शहर में जिस्म की आग बुझाई- 1

(Shahar Me Jism Ki Aag Bujhai- Part 1)

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भूखे को खाना कहीं से भी मिले … वो वहीं चला जाता है। ठीक वैसे ही मेरे साथ भी हुआ … जिस्म की आग मुझे दूसरे मर्दों के बिस्तर तक ले गई।

नमस्कार दोस्तो,
मेरा नाम मुस्कान है और ये मेरी जिस्म की आग की पहली कहानी है. मैं अन्तर्वसना की नियमित पाठक हूँ. हमेशा ही मैंने सोचा कि अपनी कहानी भी आप लोगों के साथ साझा करूँ मगर व्यस्तता के कारण नहीं कर पाती थी।
मगर अब कोशिश करुँगी कि मैं भी अपनी हर कहानी आप तक पंहुचा सकूं।

दोस्तो, मैं अपने बारे में पहले बता दूँ:

मैं 30 साल की शादीशुदा महिला हूँ, मेरा फिगर 36-32-36 है और मेरी लम्बाई 5 फीट 7 इंच है। मैंने पढ़ाई में बी कॉम किया है।
मेरी शादी को 10 साल हो चुके हैं और मेरे घर में मैं मेरे पति और एक 6 साल की एक बेटी है। मेरे पति एक प्राइवेट संस्था में कार्य करते है।
दिखने में मैं काफी खूबसूरत हूँ मगर मेरे पति दिखने में उतने सुन्दर नहीं। मेरे पैर में बचपन से ही दिक्कत थी जिससे मैं थोड़ा लगड़ा कर चलती हूँ। इसके ही कारण घर वालों ने मेरी शादी जल्दी और सामान्य परिवार में कर दी।

दोस्तो, मेरे पति शादी के समय तो काफी सेक्स करते थे मगर उनका लंड उतना बड़ा नहीं है कि मुझे सन्तुष्ट कर सकें।
और अब तो कभी कभार ही सेक्स होता है।

मगर कहते हैं न कि भूखे को खाना कहीं से भी मिले … वो वहीं चला जाता है।
ठीक वैसे ही मेरे साथ भी हुआ … जिस्म की आग मुझे दूसरे मर्दों के बिस्तर तक ले गई।
मगर ये बात आज तक किसी को नहीं पता चलने दी।

दूसरे मर्दों के साथ सोना अब मेरे जिस्म की मजबूरी बन गई है; पति से सुख नहीं पा कर मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं था।

दोस्तो, आज की यह कहानी तब की है जब मैं पहली बार किसी दूसरे मर्द से चुदी थी।

यह बात शुरू होती है मेरी शादी के दो साल बाद तब हम नए नए गांव से शहर में आये थे। पति की एक कंपनी में नई नई नौकरी लगी थी तो वो मुझे लेकर शहर आ गए. अब यहाँ मैं और पति ही रहते थे। कंपनी की तरफ से एक अच्छा सा कमरा मिला था।

अब यहाँ आकर मुझे कुछ आजादी सी मिल गई थी। दिन भर पति काम में होते और मैं घर पर अकेली। बस दिन ऐसे ही कट रहे थे।

फिर एक दिन मेरी जिंदगी ने करवट ली।
मेरे पति ने शाम को घर आकर बताया कि कल मेरे कंपनी के मैनेजर घर आ रहे हैं खाना खाने, कुछ अच्छा सा बना लेना।

अगले दिन मैं सुबह से ही शाम के खाने की तैयारी में लग गई. घर की अच्छे से साफ़ सफाई भी की और खाने की पूरी तैयारी कर ली.

शाम को 5 बजे पति घर आ गए और मेरा काम देख काफी खुश हुए। वे अपने साथ एक शराब की बोतल भी लाये थे तो मैं समझ गई कि इनका पीने का भी कार्यक्रम है. वैसे भी उनकी पीने की आदत थी ही।

मैंने उनसे पूछा- मैनेजर कब तक आयेंगे?
तो उन्होंने कहा- 7 बजे आयेंगे. तुम भी अच्छे से तैयार रहना, घर के कपड़ों में मत रहना.
मैं ‘ठीक है’ बोल कर अपने काम में लग गई।

शाम साढ़े 6 बजे मैं तैयार हो गई एक गुलाबी रंग की हल्की सी साड़ी और उस पर काले रंग का ब्लाउज पहनी थी। ब्लाउज पीछे से गहरे गले का था जिसमे से मेरी गोरी पीठ मस्त दिख रही थी,

7 बजे दरवाजे की घंटी बजी. उस वक्त पति बाथरूम में थे तो मैं तुरंत गई और दरवाजा खोला.
सामने देखा तो एक 40-45 साल का लम्बा चौड़ा पंजाबी आदमी खड़ा था, उसने मेरे पति को पूछा तो मैं बोली- घर पर ही हैं, आप आइये।
और उसको अन्दर बुला लिया.

कुछ देर में मेरे पति भी आ गए और उन्होंने मेरा परिचय उनसे करवाया. उनका नाम सुखविन्दर था.
उसके बाद मैं अन्दर चली गई और दोनों बातें करने लगे।
मैं अन्दर खाना बनाने लगी।

मैं खाना बना रही थी और वहाँ रसोई से सुखविन्दर मुझे साफ़ साफ़ दिख रहे थे और वो भी मुझे देख पा रहे थे।
मैं अपने काम में लगी रही.

कुछ देर में पति आये और दो ग्लास और सोडा की बोतल और काजू लेकर चले गए.

इधर मैं खाना बना रही थी और उधर वो दोनों शराब पीने में व्यस्त थे। सुखविन्दर बार बार मुझे देखे जा रहा था। कई बार मुझे देख मुस्कुरा भी देता तो मैं भी मुस्कुरा कर उनका अभिवादन कर देती.
मगर उनके प्रति कुछ गलत मेरे मन में नहीं था, वो मुझसे काफी बड़े उम्र के भी थे. उस वक्त मैं 22 साल की थी।

करीब 40 मिनट बाद उन दोनों ने शराब ख़त्म कर ली तो मैंने खाना लगाया.
वो दोनों खाना खाने लगे मगर सुखविन्दर मुझे भी साथ खाने को कहने लगे। मैंने अपने पति की तरफ देखा तो उन्होंने भी कह दिया- तुम भी खा लो यहीं हमारे साथ!
मैं भी अपना खाना ले आई और साथ बैठ कर खाने लगी.

सुखविन्दर मेरे खाने की बहुत तारीफ कर रहे थे और साथ में पति को बोल रहे थे- तुम्हारी बीवी बहुत अच्छा खाना बनाती है.
और मुझे बोले- तुम जितनी सुन्दर हो, उतना ही अच्छा खाना बनाती हो।
अपनी तारीफ सुन कर मुझे अच्छा लग रहा था।

उन दोनों को ही शराब चढ़ चुकी थी. मेरे पति अब खाना ख़त्म कर चुके थे और हाथ धो कर सामने वाले कमरे में चले गए, मैं बस उनका साथ दे रही थी।
वो बार बार मेरी तरफ देख रहे थे मुझे उनका इस तरह देखना अच्छा नहीं लग रहा था।

अचानक मैंने गौर किया कि वो मेरे उभरे हुए वक्ष को बार बार देख रहे हैं. मैंने अपने ब्लाउज की तरफ देखा तो मेरी ब्रा की पट्टी ब्लाउज से बाहर निकल गई थी, वो उसे ही देख रहे थे.
मैंने साड़ी से उसको ढक लिया।

कुछ देर बाद हम दोनों ने खाना ख़त्म किया और वहां से उठकर हाथ धोने बाथरूम गए।
मैं उनको रास्ता दिखाते हुए आगे चल रही थी; पीछे से मेरी ब्लाउज को देख कर उन्होंने कहा- तुम्हारी ब्लाउज की डिजाईन काफी अच्छी है।
मैं समझ गई कि वो मेरी पीठ देख कर बोल रहे हैं.

बाथरूम जाकर मैं उनके हाथ में पानी डालने लगी वो हाथ धोकर बाहर आ गए. मैंने भी हाथ साफ़ किये और बाहर आ गई,
हम दोनों बाहर कमरे में गए तो देखा कि मेरे पति सो चुके हैं।

मैं उनको उठाने लगी तो सुखविन्दर ने मना कर दिया और बोले- कोई बात नहीं, रहने दो, उनको सोने दो; मैं अब चलता हूँ।
और वो दरवाजे की तरफ चल दिए.

जैसे ही दरवाजा खुला तो हमने देखा कि बाहर बारिश हो रही है। तब उन्होंने कहा- कुछ देर रुकना ही सही है, नहीं तो भीग जाऊँगा।
अब हम दोनों वहीं बाहर वाले कमरे में ही बैठकर बातें करने लगे।

उन्होंने कहा- तुम्हारे पति काफी किस्मत वाले हैं कि तुम जैसी हसीन बीवी मिली, काश तुम मेरी बीवी होती।
मैंने तुरंत कहा- क्या?
“वही जो तुमने सुना!”
इतने में मैं शर्मा गई और नज़र नीचे कर के बोली- ये सब क्या बोल रहे हैं आप?

वो भले नशे में थे मगर मेरे शर्म को भाम्प गए और मेरे पास आ गए, बोले- बिल्कुल सही कह रहा हूँ तुम अगर मेरी बीवी होती तो बात ही कुछ और होती। क्या मैं और तुम दोस्त बन सकते हैं?
उनके इस सवाल का जवाब नहीं दे पाई मैं!

वो फिर से पूछने लगे- बताओ क्या मैं तुम्हारा दोस्त बन सकता हूँ?
मैंने उनकी तरफ देखा और हां में अपना सर हिला दी।
वो काफी खुश हुए और मेरे हाथ को अपने हाथ में थाम कर और बोले- धन्यवाद मुस्कान!
और फिर हम दोनों में फ़ोन नम्बर का आदान प्रदान हुआ।

मेरे पति इन सब बातों से अनजान आराम से सो रहे थे।

कुछ देर में बारिश बंद हुई तो वो चले गये.

अगले दिन से ही जब भी मेरे पति घर पे नहीं होते तो उनका फ़ोन आने लगा। हम दोनों में काफी देर तक बातें होती रहती थी.
धीरे धीरे हम दोनों खुल गए और हम दोनों में गर्म बातें भी होने लगी थी। अब उनके फ़ोन का मुझे भी इंतजार रहने लगा। अब वो भी मुझे अच्छे लगने लगे थे.

ऐसे ही 2 से 3 महीने बीत गए।

फिर एक दिन मेरे पति ने घर आ कर बताया कि उनका प्रोमोशन हो गया है.
उस दिन हम दोनों बहुत खुश थे।

अगले दिन सुखविन्दर का जब फ़ोन आया तो पता चला कि इसमें उनका बहुत बड़ा हाथ है।
मैंने उनको धन्यवाद दिया।
मेरे पति का प्रमोशन होने के बाद अब वो शहर से बाहर भी जाने लगे कंपनी के काम से।

मेरी और उनके मैनेजर की दोस्ती ऐसे ही चलती रही। अब तो मेरे पति के न रहने पर घर भी आ जाते थे। मगर हम दोनों में कभी कुछ गलत काम नहीं हुआ।

एक दिन मेरे पति ने मुझे बताया- मुझे 5 दिनों के लिए बाहर जाना है, तुम यहाँ अकेली क्या करोगी, अगर चाहो तो तुम भी अपने मायके चली जाओ।
मगर मैंने मना कर दिया, मैंने कहा- मुझे कोई परेशानी नहीं, आप आराम से जा सकते हो।
दो दिन बाद मेरे पति चले गए।

सुबह 10 बजे सुखविन्दर का फोन आया. उनको पता था कि पति जाने वाले है.
हम दोनों में बात शुरू हुई और उन्होंने मुझसे मिलने के लिए कहा। वैसे तो वो घर आते रहते थे मगर उस दिन मेरे मन में कुछ अज़ीब सा लग रहा था जैसे कुछ अलग होने वाला है। अपने जिस्म की आग के चलते मैंने शाम को उनको घर आने के लिए कह दिया।

वो ठीक 7 बजे घर आये, उस दिन मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी।
उनके हाथ में एक बैग था।
मैंने पूछा तो उन्होंने बताया- मैं अपने घर में बोल के आया हूँ कि कुछ दिन के लिए बाहर जा रहा हूँ. और ऑफिस से भी मैंने छुट्टी ले ली है। मुझे कुछ दिन तुम्हारे साथ बिताने हैं. क्या मैं कुछ दिन तुम्हारे साथ रह सकता हूँ।
ऐसा सुन के तो मैं दंग रह गई, मैं तुरंत बोली- अगर किसी को पता लगा तो बहुत बुरा हो सकता है, ऐसा मत कीजिये।

तो वो समझाते हुए बोले- एक भी चिंता की बात नहीं है किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला।
फिर कुछ देर हम दोनों ने वहीं सामने रूम में बात की और फिर मैं खाना बनाने के लिए चली गई और वो टीवी देखने लगे।

खाना बनाते हुए बार बार मेरे मन में एक ही ख्याल आ रहा था कि ये मुझसे क्या चाहते हैं? कहीं इनका इरादा सेक्स करने का तो नहीं। यह सोच के मन में तो गुदगुदी होने लगी। मुझे लगा कि मेरे जिस्म की आग में आज इनके लंड का पानी पड़ने वाला है.
फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया।

इसके आगे क्या हुआ, यह मैं अपनी जिस्म की आग की हिंदी सेक्स कहानी के अगले भाग में बताऊँगी।
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