलने लगे. मैंने दोनों हाथों में उसकी गोल गांड को भर कर मसल दिया और उसे अपनी ओर खींच कर अपने से चिपका लिया.

उसने इस बात का कोई विरोध नहीं किया. फिर धीरे धीरे वो भी किस करने में मेरा साथ देने लगी. अब हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों को चूम चाट रहे थे और हम दोनों की लार एक दूसरे के लार में मिलना शुरू हो गई. उसके दोनों दूध मेरे सीने से चिपक गए.

तभी वो मुझसे अलग होकर बोली- ले बस हो गई तेरे मन की … अब चुपचाप बैठ कर मुझे पीने दे.
फिर हम दोनों फिर से सोफे पर उसी अंदाज़ में बैठ गए और पीने लगे. अब मैं पीते पीते फिर से उसकी मालिश कर रहा था. अब मगर मैं माथे से होते हुए उसकी गर्दन, गले और वक्ष स्थल को भी सहला रहा था.

तभी पलट कर उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और बोली- अच्छा ये महाशय हैं, जो मुझे बार बार सर दर्द दे रहे हैं.

बस तभी मैं सब छोड़ कर सोफे पर पीछे टिक कर बैठ गया. उसने अपने दोनों हाथों से मेरे लंड को लोवर के ऊपर से ही पकड़ा हुआ था. कुछ देर लंड टटोलने के बाद उसने मेरे लंड को लोवर के ऊपर से ही अपने मुँह में भर कर किस करना शुरू कर दिया.

मैं अपने हाथों में पैग पकड़े हुआ था. तभी मुझे कुछ ख्याल आया और मैंने उसे मुँह ऊपर उठा कर अपने गिलास से ही पैग पिला दिया. उसने वो पैग भरे भरे ही मुँह में मेरा लंड ले लिया, जिससे मेरा लोवर गीला हो गया. वो मेरे भीगे हुए लंड को चाटने लगी.

मैंने मस्ती से कहा- एकदम से क्या हो गया तेरे को?
वो बोली- बस अब और मेरे से सब्र नहीं होता. आज मैं और तू अपने दोनों की मन की सारी हसरतें पूरी कर ही लेते हैं. आज तू मुझे मत रोकना … मुझे कब से इस चखने के साथ दारू पीना थी.

ये कहते हुए वो अब मेरे ऊपर चढ़ गई. और फिर हम दोनों के होंठ मिल गए.

मैं अपने हाथों से उसकी गांड को दबा दबा कर मसल रहा था और वो लोवर के ऊपर से ही अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर रगड़ रही थी. अपनी चूत से वो मेरे लंड को मसल रही थी.

तभी मैंने उसे अपनी गोदी में उठा कर खड़ा हो गया और उसे ले जाने लगा. उसने अपनी उंगली से मुझे इशारा किया, तो मैंने उसे उसके बेडरूम में ले जाकर उसके बेड पे गिरा दिया. उसके साथ ही मैं उसके ऊपर गिर गया. हम दोनों आपस में गुत्थम गुत्था हो गए.

फिर हम दोनों बेड पर अपने घुटनों के बल बैठ कर एक दूसरे को देखने लगे. वो मेरी ओर हवस भरी नज़रों से देख रही थी. उसकी आंखें कुछ वोड्का और कुछ हवस से लाल हुई जा रही थीं.

उसने अपने बालों में हाथ डाल कर उन्हें हिलाया और उसके सारे बाल उसके चेहरे पर बिखर से गए.
इस वक्त वो मुझे हद से ज्यादा कामुक लगने लगी थी.

वो और मैं बेड पर घुटने के बल एक दूसरे के सामने थे. मैंने उसकी कमर को अपने हाथों से थाम लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा. मैं उसके माथे पर, आंखों पर, गालों पे, उसकी कान की लौ पे, उसकी गर्दन पर … पूरे ज़ोरों से चूमने चाटने लगा था. उसने मस्त होकर अपनी बांहों का हार मेरे गले में डाल दिया. वो मेरी बांहों में झूल सी गई थी. मैं उसके गले में अपनी नाक से सूंघते हुए धीरे धीरे उसकी टी-शर्ट के गले के अन्दर तक चूमने लगा. उसके दूध कठोर और बड़े दिखने लगे थे. उनका गोल गोल रूप अब और भी अच्छा लगने लगा था.

फिर मैंने उसे अपनी ओर खींचा और लोवर के ऊपर से ही अपने लंड से उसकी चूत को मिला दिया. वो भी अपनी चूत को मेरे लंड पर दबा रही थी.

तभी उसने अपनी टांगों को और चौड़ा करके खोल दिया. साथ ही उसने अपनी दोनों टांगें खोल कर मेरे दोनों ओर लपेट लीं और मुझे भी बिठा लिया. अब वो मुझे मेरे चेहरे में … और बाक़ी सभी जगह पर किस करने लगी. फिर उसने हाथ डाल कर मेरी टी-शर्ट उतार दी.

अब उसके होंठ मेरे सीने और गर्दन पे जम गए थे और वो मुझे धीरे धीरे चूमने लगी थी, चाटने और कभी कभी काटने भी लगी थी.

मेरे मुँह से ‘आआहह उउउंम्म हमम्म..’ की कामुक आवाजें निकलने लगी थीं. मेरा लंड अब लोवर को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था.

तभी उसने अपनी उंगलियों को मेरे सीने की घुंडियों पर फेरना शुरू कर दीं. उसने मेरे चेहरे को पीछे से बालों में हाथ डाल कर पकड़ा और एक हाथ मेरे निप्पलों को सहलाते हुए होंठों में भरने लगी. उसकी लिपस्टिक के निशान मेरे निप्पलों पर बन गए थे.

मैं भी अपने दोनों हाथ उसकी टी-शर्ट के अन्दर डाल कर उसकी पीठ को सहला रहा था.
वो मुझसे बोली- जल्दी करो यार … पहले मेरे को एक बार निपटा दो. बाकी का खेल अगले राउंड में करेंगे.

ये कह कर वो ऐसे ही उल्टी, पीठ के बल लेट गई. मैंने उसके बाजू में लेट कर उसकी टी-शर्ट में हाथ डाल कर उसे ऊपर सरका दिया. मैं उसकी टी-शर्ट में हाथ सरकाता हुआ उसके पेट पर फेर रहा था और अपने होंठों से उसके पेट और नाभि को चूम रहा था.

जैसे ही मैंने उसकी नाभि को चूमा, उसके मुँह से एक तेज ‘आआहह..’ निकल गई. वो ‘सीईईईई … सीई … आहह … आआम्म्म..’ करते हुए मचल रही थी.

इसके बाद मैंने उसकी टी-शर्ट को उसके गले से ऊपर करके निकाल दिया और उसके दोनों हाथ ऊपर की ओर कर दिए.

मैं उसकी नंगी बगलों को चूमने लगा और चाटने लगा. उसकी बगलों में से मादक सी खुशबू आ रही थी. उसके पसीने और डियो की मिक्स खुशबू से मुझे बेहद उत्तेजना छा रही थी.

वो चाह रही थी कि जल्दी से एक राउंड चुदाई का हो जाए … मगर मैं चाह रहा था कि धीरे धीरे आरम्भ करके इसे एक कड़क और चरम सुख दूँ.

लेकिन वो तड़प उठी थी और अपनी बगलों में घुसे मेरे मुँह को हटाना चाह रही थी- ‘आअहह … ऊहह जानू प्लीज़ नीचे कुछ करो ना जान … ऊऊँहह देखो न … मुझे कुछ कुछ हो रहा है … आऐईयईईई … उउउफ़फ्फ़ … चोद दो न मुझे.
यह कहते हुए वो पलट गई और अब उसकी पीठ मेरी तरफ थी. मैं उसकी गांड पर बैठा हुआ था. मैं उसकी पीठ को सहला रहा था.

फिर मैं उस पर पूरा चढ़ गया और उसकी पीठ पर से उसके बाल हटा कर उसकी गर्दन पर चूमने लगा. मैंने अपने हाथों को उसकी बगलों से डाला और उसकी ब्रा की पट्टियों के ऊपर से उसे सहलाने लगा. साथ ही मैं अपने लंड को लोवर के ऊपर से ही उसकी गांड में मानो घुसा देना चाह रहा होऊं … ऐसे झटके दे रहा था. वो भी नीचे से अपनी चूत को बिस्तर पर रगड़ रही थी.

फिर मैंने उसे उठा कर बिठाया और पीछे से उसे जकड़ लिया. मैंने उसे पीछे से किस करना शुरू किया … उसके कंधों पर, गर्दन पर चूमने लगा. उसने भी अपनी बांहें पीछे करके मेरे गले में डाल दीं. मैं उसकी बगलों में घुस कर फिर से उसकी मादक महक वाली बगलों को चाटने लगा.

मेरी इस हरकत से उसकी उत्तेजना और अधिक भड़क उठी.

फिर इस उत्तेजना का क्या अंजाम हुआ, उसको पूरे विस्तार से मैं आपकी सेवा में अपनी इस सेक्स कहानी के माध्यम से जाहिर करूंगा. ये मेरी सच्ची दास्तान है. आप मुझे मेल कर सकते हैं.
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कहानी जारी है.

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