जवाहर जैन

अभी तक : साक्षी बोली- मंजू तेरा सब काम ठीक हुआ ना? मजा आया ना? मंजू बोली- मजा आया, इतना मजा आया कि यह अंदर

अभी तक : वेटर काफी लेकर आया। इसे पीते तक हम लोग यूँ ही सामान्य बातें करते रहे। काफी खत्म करके कप भिजवाने के बाद

साक्षी के साथ रंगरेलियों का आज दूसरा दिन ! अब तक आपने पढ़ा कि कल विदा होते समय साक्षी कह कर गई थी कि वह

जैसा साक्षी ने कहा था कि लौड़े को पूरा घुसेड़ना था। जबकि मैं उसे तकलीफ ना हो, इसलिए उसकी पहली चुदाई ज्यादा वहशी तरीके से

कहानी के पहले भाग में आपने जाना कि साक्षी से मिलने मैं देहरादून गया। वहाँ हम एक होटल में ठहरे। अब आगे की बात: होटल

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को नमस्कार! आप सबका प्यार ही मुझे बार-बार आपकी ओर खींच लाता है। अन्तर्वासना के पाठकों को बताना चाहूँगा कि मैं

पायल के साथ अपनी जिंदगी का हसीन पल गुजारने, उसके साथ हनीमून मनाने के बाद रात को मुझे बढ़िया नींद आई। अब तक आपने पायल

थोड़ी देर में ही पायल आई। वह जरी वाली कॉफी रंग की साड़ी के अलावा गहनों से लदी हुई थी। अभी वह बेमिसाल लग रही

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। मैं अभी आपको गुजरात के सूरत में अपनी एक दोस्त पायल की चुदाई की कहानी बता रहा हूँ।

अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार। मैं आपको पायल की चुदाई के बारे में बता रहा था कि मेरी उससे दोस्ती कैसे हुई और कैसे

मैंने पायल को फोन करके मैसेंजर पर आने कहा। वो आई, उसे बताया कि मैंने आपके पास आने का इंतजाम कर लिया हैं। परसों दोपहर

अन्तरवासना के सभी पाठकों को नमस्कार ! मेरी सभी कहानियों पर आप लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देकर मेरा उत्साह बढ़ाया है। मेरी अभी हाल में

स्नेहा रीमा से बात करने लगी। स्नेहा अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी, मैं गया वैसे ही बोली- क्या हुआ, अभी दिन में ही शुरू

स्नेहा रीमा से बात करने लगी। रीमा उसे कुछ बोली, बदले में स्नेहा बोली- ठीक है, यह अच्छी बात हैं हमें इससे कोई तकलीफ नहीं

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को नमस्कार। आपने मेरी लिखी कहानियों को सराहा और अपनी राय से मुझे अवगत कराया, इसके लिए धन्यवाद। मेरी अभी हाल

लेखक : जवाहर जैन सोनम ने मेरे लंड का सुपारा अच्छे से चाटा, फिर उसके मुंह में जितना अंदर हो सका उतना अंदर कर मेरे

लेखक : जवाहर जैन अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। मेरी लिखी हुई कहानियों को आपने पसंद किया, और अपनी अमूल्य राय से मुझे

लेखक : जवाहर जैन अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। ट्रेन में श्रद्धा के सहयोग से मैंने सीमा को चोदा। ट्रेन में हमने चुदाई

लेखक : जवाहर जैन दोनों के पहुँचने पर श्रद्धा ने सीमा से कहा- क्या बात है, मेरी वजह से आपको यहाँ दिक्कत हैं क्या, जो

लेखक : जवाहर जैन अन्तर्वासना के सभी पाठकों को नमस्कार। इससे पहले लिखी मेरी सारी कहानियों को आपने सराहा और अपनी प्रतिक्रिया देकर मेरा हौसला

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