अधूरी प्यास की तड़प-1

(Adhuri Pyas Ki Tadap- Part 1)

दोस्तो… मेरी पिछली कहानियाँ
मस्ती की रात
अदल बदल कर मस्ती
और
सतपुड़ा हिल्स की मस्ती
का अपने आनंद लिया.

आज की कहानी का विषय हट के है.

चुनावों के बाद तबादलों का दौर चला. बैंक मेनेजर बन कर राजन की नियुक्ति आगरा में हुई थी.

राजन लखनऊ से आया था. वहां उसका अपना दोस्तों का ग्रुप, पत्नी शोभा, जो एक स्कूल में टीचर है, और एक 5 वर्षीय बेटा था.

राजन और शोभा की सेक्स लाइफ बहुत मस्त थी. पर नौकरी की मजबूरी … उन दोनों के बीच ये तय हुआ कि हर 15 दिनों में दो रात के लिए राजन लखनऊ आया करेगा.

पैसे की कोई कमी नहीं थी. शोभा की सरकारी नौकरी थी. लखनऊ में अपना पुश्तैनी मकान था. इसके अलावा किराये की आमदनी भी थी.

जब पैसे की कमी न हो और बीवी जवान और सेक्सी हो, तो मर्द बहुत मजा देते हैं.
कहावत है ‘पेट भर भोजन और रात को जोगन’ और चाहिए क्या दुनिया में.

तो अब बात पर आते हैं कि हर ट्रान्सफर वाले व्यक्ति के सामने जो समस्या आती है वो होती है मकान की.
राजन ने अपने स्टाफ और क्लाइंट्स से कोई अच्छा सा छोटा मकान दिलाने को कहा. एक हफ्ता तो वो होटल में रहा, फ्राइडे को रात को लखनऊ चला गया, क्योंकि सेकंड सैटरडे को बैंक बंद था.
शोभा के लिए उसने कढ़ाई की जूतियाँ और बहुत सेक्सी नाईट ड्रेस लीं और बेटे के लिए भी ड्रेस्सेस लीं. लखनऊ तो वो रात को ही पहुँच गया.

रात को बेटा भी उससे एक हफ्ते बाद मिल रहा था तो शोभा और राजन को सेक्स में ज्यादा उठा पटक का मौका नहीं मिल पाया. वरना राजन तो चूत चूसने और मम्मे चूसने में इतना माहिर था कि चूत चूस चूसकर ही शोभा का पानी निकाल देता.

इन 8 सालों में ही शोभा का कप साइज़ काफी बढ़ गया था. शादी के ब्लाउज तो उसे आते ही नहीं थे.

राजन ने शोभा से शनिवार का ऑफ लेने को पहले ही कह दिया था. बेटा डे बोर्डिंग स्कूल में था तो शाम को वापिस आता था. अब दिन भर राजन और शोभा को सिर्फ चुदाई के अलावा कोई और काम नहीं था. दोनों ही हफ्ते की कसर निकालना चाह रहे थे.

दिन भर दो-तीन राउंड लगाने के बाद दोनों ही थक कर नंगे ही सो गए और उनकी आँख शाम को बेटे की वैन की डोरबेल बजाने से खुली.
शोभा ने भागकर गाउन पहना और गेट खोला. राजन वाशरूम में घुस गया और कपड़े पहन कर बाहर आया.

बाहर बेटे ने जिद पकड़ ली कि रात को मूवी देखेंगे और डिनर बाहर ही करेंगे.

सब फटाफट तैयार हुए और रात देर मूवी देख डिनर लेकर लौटे. सेक्स का कोटा तो दिन में पूरा हो चुका था, फिर भी राजन ने कोशिश की कि बेटा जल्दी सो जाए, पर उसे तो पूरे हफ्ते की बात पापा से करनी थी तो वो उनके बीच ही सोया.

राजन की आँख रात दो बजे खुली, उसने धीरे से शोभा को उठाया और ड्राइंग रूम में ले जाकर सोफे पर शुरू हो गए. राजन सीधा अपनी जीभ शोभा की चूत में ले गया. अब शोभा भी चुदासी हो चली थी, उसने राजन का लंड पकड़ के खूब चूसा और खड़े खड़े ही सोफे पर एक टांग रख के राजन का लंड अपनी चूत में कर लिया.

थोड़े धक्कों के बाद राजन ने शोभा को घोड़ी बनाया और पीछे से अपना मूसल उसकी चूत में देकर धक्के शुरू कर दिए. पांच मिनट की धक्का परेड के बाद राजन ने अपना माल शोभा की चूत में ही निकाल दिया. अब दोनों तृप्त हो गए थे.

कपड़े पहन वापिस बेड पर आ गए दोनों और होंठ से होंठ मिला कर सो गए.
सुबह उठ कर बेटे का पहला प्रश्न यही था कि मैं तो बीच में सो रहा था अब किनारे कैसे आ गया.

अगले दिन राजन रात लेट में वापिस आगरा चला गया.
तो यह थी कहानी राजन और शोभा की सेक्स लाइफ की.

बैंक में उसके केशियर ने बताया कि उसका भी ट्रान्सफर मेरठ हो गया है और उसे जल्दी ही जाना है.
केशियर का नाम प्रकाश था. प्रकाश राजन से तीन चार साल बड़ा ही था. उसने राजन से कहा- सर अगर आप चाहें तो मेरा मकान देख लें, उसमें वन रूम सेट खाली है और बहुत अच्छे से मेन्टेन है.
असल में प्रकाश की बीवी भी इन्शयोरेन्स कम्पनी में थी और वो नहीं जाना चाहती थी प्रकाश के साथ.

राजन ने शाम को घर देखा. उसे बहुत पसंद आया. हालांकि मेन गेट तो एक ही था, पर अंदर बरामदे से प्रकाश का पोर्शन और राजन का पोर्शन अलग अलग था. अंदर से एक दरवाजे से दोनों पोर्शन आंगन में खुलते थे.

प्रकाश की बीवी ममता बहुत हंसमुख और जिंदादिल और उम्र में प्रकाश से चार पांच साल छोटी थी. बल्कि उसके सामने प्रकाश उम्रदराज और लल्लू सा था. राजन को बैंक के सहकर्मियों ने बताया था कि प्रकाश और उसकी बीवी का अक्सर झगड़ा रहता है और इसीलिए प्रकाश ने अपना ट्रान्सफर कराया है.

उनके एक ही बच्चा है, वो भी अपने दादा दादी के पास बिजनौर रहता है. ममता स्वछन्द है और मस्त है पर प्रकाश अपने काम से काम रखता है और रात को पेग लगा के सो जाता है.

राजन का पोर्शन पूरा फर्निशड था, इसलिए राजन को बहुत सहूलियत हो गयी. लंच व डिनर के लिए एक टिफिन कम्पनी को बोल दिया और ब्रेकफास्ट के लिए छोटा सा किचन था. ए सी, फ्रिज सब कुछ था. बाहर पार्किंग भी थी, जहाँ गाड़ी खड़ी हो सके. राजन शिफ्ट हो गया.

प्रकाश को अगले दिन जाना था. रात का खाना ममता ने ही खिलाया बोली- कल से बाहर खा लीजियेगा.
ममता खाना बहुत स्वादिष्ट बनाती थी पर राजन ने देखा कि प्रकाश ने बहुत कम खाना खाया और चुप ही रहा.
राजन ने पूछा तो बोला- तबियत ठीक नहीं है.
इस पर ममता तुनक कर बोली- आज आपके सामने पीने को नहीं मिली है, इसलिए मूड ठीक नहीं है.
प्रकाश बोला- नहीं, सर में दर्द है.
तो राजन बोला- आप जाकर सो जाओ.
प्रकाश उठ कर चला भी गया.

राजन ने ममता से कहा- आप खाना खा लो.
ममता भुनभुनाते हुए खाना खाने बैठी तो राजन ने उसे समझाया- खाना खुश होकर खाना चाहिए.

पता नहीं राजन की बात का ममता पर क्या असर हुआ, वो मुस्कुरा दी और खाना ख़त्म कर लिया.

राजन अपने रूम में चला गया.

थोड़ी देर बाद उसे प्रकाश की बहकी बहकी आवाज में गाली की आवाज आयी- साली रंडी, मेरा मजाक बनाती है. अपने पैसों से पीता हूँ कौन सा तेरे बाप के पैसों की पीता हूँ.
ममता धीमी आवाज में उसे समझा रही थी- शांत हो जाओ और सो जाओ. मेनेजर साहब सुनेंगे तो उन्हें कैसा लगेगा.

इसके बाद शायद प्रकाश ने सेक्स करना चाहा होगा पर उससे कुछ नहीं हुआ तो ममता बोली- होता है नहीं … तो मेरा मूड क्यों खराब करते हो.
असल में ममता को भी आदत नहीं थी बीच का दरवाजा बंद करने की और राजन के रूम का दरवाजा भी खुला था.

राजन बाहर आंगन में घूमते हुए सिगरेट पी रहा था इसलिए राजन को सब सुनाई दिया.

अगले दिन राजन सुबह योग कर रहा था तभी प्रकाश उससे मिलने आया, वो जा रहा था.
राजन ने उसे आश्वस्त किया कि वो ममता का ध्यान रखेगा.
प्रकाश चला गया.

राजन ने कपड़े पहने और किचन में चाय बनाने चला गया. उसे क्या सूझी, उसने दो चाय बनायीं और ट्रे में रखकर बाहर बरामदे में आकर बैठ गया और ममता को आवाज दी- भाभी जी, आइये चाय पी लीजिये.
अंदर से ममता नाइटी में आई.

पहले तो उसका चेहरा तना हुआ था, बाल भी बिखरे से थे. उसने राजन को मोर्निंग विश किया और कहा- भाई साहब, चाय तो मैं बना देती! आपने क्यों तकलीफ करी?
राजन ने महसूस किया कि वो तनाव में है.

उससे राजन ने उससे कहा- चलिए एक दिन मैं बनाया करूँगा, एक दिन आप बनाइएगा.
पर चाय पीने से पहले आप वापिस जाइए और मुंह धोकर मुस्कुराती हुई आइये. मैं चाय गर्म करके लाता हूँ.

राजन बिना उसका जवाब का इन्तजार किये चाय वापिस किचन में ले गया. उसे मालूम था कि ममता को पांच दस मिनट लगेंगे.

राजन ने इस बीच शेव कर ली और फिर चाय गर्म करके बाहर ले आया.

उसकी आहट सुन कर ममता भी आ गयी. अब वो मुस्कुरा रही थी और उसका चेहरा भी खिल गया था.
चाय की चुस्की लेते हुए ममता बोली- भाई साहिब, आप चाय तो अच्छी बना लेते हैं. पर आप मुझे भाभी जी मत बोलिए, ममता ही कहिये.
राजन बोला- फिर आप भी मुझे भाई साहिब न कहकर नाम से ही बुलाइए.

दोनों में यह तय हुआ कि राजन उसे ममता और ममता राजन को मेनेजर साहब कहेगी.

राजन और ममता की खूब छन रही थी. दो तीन दिन ऐसे ही निकल गए. सुबह का नाश्ता भी कभी कभी ममता उसके लिए भी बना लेती और दोनों साथ नाश्ता कर लेते.
राजन बैंक से लेट ही लौटता.

ममता ने उससे कहा भी ‘डिनर भी साथ ही बना दूँगी’ पर राजन ने मन कर दिया.
हाँ यह जरूर था कि अक्सर राजन अपना टिफ़िन ममता के साथ ही डिनर पर खोल लेता और शेयर कर लेते.

आज राजन को चौथा दिन था. अगले दिन कोई हॉलिडे था तो बैंक बंद था. राजन ने दोपहर को ममता से फोन करके कहा- चलिए आज डिनर बाहर लेंगे, कल ऑफ है, कोई जल्दी नहीं है.
ममता बोली- चल सकती हूँ पर पहले मूवी दिखानी होगी फिर डिनर.
अब राजन को भी ममता का साथ अच्छा लग रहा था. और ममता भी इन चार पांच दिनों में ही राजन के साथ कम्फ़र्टेबल थी.

राजन शाम को पांच बजे तक आ गया और नहा धोकर जींस और टी शर्ट पहन कर तैयार हो गया.
उसने ममता को आवाज दी तो वो बोली- मुझे पांच मिनट और लगेगा.

इस बीच में राजन ने अपने लिए चाय बना ली.
ममता आई. आज तो वो शादीशुदा लग ही नहीं रही थी. उसने जींस और टॉप पहना था, बाल खुले और मैचिंग नेल पेंट, सन ग्लासेज!

राजन तो उसे दखता रह गया और बोला- मैं तो आपको पहचान ही नहीं पाया.
इस पर ममता बोली- मेनेजर साहब अगर आप ‘आप’ बोलेंगे तो मैं चली साड़ी पहनने … अरे डेट पर जा रहे हैं तो थोड़ा तो प्यार से बोलिए.
राजन बोला- ओके … पर आज तुम वाकई बहुत अच्छी लग रही हो.

ममता ने राजन से कहा- मेरी चाय कहाँ है?
राजन बोला- अभी बना देता हूँ.
तो ममता बोली- नहीं, अब देर हो जायेगी. चलिए निकलते हैं.
कहकर उसने राजन के कप से ही एक दो घूँट चाय पी ली.

राजन ने फटाफट गाड़ी निकाली और दोनों निकल लिए.

ममता राजन के साथ बहुत खुश थी. उसने अचानक आँखों में आंसू लाकर कहा कि प्रकाश तो उसकी क़द्र ही नहीं करता. पिछले दो तीन सालों से उसने प्रकाश के साथ न तो कभी बाहर डिनर किया ना कभी मूवी देखी. जब मन करता है तो वो अपनी सहेलियों के साथ ही घूमती फिरती है. पैसे की ममता को भी कोई दिक्कत नहीं थी. उसका मायका बहुत पैसे वाला था और इंश्योरेंस कंपनी की कमाई वो अपने पास ही रखती थी.

राजन शहर की भीड़ भाड़ से अलग हटकर मूवी हाल में गया. असल में वो नहीं चाहता था कि कोई बैंक कर्मी उन्हें साथ देखे.
मूवी लगी थी ‘ख्वाहिश’. मलिका शेरावत की हॉट फिल्म थी.

मूवी में कब राजन के हाथ में ममता का हाथ आ गया … कब ममता के हाथों पर पसीना आ गया.
इंटरवल में राजन ने ममता से पूछा- क्या लोगी?
तो ममता बोली- पॉपकॉर्न और एक ही कोल्ड ड्रिंक मंगा लो.

हॉट मूवी का इम्पैक्ट दोनों पर दिख रहा था. मूवी देख राजन ने ममता को एक महंगे रेस्टोरेंट में डिनर कराया. घर लौटते लौटते 11 बज गए थे.

घर आकर राजन ममता को गुड नाईट बोल कर अपने रूम में जाने को ही था कि ममता ने पूछा- कॉफ़ी पियोगे?
अब बात भाई साहिब से शुरू होकर मेनेजर साहब पर होती हुई ‘पिओगे’ पर आ गयी थी.
राजन ने मुस्कुरा कर कहा- क्यों नहीं … पर नहा कर फ्रेश हो लो. तुम भी चेंज कर लो, फिर बनाना.

राजन ने जल्दी से नहा कर शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनी और बेड पर बैठ कर टी वी ऑन कर लिया.

तभी ममता कॉफ़ी लेकर आ गयी. उसने भी चेंज करके नाईट सूट डाल लिया था. वो सामने चेयर पर बैठने लगी तो राजन ने कहा कि यहीं आ जाओ और बेड पर सरक कर जगह बना दी.
ममता ने एक अखवार बिछा कर ट्रे उस पर रख दी.
वो कॉफ़ी के साथ रोस्टेड काजू लायी थी.

राजन ने ममता से पूछकर सिगरेट जलाई और हँसते हुए उसकी ओर भी डिब्बी बढा दी तो ममता ने एक सिगरेट निकाल ली. राजन ने आगे झुककर उसकी सिगरेट जला दी और उससे कहा- मुझे मालूम है तुम सिगरेट पीती हो. जिस दिन प्रकाश जा रहे थे तो रात को तुम्हारे बीच कुछ झगड़ा हुआ था तो तुम बाहर आंगन में घूमते हुए देर रात सिगरेट पी रहीं थीं.
ममता चुप रही. वो गुमसुम हो गयी थी.

राजन ने उससे बहुत अपनेपन से पूछा- तुम दोनों के बीच क्या अनबन है?
ममता बोली- कुछ नहीं, मेरा नसीब ही ऐसा है.

राजन ने उसकी ओर कॉफ़ी का कप बढ़ाया और कहा- कॉफ़ी पियो. और इतनी अच्छी शाम गुजरी है तो मूड खराब मत करो.
दोनों कॉफ़ी लेकर टहलते हुए बाहर आ गए.

ममता ने उसके हाथों में अपना हाथ दे दिया था. वो बोली- मैं अगर तुम्हें राजन कहूं तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?
राजन ने उसका कन्धा थपथपा दिया.

ममता ने सिगरेट का लम्बा कश लेते हुए उसे बताया कि वो तो बहुत स्वछन्द और मस्त लड़की थी. जवानी की मस्त रौ में बह रही थी. उसके पिता और प्रकाश के पिता मित्र थे. प्रकाश के पिता सरकारी महकमें में ऊँचे ओहदे पर थे और ममता के पिता को अपने ठेकेदारी के बिज़नस में उनकी बहुत जरूरत पड़ती थी. तो बस उनकी मेहरबानियों के चलते ममता की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ प्रकाश से हो गयी. एक बच्चा भी हो गया.
प्रकाश के माता पिता अपराधबोध से दबे रहते हैं इसीलिए वो बच्चे को अपने साथ ले गए. और आज भी ममता को पैसे की पेशकश करते हैं पर ममता ने कभी उनसे पैसा नहीं लिया.
शराब पी पीकर प्रकाश ने अपने को बेकार कर लिया है. उससे सेक्स भी नहीं होता और तबियत भी अच्छी नहीं रहती. प्रकाश के माता पिता उसे समझा समझा कर थक गए, पर वो नहीं सुधरता.
अब ममता ने भी परिस्थितियों से समझौता कर लिया है और वो अपनी जिन्दगी अपने हिसाब से जीती है.

ममता रो रही थी.

राजन ने उसे ढाढस बंधाया और उसे कमरे में ले आया. राजन ने उसे बेड पर बिठाया और समझाया कि रोने से क्या होगा. उसे अपनी जिन्दगी अपने हिसाब से जीनी होगी.
ममता उसकी बात ध्यान से सुन रही थी. वो अब शांत हो गयी थी.

राजन ने उससे कहा- जाओ अब आराम से सो जाओ, सुबह नाश्ता साथ करेंगे. मैं तुम्हें आलू के परांठे बनाकर खिलाऊंगा.
ममता अंदर वाला गेट खोलकर अपने पोर्शन में चली गयी.

राजन ने लाईट बंद कर दी और बेड पर लेट गया. उसे टीशर्ट पहन कर सोने की आदत नहीं थी तो उसने उतार दी.

बाहर मौसम खराब हो गया था. बिजली कड़क रही थी. अचानक बारिश शुरू हो गयी.
एक बार बिजली जोर से कड़की और लाईट भी चली गयी.

तभी उसका दरवाजा खुला और भीगती हुई ममता अंदर आ गयी … आते ही वो राजन से चिपट गयी. वो बिजली कड़कने से डर गयी थी.
राजन ने उसे संभाला और उसे वाशरूम में जाकर अपने को सुखाने को कहा. उसके सारे कपड़े भीग गए थे. बाहर बारिश तेज थी.

राजन ने उससे कहा कि वो तौलिये से अपने को सुखा ले और बरामदे से होती हुई अपने कमरे में जाकर कपड़े बदल ले.
पर ममता इतनी डर रही थी और भीग कर कांप रही थी कि वो बाहर जाने को तैयार नहीं हुई.

राजन ने उसे अपनी टी शर्ट और लुंगी दी कि वो उसे पहन ले.
और खुद रसोई में जाकर दो चाय बना लाया.

ममता ने चाय के साथ सिगरेट जला ली और अब वो कुछ नार्मल हो रही थी. वो बेड पर चादर लपेट कर बैठ गयी. शायद वो बारिश में काफी डर रही थी.
राजन संकोच में सामने चेयर पर बैठ चाय पीता रहा.

अब लाईट भी आ गयी थी. राजन ने ममता से कहा- चलो मैं तुम्हें तुम्हारे रूम तक छोड़ आटा हूँ.
ममता उसका हाथ पकड़कर बाहर जाने लगी.

तभी फिर एक बार जोर से बिजली कड़की तो ममता कस के राजन से लिपट गयी. बस अब राजन का भी सब्र का बाँध टूट गया. उसने भी ममता को भींच लिया.

ममता ने सर उठाया और अपने जलते होंठ राजन के होंठों पर टिका दिये और पागलों की तरह उसे चूमने लगी.
राजन ने ममता के सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ा हुआ था और अपनी ओर भींचा हुआ था.

थोड़ी देर की चूमा चाटी के बाद राजन को होश आया कि ये सब ठीक नहीं हो रहा. वो शोभा से कैसे विश्वासघात कर सकता है. पर ममता की जवानी उसे बेईमानी करने पर मजबूर कर रही थी. जानते हुए भी ये गलत है, वो अपने को ममता से दूर नहीं कर पा रहा था.

ममता तो एक मासूम बच्चे की तरह उसमें अपना प्यार ढूंढ रही थी. वो कब एक भूखी शेरनी बन गयी, ऐसा खुद उसे मालूम नहीं था.

शायद तभी ममता को महसूस हुआ कि वो भावुकता और वासना में बह रही है … वो राजन से अलग हुई और उसे सॉरी बोल कर बाहर जाने लगी.
राजन चुप था.

ममता दरवाजे तक गयी और एक बार पीछे मुड़कर उसने राजन की ओर देखा. राजन उसे एकटक देख रहा था. ममता ठिठकी … अचानक राजन ने दोनों बांहें फैला दिन तो ममता भी अपने को नहीं रोक पायी और एक सूखी बेल की तरह राजन से जा लिपटी.

दोनों कुछ मिनट इसे ही चिपटे खड़े रहे और एक दूसरे को माथे पर, गालों पर चूमते रहे. राजन ने उससे अलग होकर दरवाजा और लाईट बंद कीं. नाईट लैंप की हल्की रोशनी में ममता राजन की आँखों में झाँकने लगी.

राजन ने उसके होंठों पर एक प्यारा सा किस दिया और उसे लेकर बेड पर आ गया.

ममता ने फुसफुसाकर कहा- राजन हम ये गलत कर रहे हैं.
राजन ने कहा- हाँ मुझे मालूम है … पर मैं मजबूर हूँ, अब मैं तुम्हें अपने से अलग नहीं कर सकता.

दोनों फिर चिपट गए.

इस चिपटा चिपटी में सबसे पहले तो ममता की लुंगी खुल गयी और धीरे धीरे दोनों के कपड़े प्याज के छिलकों की तरह उतर गए.

राजन और ममता दोनों ही जिन्दगी में पहली बार किसी गैर की बाँहों में नंगे चिपटे हुए थे. अब दो जिस्म एक होने को बेकरार थे.

राजन ने ममता के मांसल मम्मों को अपने हाथ से दबाना शुरू किया और एक एक करके निप्पल को दाँतों से हल्के हल्के से दबाना शुरू किया तो ममता ने भी उसका तना हुआ लंड मसलना शुरू कर दिया था.
ममता को तो ऐसा मस्त लंड जिन्दगी में पहली बार मिला था. उसे तो मरियल से प्रकाश की आदत थी जिससे कुछ होता जाता नहीं था, बस वो जबरदस्ती करके कभी अंदर कभी बाहर अपना माल गिरा देता था.

खैर इस समय ममता प्रकाश को याद करके अपना समय खराब नहीं करना चाहती थी. वो तो बस नसीब से मिले इस मौके के हर पल को जीना चाहती थी. वो आज अपनी जवानी के दिनों की सोची हर फंतासी को पूरा करना चाह रही थी. उसने जो कुछ पोर्न मूवीज में देखा था, वो सब आज सच करना चाहती थी.

राजन ने 69 की पोजीशन बनायीं तो ममता को उसका लंड मुख में लेने में संकोच सा हुआ. पर उसे ध्यान आया पोर्न मूवीज का … तो उसने झट से लोलीपोप समझ कर गप्प से उसका लंड मुंह में ले लिया और पहले धीरे धीरे … फिर तेज एक मंजे हुए खिलाड़ी की तरह राजन का लंड चूसना शुरू किया.

ममता की चिकनी चूत देख कर उसने ममता से पूछा- तुम तो तैयारी कर के आई थीं?
इस पर ममता लंड अपने मुख से निकाल कर बोली- मैं वेक्सिंग हर हफ्ते करती हूँ … आज दोपहर को तुम्हारे फोन आने के बाद की थी, तभी चूत भी चिकनी कर ली.

और राजन तो चूत चूसने में माहिर था. उसने ममता की चूत को ऐसा चूसा कि ममता तो कसमसा गयी और उसने अपना पानी छोड़ दिया. राजन को तो इसकी आदत थी … उसने ममता की चूत चाट कर साफ करी.

तब सीधे होकर ममता की टाँगें ऊपर पंखे की ओर करके चौड़ा दीं और अपना औज़ार घुसेड़ दिया उसकी गुलाब चिकनी चूत में!

थोड़ी देर धक्का पेल के बाद राजन को लगा कि वो छूटने वाला है तो उसने ममता से कहा- कहाँ निकालूँ?
पर ममता को मजा आ रहा था, उसकी आँखें बंद थीं और वो सीत्कारें ले रही थी- मजा आ गया मेनेजर साहब! आज आपने मेरे सारे अरमान पूरे कर दिए … मेरी भूख मिटा दी.

इससे पहले वो कुछ और कह पाती, राजन ने उसकी चूत अपने माल से भर दी. दोनों तृप्त होकर एक दूसरे से चिपक कर लेट गए.
ममता ने पास पड़ी लुंगी से अपने को पौंछा और राजन ने भी उसके ऊपर से हट कर अपने को पौंछा.

कहानी जारी रहेगी.
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