दोस्त की माँ, बुआ और बहन की चुदाई-2

(Dost Ki Ma, Bua Aur Bahan ki Chudai- Part 2)

2002-11-04

कहानी का पिछला भाग :

रास्ते में मैंने बीयर की दुकान से बीयर की बोतलें ले आया. घर आकर हाथ पैर धोकर केवल लुंगी पहन कर दूसरे कमरे में जाकर बीयर पीने लगा. एक घण्टे में मैंने 4 बोतलें बीयर पी ली थी और बीयर का नशा हावी होने लगा था.

इतने में बुआ जी ने खाने के लिए आवाज लगाईं. हम सब साथ बैठ कर खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद मैं सिगरेट की दुकान जाकर सिगरेट पीने लगा.

जब वापस आया तो आँगन में सब बैठ कर बाते कर रहे थे. मैं भी उनकी बातों में शामिल हो गया और हंसी मजाक करने लगा.
बातों बातों में बुआ जी माँ से बोलीं, भाभी- दीनू बेटा अच्छी मालिश करता है. आज खेत में काम करते करते, अचानक! मेरी कमर में दर्द उठा तो इसने अच्छी मालिश की और कुछ ही देर में मुझे आराम आ गया.

माँ हंस पड़ी और मेरी तरफ़ अजीब नज़रो से देखने लगीं. मैं कुछ नहीं कहा और सिर झुका लिया.

मालिश के समय माँ उत्तेजित हुईं

आधे घण्टे के बाद बहन और बुआ सोने चली गईं. मैं और माँ इधर उधर की बातें करते रहे. करीब रात 11 बजे माँ बोली, बता आज तो! मेरे पैर दुख रहे हैं. क्या तुम मालिश कर दोगे?

दीनू: हाँ, क्यों नहीं! लेकिन आप केवल सूखी मालिश करवाओगी या तेल लगाकर?

मा: बेटा अगर तेल लगा कर करोगे तो आसानी होगी और आराम भी मिलेगा!

दीनू : ठीक है! लेकिन सरसो का तेल हो तो और भी अच्छा रहेगा और जल्दी आराम मिलेगा.

फिर माँ उठ कर अपने कमरे में गईं और, मुझे भी अपने कमरे में बुला लिया. मैंने कहा, आप चलिए मैं पेशाब करके आता हूँ.

मैं जब पेशाब करके उनके कमरे में गया तो देखा माँ अपनी साड़ी खोल रही थी.

मुझे देख कर बोली, बेटा तेल के दाग साड़ी पर ना लगे इसलिए साड़ी उतार रही हूँ. वो अब केवल ब्लाऊज़ और पेटीकोट में थी और मैं बनियान और लुंगी में था.

माँ ने तेल की शीशी मुझे देकर बिस्तर पर लेट गईं. मैं भी उनके पैर के पास बैठ कर उनके पैर से थोड़ा पेटीकोट ऊपर किया और तेल लगा कर मालिश करने लगा.

माँ बोली, बेटा बड़ा आराम आ रहा है! जरा पिंडली में जोर लगा कर मालिश करो. मैंने फिर उनका दायाँ पैर अपने कंधे में रख कर पिंडली में मालिश करने लगा.

उनका एक पैर मेरे कंधे पर था और दूसरा नीचे था, जिस कारण मुझे उनकी झांटे और चूत के दर्शन हो रहे थे क्योंकि माँ ने अन्दर पैन्टी नहीं पहनी थी.

वैसे भी देहाती लोग ब्रा और पैन्टी नहीं पहनते हैं! उनकी चूत के दर्शन पाते ही मेरा लण्ड हरकत करने लगा.

माँ ने अपनी पेटीकोट घुटनों के थोड़ा ऊपर कर के कहा, जरा और ऊपर मालिश करो.

मैं अब पिंडली के ऊपर मालिश करने लगा, और उनका पेटीकोट घुटनों के थोड़ा ऊपर होने के कारण अब मुझे उनकी चूत साफ़ दिखाई दे रही थी.

इस कारण मेरा लण्ड फूल कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया, और चड्डी फ़ाड़ कर निकलने को बेताब हो रहा था.

मैं थोड़ा थोड़ा ऊपर मालिश करने लगा और मालिश करते करते मेरी उंगलियाँ कभी-कभी उनकी जाँघों के पास चली जाती थी.

जब भी मेरी उंगलियाँ उनके जाँघों को स्पर्श करती तो, उनके मुख से हाआ! हाअ! की आवाज निकलती थी.

मैंने उनकी ओर देखा तो माँ की आँखें बंद थी और बार बार वो अपने होंठों पर अपनी जीभ फेर रही थीं.

मैंने सोचा! कि, मेरी उंगलियों के स्पर्श से माँ को मजा आ रहा है. क्यों ना इस सुनहरे मौके का फ़ायदा उठाया जाए!

मैंने माँ से कहा, माँ मेरे हाथ तेल की चिकनाहट के कारण काफ़ी फिसल रहे है. यदि आप को अच्छा नहीं लगता है तो मालिश बंद कर दूँ?

माँ ने कहा, कोई बात नहीं मुझे काफ़ी आराम और सुख मिल रहा है. फिर मैं अपने हथेली पर और तेल लगा कर उनके घुटनों के ऊपर मालिश करने लगा.

मालिश के दौरान माँ की चूत को छुआ

मालिश करते करते अचानक! मेरी उंगलियाँ उनके चूत के इलाके के पास छूने को होने लगी. वो आँखें बंद कर के केवल आहें भर रही थीं.

मेरी उंगलियाँ उनके पेटीकोट के अन्दर चूत को छूने की कोशिश कर रही थी.

अचानक! मेरी उँगली उनके चूत को छू लिया, फिर मैं थोड़ा घबरा कर अपनी उँगली उनके चूत से हटा ली और उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए उनके चेहरे की ओर देखा लेकिन माँ की आँखें बंद थी.

वो कुछ नहीं बोल रही थीं. मेरा लण्ड सख्त होकर चड्डी के बाहर निकलने को बेताब हो रहा था.

मैंने माँ से कहा, माँ मुझे पेशाब लगी है. मैं पेशाब करके आता हूँ फ़िर मालिश करुगा.

माँ बोली, ठीक है! बेटा वाकयी तू बहुत अच्छा मालिश करता है. मन करता है मैं रात भर तुझसे मालिश करवाऊँ.

मैं बोला, कोई बात नहीं! आप जब तक कहोगी मैं मालिश करुँगा यह कह कर मैं पेशाब करने चला गया.

बुआ का नंगा बदन देखा

जब पेशाब करके वापस आ रहा था तो, बुआ जी के कमरे से मुझे कुछ कुछ आवाज सुनाई दी. उत्सुकता से मैंने खिड़की की ओर देखा तो वह थोड़ी खुली थी.

मैंने खिड़की से देखा, बुआ जी एकदम नंगी सोईं थीं और अपने चूत में ककड़ी डाल कर ककड़ी को अन्दर बाहर कर रही थीं और मुख से हा! हाआ! हाअ! की आवाज निकाल रही थीं.

यह सीन देख कर! मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया. मैंने सोचा, बुआ जी की मालिश कल करुँगा आज सुखबिंदर की माँ की मालिश करता हूँ क्योंकि, तवा गर्म है तो रोटी सेक लेनी चाहिए.

मैं फिर माँ के कमरे में चला गया.

मुझे आया देख कर माँ ने कहा, बेटा लाईट बुझा कर धीमी लाईट जला दो ताकि मालिश करवाते करवाते अगर मुझे नींद आ गई तो तुम भी मेरे बगल में सो जाना.

मैंने तब लाईट बंद करके धीमी लाईट चालू कर दी जब वापास आया तो, माँ पेट के बल लेटी थीं और उनका पेटीकोट केवल उनकी भारी भारी गाण्ड के ऊपर था बाकी पैरों का हिस्सा बिल्कुल नंगा था.

अब मैं हथेली पर ढेर सारा तेल लगा कर उनके पैरों की मालिश करने लगा. पहले पिंडली पर मालिश करता रहा फिर, मैं धीरे धीरे घुटनों के ऊपर जाँघों के पास चूतड़ों के नीचे मालिश करता रहा.

माँ की गांड देखने और छूने का मजा

पेटीकोट चूतड़ पर होने से मुझे उनकी झांटे और गाण्ड का छेद नज़र आ रहा था. अब मैं हिम्मत कर के धीरे धीरे उनका पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया.

माँ कुछ नहीं बोली और उनकी आँखें बंद थी.

मैंने सोचा! शायद उनको नींद आ गई होगी. अब उनकी गाण्ड और चूत के बाल मुझे साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे.

मैंने हिम्मत करके तेल से भरी हुई उँगली उनकी गाण्ड के छेद के ऊपर लगाने लगा वो कुछ नहीं बोलीं. मेरी हिम्मत और बढ़ गई.

मेरा अँगूठा उनकी चूत की फांकों को छू रहा था और, अँगूठे की बगल की उँगली उनकी गाण्ड के छेद को सहला रही थी.

यह सब हरकत करते करते मेरा लण्ड टाईट हो गया और चूत में घुसने के लिए बेताब हो गया.

इतने में माँ ने कहा कि, बेटा मेरी कमर पर भी मालिश कर दो, तब मैं उठकर पहले चुपके से मेरी चड्डी उतार कर उनकी कमर पर मालिश करने लगा.

थोड़ी देर बाद मैंने माँ से कहा कि, माँ तेल से आप का ब्लाऊज़ खराब हो जाएगा. क्या आप अपने ब्लाऊज़ को थोड़ा ऊपर उठा सकती हैं?

माँ की चूचियों को छूने का एहसास

यह सुनकर, माँ ने अपने ब्लाऊज़ के बटन खोलते हुए ब्लाऊज़ को ऊपर उठा दिया. मैं फिर मालिश करने लगा. मालिश करते करते कभी कभी मेरी हथेली साईड से उनके बूब्स को छू जाती थी.

उनकी कोई भी प्रतिक्रिया ना देख कर मैंने उनसे कहा, माँ अब आप सीधी सो जाइए. मैं अब आपकी स्पेशल तरीके से मालिश करना चाहता हूँ. माँ करवट बदल कर सीधी हो गईं.

मैंने देखा! अब भी उनकी आँखें बंद थी और उनके ब्लाऊज़ के सारे बटन खुले थे और, उनकी चूंची साफ़ झलक रही थी.

उनकी चूंची काफ़ी बड़ी बड़ी थी और साँसों से साथ उठती बैठती उनकी मस्त रसीली चूंची साफ़ साफ़ दिख रही थी.

माँ की सुरीली और नशीली धीमी आवाज मेरे कानो में पड़ी- बेटा अब तुम थक गए होगे, यहाँ आओ ना! और मेरे पास ही लेट जाओ ना.

पहले तो मैं हिचकिचाया क्योंकि, मैंने केवल लुंगी पहनी थी और लुंगी के अन्दर मेरा लण्ड चूत के लिए तड़प रहा था.

वो मेरी परेशानी समझ गई और बोलीं- कोई बात नही, तुम अपनी बनियान उतार दो और रोज जैसे सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ! शरमाओ मत, आओ ना!

मुझे अपने कान पर यकीन नहीं हो रहा था. मैं बनियान उतार कर उनके पास लेट गया और जिस बदन को कभी दूर से निहारता था आज, मैं उसी के पास लेटा हुआ था.

माँ का अधनंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था. मैं ऐसे लेटा था कि, उनकी चूंची बिल्कुल नंगी दिखाई दे रही थी, क्या हसीन नजारा था!

माँ खुलकर चूचियों को मुझसे दबवाईं

तब माँ बोली- इतने महीने से आज मालिश करवाई हूँ, इसलिए काफ़ी आराम मिला है!
फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर धीरे से खींच कर अपनी उभरी हुई चूची पर रख दिया और मैं कुछ नहीं बोल पाया. लेकिन अपना हाथ उनके चूची पर रखा रहने दिया.

मुझे यहाँ कुछ खुजा रहा है, जरा सहलाओ ना.
मैंने उनकी चूची को सहलाना शुरु किया और कभी कभी जोर जोर से, उनकी चूची को रगड़ना शुरु कर दिया.

मेरी हथेली की रगड़ पा कर माँ के निप्पल कड़े हो गए. अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ़ घूमा कर बोलीं- बेटा मेरा ब्लाऊज़ खोल दो और ठीक से सहलाओ.
मैंने काँपते हुए हाथों से माँ का ब्लाऊज़ खोल दिया और उन्होंने अपने बदन से उसे उतार कर नीचे डाल दिया.

मेरे दोनों हाथों को अपने नंगी चूचियों पर ले जाकर वो बोली- थोड़ा कस कर दबाओ ना! मैं भी काफ़ी उत्तेजित हो गया और, जोश में आकर उनकी रसीली चूची से जम कर खेलने लगा.

क्या बड़ी-बड़ी चूचियाँ थी! कड़ी कड़ी चूचियाँ और लम्बे लम्बे निप्पल्स. पहली बार मैं किसी औरत की चूची को छू रहा था.

माँ को भी मुझसे अपनी चूंची की मालिश करवाने में मज़ा आ रहा था.

मेरा लण्ड अब खड़ा होने लगा था और लुंगी से बाहर निकल आया. मेरा 9 इंच का लण्ड पूरे जोश में आ गया था.

माँ की चूंची मसलते मसलते हुए, मैं उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा लण्ड उनकी जाँघों में रगड़ मारने लगा था.

माँ मेरी विशाल लण्ड देख चौंकी

अब उन्होंने कहा- बेटा तुम्हारा लण्ड तो लोहे के समान हो गया है और इसका स्पर्श से लगता है कि काफ़ी लम्बा और मोटा होगा. क्या मैं हाथ लगा कर देखूँ?

उन्होंने पूछा, और मेरे जवाब देने से पहले अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख कर उसको टटोलने लगी.

अपनी मुठ्ठी मेरे लण्ड पर कस के बंद कर ली और बोली- बाप रे! ये तो बहुत कड़क है. वो मेरी तरफ़ घूमी और अपना हाथ मेरी लुंगी मे घुसा कर मेरे फ़ड़फ़ड़ाते हुए लण्ड को पकड़ लिया.

लण्ड को कस कर पकड़े हुए वो अपना हाथ लण्ड के जड़ तक ले गई, जिससे सुपाड़ा बाहर आ गया. सुपाड़े की साईज और आकार देख कर वो बहुत हैरान हो गईं.

बेटा कहाँ छुपा रखा था? ऐसा तो मैंने अपनी जिन्दगी में नहीं देखा है! उन्होंने पूछा.

मैंने कहा- यहीं तो था, तुम्हारे सामने लेकिन तुमने ध्यान ही नहीं दिया. यदि आप ट्रेन में गहरी नींद में नहीं होतीं तो शायद आप देख लेतीं क्योंकि ट्रेन में रात को मेरा सुपाड़ा आप की चूत को रगड़ रहा था.

माँ बोली- मुझे क्या पता था कि, तुम्हारा इतना बड़ा लौड़ा होगा! ये मैं सोच भी नहीं सकती थी.

मुझे उनकी बिन्दास बोली पर आश्चर्य! हुआ जब उन्होंने, ‘लौड़ा’ कहा और साथ ही में बड़ा मज़ा अया.

वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेकर खींच रही थीं और कस कर दबा रही थीं, फिर माँ ने अपना पेटीकोट अपनी कमर के ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लण्ड को अपनी जाँघों के बीच ले कर रगड़ने लगी.

माँ ने अपनी चूचियों को चुसवाया

वो मेरी तरफ़ करवट ले कर लेट गईं ताकि मेरे लण्ड को ठीक तरह से पकड़ सके. उनकी चूची मेरे मुँह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हें कस कस कर दबा रहा था.

अचानक! उन्होंने अपनी एक चूची मेरे मुँह मे ठेलते हुए कहा- चूसो इनको मुँह मे लेकर!

मैंने बाईं चूची अपने मुँह मे भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा. थोड़ी देर के लिए मैंने उनकी चूची को मुँह से निकाला और बोला- मैं तुम्हारा ब्लाऊज़ मे कसी चूची को देखता था और हैरान होता था.

इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हें मुँह मे लेकर चूसूँ और इनका रस पी लूँ. पर डरता था पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ ना हो जाओ!

तुम नहीं जानती कि, तुमने मुझे और मेरे लण्ड को कल रात से कितना परेशान किया है?

अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो! मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ जैसा चाहे वैसा ही करो, माँ ने कहा.

फिर क्या था, माँ की हरी झंडी पकड़ मैं टूट पड़ा माँ की चूची पर!

मेरी जीभ उनके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी. मैंने अपनी जीभ माँ के उठे हुए कड़े निप्पल पर घूमाया. मैंने दोनों चूंचियो को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था.

मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूँगा. माँ भी पूरा साथ दे रही थी. उनके मुँह से ओह! ओह! अह! शी! शी! की आवाज निकल रही थी.

माँ ने मुझको चोदने को बोला

मुझसे पूरी तरफ़ से सटे हुए वो मेरे लण्ड को बुरी तरह से मसल रही थीं और मरोड़ रही थीं. उन्होंने अपनी बाईं टांग को मेरे दाईं टांग के ऊपर चढा दिया और मेरे लण्ड को अपनी जाँघों के बीच रख लिया.

मुझे उनकी जाँघों के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ. आह! उनकी झांटो से भरी हुईं चूत थी.

मेरा लण्ड का सुपाड़ा उनकी झांटो मे घूम रहा था. मेरा सब्र का बांध टूट रहा था.

मैं माँ से बोला- माँ मुझे कुछ हो रहा और मैं अपने आपे में नहीं हूँ, प्लीज! मुझे बताओ मैं क्या करूं?
माँ बोली- तुमने कभी किसी को चोदा है आज तक?
मैंने बोला- नही! कितने दुख की बात है?

कोई भी औरत इसे देख कर कैसे मना कर सकती है? मैं चुपचाप उनके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा.

उन्होंने अपना मुँह मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोलीं- अपनी दोस्त की माँ को चोदोगे?
क्कक!! क्यों!! नही, मैं बड़ी मुश्किल से कह पाया.

मेरा गला सूख रहा था. वो बड़े मादक अन्दाज़ मे मुस्कुरा दीं और मेरे लण्ड को आजाद करते हुए बोलीं- ठीक है! लगता है अपने अनाड़ी बेटे को मुझे ही सब कुछ सिखाना पड़ेगा.

चलो! अपनी लुंगी निकल कर पूरे नंगे हो जाओ. मैंने अपनी लुंगी खोल कर साईड में फेंक दिया. मैं अपने तने हुए लण्ड को लेकर नंगा माँ के सामने खड़ा था.

माँ अपनी रसीली होंठों को अपने दांतों मे दबा कर देखती रही और अपने पेटीकोट का नाड़ा खींच कर ढीला कर दिया. तुम भी इसे उतार कर नंगी हो जाओ, कहते हुए मैंने उनका पेटीकोट को खींचा.

माँ ने अपने चूतड़ ऊपर कर दिए जिससे कि, पेटीकोट उनकी टांगो उतर कर अलग हो गया. अब वो पूरी तरह नंगी हो कर मेरे सामने चित पड़ी हुई थीं.

माँ के नंगे जिस्म और होंठों के चुम्बन का मजा

उन्होंने अपनी टांगो को फ़ैला दिया और मुझे रेशमी झांटो के जंगल के बीच छुपी हुई उनकी रसीली गुलाबी चूत का नजारा देखने को मिला.

नाईट लेम्प की हल्की रोशनी मे चमकते हुए नंगे जिस्म को देखकर मैं उत्तेजित हो गया और मेरा लण्ड मारे खुशी के झूमने लगा.

माँ ने अब मुझसे अपने ऊपर चढने को कहा. मैं तुरंत उनके ऊपर लेट गया और उनकी चूची को दबाते हुए उनके रसीले होंठ चूसने लगा. माँ ने भी मुझे कस कर अपने आलिंगन मे कस कर जकड़ लिया और चुम्मा का जवाब देते हुए मेरे मुँह मे अपनी जीभ डाल दी .

हाय! क्या स्वादिष्ट और रसीली जीभ थी! मैं भी उनकी जीभ को जोर शोर से चूसने लगा. हमारा चुम्मा पहले प्यार के साथ पूरे जोश के साथ किया जा रहा था.

कुछ देर तक तो हम ऐसे ही चिपके रहे, फिर मैं अपने होंठ उनकी नाजुक गालों पर रगड़ रगड़ कर चूमने लगा. फिर माँ ने मेरी पीठ पर से हाथ ऊपर ला कर मेरा सर पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ़ कर दिया. मैं अपने होंठ उनके होंठों से उनकी ठुड्डी पर लाया और कंधों को चूमता हुआ चूची पर पहुँचा.

मैं एक बार फिर से उनकी चूची को मसलता हुआ और खेलता हुआ काटने और चूसने लगा.

उन्होंने अपने बदन के निचले हिस्से को मेरे बदन के नीचे से निकाल लिया और हमारी टांगे एक-दूसरे से दूर हो गईं.

अपनी दाईं हाथ से वो मेरा लण्ड पकड़ कर उसे मुठ्ठी मे बाँध कर सहलाने लगी और, अपनी बाईं हाथ से मेरा दाहिना हाथ पकड़ कर अपनी टांगो के बीच ले गईं.

माँ की चूत में उंगली का मजा

जैसे ही मेरा हाथ उनकी चूत पर पहुँचा उन्होंने अपनी चूत के दाने को ऊपर से रगड़ दिया.

समझदार को इशारा काफ़ी था. मैं उनके चूची को चूसता हुआ उनकी चूत को रगड़ने लगा.

बेटा अपनी उंगली अन्दर डालो ना! कहते हुए, माँ ने मेरा उंगली अपनी चूत के मुँह पर दबा दिया. मैंने अपनी उंगली उनकी चूत के दरार मे घुसा दिया और वो पूरी तरह अन्दर चली गई.

जैसे जैसे मैंने, उनकी चूत के अन्दर उंगली अन्दर बाहर कर रहा था मेरा मज़ा बढता गया!

जैसे ही मेरा उंगली उनके चूत के दाने से टकराई, उन्होंने जोर से सिसकारी लेकर अपनी जाँघों को कस कर बंद कर लिया और चूतड़ उठा उठा कर मेरे हाथ को चोदने लगी.

माँ ने खुद लण्ड को चूत में डाला

कुछ देर बाद उनकी चूत से पानी बह रहा था.

थोड़ी देर तक ऐसे ही मजे लेने के बाद मैंने अपनी उंगली उनकी चूत से बाहर निकल लिया और सीधा हो कर उनके ऊपर लेट गया. उन्होंने अपनी टांगे फ़ैला दीं और मेरे फ़ड़फ़ड़ाते हुए लण्ड को पकड़ कर सुपाड़ा चूत के मुहाने पर रख लिया. उनकी झांटो का स्पर्श मुझे पागल बना रहा था, फिर माँ ने कहा, अब अपना लौड़ा मेरी बुर मे घुसाओ, प्यार से घुसेड़ना नहीं तो मुझे दर्द होगा, अह्!!

मैं नौसिखिया था, इसलिए शुरु शुरु में मुझे अपना लण्ड उनकी टाईट चूत में घुसाने मे काफ़ी परेशानी हुईं.

माँ की नौसिखिया चुदाई

मैं जब जोर लगा कर लण्ड अन्दर डालना चाहा तो उन्हें दर्द भी हुआ. लेकिन पहले से उंगली से चुदवा कर उनकी चूत काफ़ी गीली हो गई थी.

फिर माँ ने अपने हाथ से लण्ड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा एक ही धक्के मे सुपाड़ा अन्दर चला गया.

इससे पहले कि माँ संभलती, मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लण्ड मक्खन जैसी चूत की जन्नत मे दाखिल हो गया.

माँ चिल्लाईं- उई! ईई! माआ! उहुहुह्! ओह! बेटा, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नही, हाय! बड़ा जालिम है तुम्हारा लण्ड, मार ही डाला मुझे तुमने.
मैंने सोचा लगता है माँ को काफ़ी दर्द हो रहा है.

पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लण्ड उनके बुर मे घुसा था. मैं अपना लण्ड उनकी चूत मे घुसा कर चुपचाप पड़ा था.

माँ की चूत फ़ड़ फ़ड़ फड़क रही थी और, अन्दर ही अन्दर मेरे लौड़े को मसल रही थी, पकड़ रही थी.

उनकी उठी उठी चूचियाँ काफ़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी.

मैंने हाथ बढ़ा कर दोनों चूची को पकड़ लिया और मुँह मे लेकर चूसने लगा.

थोड़ी देर बाद माँ को कुछ राहत मिली और उन्होंने कमर हिलानी शुरु कर दी और मुझसे बोली- बेटा शुरु करो, चोदो मुझे!

ले लो मज़ा जवानी का मेरे रज्ज्जा! और अपनी गाण्ड हिला हिला कर चुदाने लगीं.

मैं थोड़ा अनाड़ी था. समझ नहीं पाया कि कैसे शुरु करु?

पहले अपनी कमर ऊपर किया तो लण्ड चूत से बाहर आ गया.

माँ ने चुदाई का गुरु ज्ञान दिया

फिर जब नीचे किया तो ठीक निशाने पर नहीं बैठा और माँ की चूत को रगड़ता हुआ नीचे फिसल कर गाण्ड मे जाकर फँस गया.

मैंने दो तीन धक्के लगाए पर लण्ड चूत मे वापस जाने के बदले फिसल कर गाण्ड मे चला जाता.

माँ से रहा नहीं गया और तिलमिला कर ताना देती हुई बोलीं- अनाड़ी से चुदवाना चूत का सत्यानाश! करवाना होता है.

अरे मेरे भोले दीनू बेटे जरा ठीक से निशाना लगा कर अन्दर डालो, नहीं तो चूत के ऊपर लौड़ा रगड़ रगड़ कर झड़ जाऊँगी और, फिर मेरी गाण्ड बिना बात ही चुद जाएगी!

मैं बोला- अपने इस अनाड़ी बेटे को कुछ तो सिखाओ, जिन्दगी भर तुम्हें अपना गुरु मानूँगा और जब चाहोगी मेरे लण्ड की दक्षिणा दूँगा!

माँ लम्बी साँस लेते हुए बोली- हाँ बेटे, मुझे ही कुछ करना होगा नहीं तो मैं बिना चुदे ही चुद जाऊँगी और मेरा हाथ अपनी चूची पर से हटाया और मेरे लण्ड पर रखती हुई बोलीं- इसे पकड़ कर मेरी चूत के मुँह पर रखो और लगाओ धक्का जोर से.’

मैंने वैसे ही किया और मेरा लण्ड उनकी चूत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अन्दर चला गया. फिर वो बोली- अब लण्ड को बाहर निकालो, लेकिन पूरा नही.

सुपाड़ा अन्दर ही रहने देना और फिर दुबारा पूरा लण्ड अन्दर पेल देना, बस इसी तरह से पेलते रहो!

मैंने वैसे ही करना शुरु किया और मेरा लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत मे अन्दर-बाहर होने लगा. फिर माँ ने स्पीड बढ़ा कर करने को कहा.

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लण्ड अन्दर-बाहर करने लगा.

माँ को पूरी मस्ती आ रही थीं और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी. लेकिन ज्यादा स्पीड होने से बार बार मेरा लण्ड बाहर निकल जाता. इससे चुदाई का सिलसिला टूट जाता.

आखिर माँ से रहा नहीं गया, और करवट ले कर मुझे अपने ऊपर से उतार दिया और मुझको चित लेटा कर मेरे ऊपर चढ गईं.

अपनी जाँघों को फ़ैला कर बगल कर के अपने गद्देदार चूतड़ रखकर बैठ गईं.

उनकी चूत मेरे लण्ड पर थीं और हाथ मेरी कमर को पकड़े हुए थीं और बोलीं- मैं दिखाती हूँ कि, कैसे चोदते है? और मेरे ऊपर लेट कर धक्का लगया.

मेरा लण्ड घप से चूत के अन्दर दाखिल हो गया.

माँ ने अपनी रसीली चूची मेरी चूचियों पर रगड़ते हुए अपने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिया और मेरे मुंह मे जीभ डाल दिया. फिर उन्होंने मज़े से कमर हिला हिला कर शॉट लगाना शुरु किया.

बड़े कस कस कर जोर से शॉट लगा रही थीं. चूत मेरे लण्ड को अपने मे समाये हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थीं. मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत में पहुच गया हूँ!

अब पोजिशन उलटी हो गई थीं. माँ तो मानो मर्द थीं जो कि, अपनी माशूका को कस कस कर चोद रहा था! जैसे जैसे माँ की मस्ती बढ़ रही थीं उनके शॉट भी तेज़ होते जा रहे थे.

अब वो मेरे ऊपर मेरे कंधो को पकड़ कर घुटने के बल बैठ गईं, और जोर जोर से कमर चूतड़ों को हिला कर लण्ड को तेज़ी से अन्दर-बाहर लेने लगीं.

उनका सारा बदन हिल रहा था और साँसें तेज़ तेज़ चल रही थीं. माँ की चूचियाँ तेजी से ऊपर नीचे हो रही थीं.

मुझसे रहा नहीं गया, और हाथ बढा कर दोनों चूची को पकड़ लिया और जोर जोर से मसलने लगा.

माँ एक मंजे हुए खिलाड़ी की तरह कमान अपने हाथों मे लिए हुए, कस कस कर चोद रही थीं. जैसे जैसे वो झड़ने के करीब आ रही थीं उनकी रफ़तार बढती ही जा रही थीं.

कमरे में फच फच की आवाज गूँज रही थीं.

चुदाई का खेल का अनोखा आनन्द

जब उनकी साँस फ़ूल गईं तो खुद नीचे आकर मुझे अपने ऊपर खींच लिया, और टांगो को फ़ैला कर ऊपर उठा लिया और बोली- मैं थक गई मेरे रज्ज्जा, अब तुम मोरचा सम्भालो!

मैं झट उनकी जाँघों के बीच बैठ गया और, निशाना लगा कर झटके से लण्ड को चूत के अन्दर डाल दिया और उनके ऊपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा.

माँ ने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जकड़ लिया, और जोर जोर से चूतड़ उठा उठा कर चुदाईं मे साथ देने लगी.

मैं भी अब उतना अनाड़ी नहीं रहा और उनकी चूची को मसलते हुए दनादन शॉट लगा रहा था. पूरा कमरा हमारी चुदाई की आवाज से गूँज उठा था.

माँ अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुद रही थीं और बोली जा रही थीं- अह्! आह! हउन! ऊओ! ऊऊह! हाहा! आ मेरे रजजा! मर गई री! लल्ला चूओद रे चूओद!

उईई मीई माआ! फाआ गाईंई! रीईई आज तो मेरी चूत!

मेरा तो दम निकाल दिया तूने आज. बड़ा जाआलीएम हऐरे तूऊमहारा लौरा!

मैं भी बोल रहा था- लेईए मेरीई रानीई, लेई लेईए मेरा लौरा अपनीई चूत मेंईए!!

बड़ाड़ा तड़पायाया है तुनेई मुझीई! लीईए लीई, लेईए मेरीई रानीई यह लण्ड अब्ब तेराआ हीई है! अह्ह! उहह्! क्या जन्नत का मज़ाआ सिखयाआ तुनेईए!

मैं तो आज से तेरा गुलाम हो गया माँ!

माँ गांड उछाल उछाल कर मेरा लण्ड अपने चूत मे ले रही थीं और, मैं भी पूरे जोश के साथ उनकी चूचियों को मसल मसल कर अपने गहरे दोस्त की माँ की गहरी चुदाई कर रहा था.

माँ मुझको ललकार कर कहा, लगाओ शॉट मेरे राजा!

मैं जवाब देता,यह ले मेरी रानी! ले ले अपनी चूत मे.

जरा और जोर से सटकाओ, अपना लण्ड मेरी चूत मे मेरे राजा!

यह ले मेरी रानी! यह लण्ड तो तेरे भोसड़े के लिए ही है.

देखो रज्जा! मेरी चूत तो तेरे लण्ड की दीवानी हो गई है, और जोर से और जोर से आई! मेरे रज्जजा!

मैं गई रेई! कहते हुए माँ ने मुझको कस कर अपनी बाँहों मे जकड़ लिया और, उनकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया.

पहली चुदाई की थकान का मजा

अब तक मेरा भी लण्ड पानी छोड़ने वाला था और मैं बोला- मैं भी आयाया! मेरी जाआन! और मेंने भी अपना लण्ड का पानी छोड़ दिया और मैं हाँफ़ते हुए उनकी चूची पर सिर रख कर कस के लिपट कर लेट गया.

यह मेरी पहली चुदाई थीं. इसलिए, मुझे काफ़ी थकान महसूस हो रही थीं. मैं माँ के सीने पर सर रख कर सो गया.

वो भी एक हाथ से मेरे सिर को धीरे धीरे से सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरी पीठ सहला रही थीं.
कहानी जारी रहेगी.
कहानी का अगला भाग :

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