किस्मत से मिली चुदाई की जॉब

(Kismat Se Mili Chudai Ki Job)

2019-03-18

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को खड़े लंड से सलाम. दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है, कोई ग़लती हो तो सॉरी.

पहले मैं आप सभी को अपने बारे में बता दूं. मेरा नाम एलेक्स है. वैसे तो मैं भरतपुर का रहने वाला हूँ. पर अभी गुडगांव में जॉब करता हूँ. मैं शुरू से ही चाहता था कि मैं सेक्स से और चुदाई से अपना पैसा कमाऊं. बीस साल तक तो मेरा सपना, सपना ही रहा. फिर मेरा सपना पूरा हुआ.

ग्रेजुयेशन करने के बाद मैंने काम ढूँढना शुरू किया जिससे देहली, नॉएडा के बहुत चक्कर लगाए पर सफलता ना मिली.

पर कहते हैं ना, भगवान जो भी करता है, अच्छे के लिए ही करता है. मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ. कई चक्कर लगाने के बाद भी जब काम ना मिला, तो एक दिन मैं उदास हो कर यूं ही फरीदाबाद स्टेशन के पास बैठा था. मेरे सारे पैसे खत्म हो गए थे.

तभी एक औरत मेरे पास आई और उसने मुझे टोका- एक्सक्यूज़ मी!
दोस्तो, आपको पता होगा जब इंसान टेंशन में होता है, तो वो थोड़ा चिड़चिड़ा हो जाता है. उस वक्त मेरा भी वही हाल था. जैसे ही उस औरत ने कहा ‘एक्सक्यूस मी …’ मैं चिल्लाकर उससे बोला- क्या है?
वो औरत थोड़ा डर गयी और वहां से चली गयी.

मुझे बाद में रियलाइज़ हुआ कि मैंने ये क्या किया. मैं उस औरत को खोजता हुआ उसके पास गया और उससे सॉरी बोलने लगा.
वो मुझे अजीब से नज़रों से देखने लगी. फिर मैंने उसे बताया कि मैं परेशान था इसलिए आपसे ऐसा बोल दिया.
मैंने उसे फिर से सॉरी बोला और पूछा- बताओ क्या कर सकता हूँ.
उसने कहा- मुझे एक कॉल करना है.. अगर आप अपना फोन दे सकते हो तो.
मैं- जी बिल्कुल.. आप मेरा फोन यूज कर सकती हैं.

उसने मुझे थैंक्स बोला और मेरा फोन ले कर एक नंबर पर कॉल लगाया.
शायद उसका कॉल नहीं मिला या किसी ने उठाया नहीं. क्योंकि उसका चेहरा उदास था. उसने जल्दी ही मेरा फोन दे दिया.
अब उसने पूछा- आप परेशान क्यों हो?
मैं- कोई जॉब नहीं मिल रही है और मुझे जॉब की सख्त ज़रूरत है क्योंकि मेरे पास पैसे भी नहीं बचे हैं.
वो औरत- कोई बात नहीं जल्दी ही जॉब मिल जाएगी.

मैंने थोड़ा हंस कर उसे थैंक्स बोला, उसने भी मुस्करा कर वेलकम कहा.

अब दोस्तों मैंने थोड़ा नॉर्मल हो कर उसको देखा. क्या पटाखा माल थी यार. क्या बताऊं, थोड़ी देर के लिए तो मैं टेंशन भूल ही गया. फिर उसी की आवाज़ ने मुझे जगाया.
वो बोली- कहां खो गए?
मैं- आप में …

ये मैंने कह तो दिया, लेकिन एक ही पल मुझे झटका लगा कि ये मैंने क्या किया.
उसने मुस्कुरा कर कहा- ज़्यादा ना खो जाओ, वरना निकलना मुश्किल हो जाएगा.
उसकी ये बात सुन कर मुझे थोड़ा रिलॅक्स मिला- तो निकलना कौन चाहता है. मैं तो तैयार हूँ. मुझे कोई प्राब्लम नहीं है.

उसके साथ इस तरह ही हमारी बात शुरू हुई. अब मैं उस औरत के बारे में बता दूं. उसका नाम अवन्तिका (बदला हुआ नाम) था. मैंने उसका निक नाम अवनी रखा. मैं लड़कियों को एक निक नाम देता हूँ, तो मैंने उसे भी दे दिया. उसकी उम्र 23 साल थी. वो एक बड़े ही गदराए हुए हुस्न की मलिका थी. उसका 36-26-38 का बड़ा ही कामुक फिगर था, जो मुझे उसे चोदने पर पता चला. उसका हज़्बेंड एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था. वो आनन्द विहार की रहने वाली थी.

हमारी बातों का सिलसिला यूं ही चल पड़ा. मैं उसकी आंखों में देख कर बात कर रहा था. दोस्तो, क्या बताऊं उसको बात करते देख मेरे लिट्ल उस्ताद (लंड) ने हरकत चालू कर दी. मैं सोच रहा था कि ये चोदने को मिल जाए, तो जिंदगी बन जाए.

शायद वो मेरी इस हालत को पहचान गयी क्योंकि वो मेरे पैंट को देख रही थी. मैं उसके रसीले होंठों और तने हुए मम्मों में इतना खोया हुआ था कि पता ही नहीं कब उसने ये सब नोटिस कर लिया था.
अवनी- क्या हुआ कहां चले गए?
मैं- अभी तो यहीं हूँ, आप कहें, तो चलें कहीं?
वो थोड़ा मुस्काराई और कहा- अब टेंशन कहां गयी जॉब की.
मैं- जब आप जैसी कोई साथ हो, तो टेंशन की क्या औकात कि वो करीब भी आ जाए.
अवनी- अच्छा जी.
मैं- हां जी कोई शक.
अवनी- शक तो है.
मैं- क्या?
अवनी- आप की जीएफ़ भी तो मेरे जैसी होगी.
मैं- पहले तो जीएफ है ही नहीं. पता नहीं कब मिलेगी.
अवनी- तो बना लो किसी को.
मैं- तुम ही बन जाओ.
अवनी- नहीं, मैं नहीं बन सकती.
मैं- जब तुम ही मना कर रही हो, तो और कोई कैसे बन जाएगी?
अवनी- चलो छोड़ो बताओ, कैसा जॉब चाहिए आपको?
मैं- जिसमें प्यार और पैसा दोनों हों.
अवनी- ठीक है … मैं अपने हज़्बेंड से बात करती हूँ. आप अपना नंबर दो.

मैंने उसके मुँह से हज़्बेंड का नाम सुना तो हैरान रह गया. खैर मैंने उसको नंबर दे दिया और वो बाय कह के चली गयी.
मुझे लगा सारा काम बिगड़ गया. लेकिन मुझे क्या मालूम था कि काम तो अब बना था.

मैं कुछ देर तक यूं ही बैठा रहा. मुझे कुछ भूख लग आई थी, तो मैं स्टेशन पर बनी कैंटीन पर जाकर उससे एक समोसा लेकर खाने लगा. मेरा बैठ कर खाने का मन हुआ तो मैंने सोचा कि कोई अखबार मिल जाए, तो बिछा कर बैठ कर खा लूँ. उधर एक रद्दी पेपर पड़ा था, मैंने दुकानदार से अखबार लेने की बात कही, तो उसने मुझे ले लेने की इजाजत दे दी.

मैंने अखबार नीचे रखा और बैठ कर समोसा का मजा लेने लगा. कुछ मिनट बाद मैंने उठ कर अखबार डस्टबिन में डालने के लिए उठाया और उसको फेंकने से पहले यूं ही देखने लगा. मैं फ़ालतू तो था ही, सो टाइम पास करने के लिए मुझे अखबार पढ़ना ठीक लग रहा था. इस वक्त पेट में समोसा भी था, तो मैं मजे से अखबार पढ़ने लगा. तभी एक विज्ञापन पर में निगाह गई. जिसमें कार ड्राईवर की नौकरी जगह खाली थी.

मुझे गाड़ी चलाने का बहुत अधिक तजुर्बा तो नहीं था, लेकिन मैं कोई सी भी गाड़ी चला सकता था. मैंने सोचा जब तक कोई काम नहीं है तब तक ड्राईवर का काम ही कर लेता हूँ.

मैंने फोन लगाया तो उधर से एक महिला की आवाज आई- यस प्लीज़?
मैंने एड का हवाला दिया तो उसने कहा कि आप कितनी देर में आ सकते हो?
मैंने कहा- एक घंटे में.
वो बोली- अभी किधर हो?
मैंने कहा- फरीदाबाद स्टेशन पर हूँ.
वो बोली- तुम उधर ही रुको, मैं दस मिनट में उधर से ही निकलने वाली हूँ. तुम स्टेशन के बाहर मिलो. मैं आकर इसी नम्बर पर फोन करूँगी, तो तुम आ जाना.

दस बारह मिनट बाद मेरे नम्बर पर कॉल आई तो मैंने झट से फोन उठा लिया. उधर से उसकी आवाज आई- बाहर काले रंग की होंडा सिटी खड़ी है. उसके नजदीक आ जाओ.
मैंने देखा कि सामने एक चमचमाती हुई काली होंडा सिटी सरकती हुई आ रही थी.

मैं नजदीक पहुंचा, तो एक मैडम ने अपना मुँह एक दुपट्टे से ढक रखा था. उसने कहा- अन्दर बैठो.
मैंने पीछे का गेट खोला और बैठ गया. गाड़ी आगे को चल दी.
कुछ दूर आगे जाके उसने गाड़ी रोक दी और बोली- चलो तुम कार चलाओ.

मैं ऊपर वाले का नाम लेता हुआ आगे ड्राईवर की सीट पर आ गया. वो पीछे बैठ गई. मैंने उसका चेहरा अब तक नहीं देखा था.
वो पीछे से बताती गई और मैं गाड़ी चलाता रहा. मैंने काफी सधे हुए हाथ से गाड़ी चलाई थी, जिससे वो शायद खुश थी.

कुछ देर बाद उसने के बंगले के बाहर गाड़ी रोकने का इशारा किया. एक मिनट हुआ होगा कि गेट खुल गया, शायद उसने किसी को कॉल किया था.
मैंने गाड़ी अन्दर कर दी.

अन्दर पार्क करने के बाद वो कार से उतरी और मुझसे बोली- कार इधर ही खड़ी रहने दो और तुम अन्दर आओ. मुझे तुमसे बात करनी है.
मुझे लगा कि पेमेंट की बात करेगी. मैं अन्दर गया तो उसने मुझे लॉबी में बैठने का कहा और दो मिनट बाद घंटी बजने पर अन्दर आने का कहा. मैं उधर ही बैठ गया. मेरी इस वक्त जरूरत थी, सो मेरी सोच किसी भी तरह से सेक्स की तरफ जा ही नहीं रही थी.

दो मिनट बाद एक बड़ी प्यारी से टयून बजी, तो मैं उठ कर अन्दर चला गया.
अन्दर क्या शानदार लिविंगरूम था.. देख कर तबियत खुश हो गई.

एक पल बाद उसी की आवाज आई- वेलकम टू माय होम.

मैं चौंका और आवाज की तरफ देखा तो भौंचक्का रह गया. ये तो वही मैडम थी, जिसको मैंने स्टेशन पर अपने फोन से बात करने दी थी.
मेरा मुँह खुला खुला रह गया.

वो बोली- मैं आज किस्मत को मान गई, तुमसे मेरा जोड़ होना ही था, इसलिए तुमने मुझे फोन किया. मेरे पास तुम्हारा नम्बर सेव था, तो पहले तो मैं चौंक गई थी कि तुमको मेरा नम्बर किधर से मिला. फिर तुमने एड का हवाला दिया, तब मुझे तुम्हारी किस्मत पर बड़ा रश्क हुआ और मैंने तुमको खुद लेने के लिए बोल दिया.

मैंने अब उसकी तरफ ध्यान दिया, तो वो एक बड़ी सेक्सी सी टी-शर्ट और टाईट कैपरी पहने हुए थी. उसकी टी-शर्ट से उसके मम्मे और भी ज्यादा उभर रहे थे.
वो बोली- अब क्या खा ही जाओगे?
मैं चुप था.
वो बोली- कुछ बोलोगे नहीं?
मैंने कहा- मुझे जॉब मिली है और आप मेरी मालकिन हैं.
वो बोली- अभी मिली किधर है?
मैं अचकचाया और उसकी तरफ कातर भाव से देखा.

उसने एक मुक्त सी हंसी बिखेरी और बोली- पहले टेस्ट होगा, फिर काम पक्का होगा.
मैंने उल्लुओं सी पलकें झपकाईं.
वो बोली- चलो अन्दर आओ.

वो मुड़कर पीछे को चल दी. मैं उसके पीछे पीछे चल दिया. दस कदम बाद एक बड़े शानदार बेडरूम में मुझे दाखिला मिला. उसने दरवाजा बंद करने का आदेश दिया और अपनी टी-शर्ट उतार दी.

मैं दरवाजा बंद करके घूमा ही था कि मेरा लंड खड़ा हो गया.
वो आँख दबाते हुए बोली- चलो, बिस्तर पर गाड़ी चला कर दिखाओ.

मैंने एक पल की भी देर न की और उस पर झपट पड़ा. दस मिनट की लिपटा चिपटी के बाद वो मुझे अपने बाथरूम में ले गयी, जिधर हम दोनों नंगे थे. शावर के नीचे हमारा खेल शुरू हुआ और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया. मैंने भी पानी से उसकी चूत को साफ़ किया और बड़े से बाथटब में उसको लिटा कर उसकी चूत को चाटना चालू कर दिया.

दस मिनट बाद हम दोनों कमरे में बिस्तर पर थे. उसने कहा- पहला शॉट जल्दी मार दो, बाद में पूरा मजा करेंगे.

मैंने अपने मोटा लंड उसकी साफ़ चूत में पेला तो उसकी आह निकल गई. बीस मिनट तक धकापेल चुदाई हुई और वो मेरी बांहों में दो बार सिमट कर निढाल हुई.

इसके बाद मेरी नौकरी पक्की हो गई और उसकी सहेलियों के लिए मैं एक आइटम बन गया. उसके पति के ऑफिस में मुझे मेरी एजुकेशन के मुताबिक़ जॉब मिल गई. लेकिन पति महोदय तो ज्यादातर देश के बाहर ही रहते थे, तो मेरा लंड मैडम की गांड चूत की सेवा में ही मस्त रहता था.

आज भी मेरी जॉब चालू है. मेरी इस सेक्स स्टोरी पर कमेन्ट जरूर करें, पर कोई नम्बर आदि मांगने की कोशिश न करें. कैसी लगी कहानी बताना.
मेरी ईमेल आईडी है.
[email protected]
धन्यवाद.

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